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जो सेना अपनी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी हुई नहीं

जो सेना अपनी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी हुई नहीं होती वो एक सुस्त बुद्धि वाली सेना होती है और ऐसी सेनाएं...

Dainik Bhaskar

Feb 17, 2018, 06:40 AM IST
जो सेना अपनी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी हुई नहीं
जो सेना अपनी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी हुई नहीं होती वो एक सुस्त बुद्धि वाली सेना होती है और ऐसी सेनाएं दुश्मनों को कभी नहीं हरा सकती। यानी दुश्मन को सिर्फ वही सेना हरा सकती है जिसकी अपनी खुद की एक संस्कृति होती है।

- आधुनिक चीन के निर्माता कहे जाने वाले माओ जेडॉन्ग का कथन

चुड़ेला में झुंझुनूं व चूरू जिले के युवाओं के लिए सेना भर्ती शुरू, पहले दिन रतनगढ़, सुजानगढ़ व बीदासर तहसील के युवाओं की हुई दौड़

भास्कर संवाददाता | चूरू

चुड़ेला स्थित जेजेटी यूनिवर्सिटी के खेल मैदान पर शुक्रवार को शुरू हुई सेना भर्ती रैली में पहले दिन चूरू जिले की तीन तहसीलों के 3440 युवाओं ने दौड़ लगाई। इनमें से 394 फिजिकल फिट पाए गए। यानी सफलता का प्रतिशत 11.50 रहा। रतनगढ़, सुजानगढ़ व बीदासर तहसील के युवाओं की हुई दौड़ में 424 युवा पास हुए और बाद में फिजिकल में 394 को सलेक्ट किया गया। युवाओं ने शुक्रवार तड़के सुबह चार बजे से मैदान में एंट्री शुरू की थी। सुबह सात बजे तक एंट्री का क्रम जारी रहा। प्रवेश बंद होने के आधा घंटे पहले ही लगभग 90 प्रतिशत युवा मैदान में पहुंच चुके थे। भर्ती अधिकारी देवराज पात्रा ने बताया कि रैली में मेजर जनरल जेके पारवाल व ब्रिगेडियर आरएस राना ने भर्ती प्रक्रिया का जायजा लिया।

कई युवाओं ने 5.30 मिनट से कम समय में ही दौड़ पूरी कर ताकत का अहसास कराया। असल में, भारतीय सेना शेखावाटी युवाओं को प्राथमिकता देती है। सेना को जवान देने में प्रदेश में शेखावाटी पहले नंबर पर है। गांव के कच्चे रास्तों से होकर हर साल 700 से ज्यादा नौजवान इस पक्के इरादे के साथ सेना में भर्ती होते हैं कि देश पर आंच नहीं आने देंगे। पढ़िए रिपोर्ट...

तीन तहसीलों के 3440 युवाओं ने लगाई दौड़, इनमें से पास हुए 424 में 394 पाए फिजिकल फीट, 70% गांवों से थे

पहले दिन की भर्ती से जुड़े तीन ऐसे किस्से, जो गर्व और शौर्य की कहानी बयां करते हैं

1. रतनगढ़, सुजानगढ़ व बीदासर के 3440 युवाओं ने भाग लिया। इनमें से 70 फीसदी गांव-ढाणियों से थे। उन इलाकों से, जहां शहरों की तरह सुविधाएं नहीं होती। ट्रेनिंग ग्राउंड नहीं होते।

2. पहले दिन दौड़े 424 दौड़ में सफल घोषित किए गए। इनमें से मेडिकल के लिए 394 अभ्यर्थियों को चुना गया है। अच्छी बात यह थी कि ज्यादातर बच्चे दौड़ को निर्धारित समय में ही पूरा कर रहे थे। कई बच्चे गिरे भी, लेकिन फिर खड़े हुए।

3. अनुशासन का पाठ यहां के बच्चे हमेशा से ही घर, परिवार और पूर्व सैनिकों से सीखते रहे हैं। यहां के पूर्व सैनिक भी बच्चों को ट्रेनिंग देते रहते हैं। यही वजह है कि युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया के दरमियान अनुशासन भी बनाए रखा।

झुंझुनूं. भर्ती रैली में आए युवाओं से बातचीत करते सेना अधिकारी।


सेना भर्ती में ज्यादातर अभ्यर्थी नंगे पैर दौड़े।



5: 30 मिनट में दौड़ पूरी करने पर 60 अंक मिलते हैं

5.30 मिनट में दौड़ पूरी करने वाले अभ्यर्थियों को 60 अंक मिलते हैं। वहीं, 5.31 से 5.45 मिनट के दौरान आने वाले अभ्यर्थियों को अलग से नंबर के अाधार पर बैठाया जाता है। इसके बाद अभ्यर्थी जंप, जिगजैक और बीम के प्रोसेस से गुजरते हैं। 10 बीम वाले अभ्यर्थियों को 40 अंक, 9 बीम लगाने पर 33 अंक और 6 बीम से कम लगाने वाले को फेल कर दिया जाता है। इसके बाद मेजरमेंट टेस्ट लिया जाता है, जिसमें ऊंचाई, चेस्ट और वजन नापते हैं। अंत में सभी अभ्यर्थियों के अध्ययन व निवास संबंधी दस्तावेज जांचते हैं और सभी दस्तावेजों की फोटोकॉपी ली जाती है। अंत में सभी अभ्यर्थियों को मेडिकल के लिए तारीख व समय बताया जाता है।

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