विज्ञापन

दर्दनाक हादसा / दर्दनाक हादसा

Bhaskar News Network

Jan 17, 2018, 06:40 AM IST

Ratangarh News - साेमवार आधी रात 12.30 बजे हुए दर्दनाक हादसे ने मुरड़ाकिया गांव को झकझोर दिया। चूल्हे की चिंगारी से लगी आग में एक वृद्ध...

दर्दनाक हादसा
  • comment
साेमवार आधी रात 12.30 बजे हुए दर्दनाक हादसे ने मुरड़ाकिया गांव को झकझोर दिया। चूल्हे की चिंगारी से लगी आग में एक वृद्ध सहित 40 भेड़-बकरियां जिंदा जल गई। वो भी ग्रामीणों की आंखों के ठीक सामने। कोई कुछ न कर सका। सूचना देने के बावजूद दमकल पहुंची ही नहीं। ऐसे में डेढ़ घंटे बाद ग्रामीणों ने निजी टैंकर मंगवाकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक सब कुछ राख हो गया था। हादसा मुरड़ाकिया गांव की रोही में खेत में एक छान व दो झोंपड़े बनाकर रहने वाले गांव के लिक्षमण मेघवाल के यहां हुआ। दुर्घटना में लिक्षमण मेघवाल की मौत हो गई। हादसे में छान में बंधे करीब 45 भेड़-बकरी झुलस गए, जिसमें से 40 की मौत हो गई। एक झौंपड़े में रखा घरेलू सामान, अनाज व चारा जल गया।

शाम सात बजे पिता को खाना खिलाकर गया था, सुबह खेत में सब राख हो चुका था : हादसे को लेकर मृतक के पुत्र किशनलाल मेघवाल ने बताया कि वह सोमवार की शाम सात बजे खेत आया था और अपने पिता लिछमण मेघवाल को खाना खिलाकर वापस घर चला गया। शाम के समय सब कुछ ठीक था। देर रात हादसे की सूचना मिलने के बाद खेत पहुंचा, तो सबकुछ राख हो चुका था। उसका पिता खेत में भेड़-बकरियां चराते थे। हादसे में उनके पिता सहित छान में बंध रही 10 बकरी, 25 भेड़े, 10 बकरियों के बच्चे (मेमने) भी जल गए, इनमें से 40 की झुलसने से मौत हो गई। पांच भेड़ों का उपचार किया।

मृतक वृद्ध व्यक्ति।

सालासर. खेत में लगी आग बुझाते ग्रामीण।

पौने दो घंटे बाद जब पुलिस पहुंची, तब तक सब कुछ राख हो चुका था वहां

सालासर क्षेत्र में एक भी दमकल नही हैं। दमकल के अभाव में सालासर सहित थाने के नीचे आने वाले गांवों में आग लगने की स्थिति में निजी टैंकरों से ही काम चलाना पड़ता है। सोमवार की रात हुए हादसे के दौरान भी दमकल की कमी खूब खली। ग्रामीणों के अनुसार हादसे की सूचना देने के करीब पौने दो घंटे बाद सालासर से पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को 12.40 बजे सूचना दे दी गई थी। लेकिन 13 किमी दूरी तय करने में पुलिस को पौने दो घंटे लग गए। पुलिस करीब 2.20 बजे मौके पर पहुंची। तब वहां राख के सिवाय कुछ नहीं था। 20 किमी दूर सुजानगढ़ और 40 किमी दूर रतनगढ़ से दमकल नहीं पहुंच सकी। ऐसे में हारकर निजी टैंकर मंगवाने पड़े, लेकिन तब तक सब कुछ राख हो चुका था।

झोंपड़े में सो रहे 75 वर्षीय बुजुर्ग और 40 भेड़-बकरिया जिंदा जले

13 किमी दूर सालासर से पुलिस को आने में पौने दो घंटे लगे, दमकल तो पहुंची ही नहीं, नतीजा-जिंदा जल गए

बे-बस आंखों देखी; कोई कुछ नहीं कर पाया...

आंखों के सामने चीखते हुए दम तोड़ दिया लिक्षमण ने

मेरा खेत लिछमण मेघवाल के खेत के पास ही है। मैं रात करीब 12.30 बजे पेशाब करने के लिए उठा था। जैसे ही घर के बाहर आया तो लिक्षमण के खेत में आग लगी दिखाई दी। आग की लपटों को देखकर मैं उस तरफ दौड़कर गया। इसी दौरान मैंने गांव के मांगीलाल सहित अन्य ग्रामीणों को फोन किया। 10 मिनट में हम सब वहां पहुंच गए थे। आग से दोनों झौंपड़े और छान पूरी तरह से घिरी हुई थी। झौंपड़े के अंदर से लिक्ष्मण के चीखने के आवाज आ रही थी, लेकिन हम सब बेबस थे। कुछ नहीं कर पा रहे थे। क्योंकि खेत में पानी नहीं था। हम सिर्फ दमकल के आने का इंतजार करते रहे....।

-नारायणराम जाट, पड़ोसी

भास्कर पड़ताल

सालासर थाने के एएसआई गोर्वधन ने रात 1.55 बजे चूरू कंट्रोल रूम में आग की सूचना दी और दमकल भेजने के लिए कहा। बता दें कि ग्रामीणों ने सालासर थाने में रात 12.40 बजे ही फोन कर दिया था। तब चूरू कंट्रोल रूम से पहले सुजानगढ़ थाने में फोन किया गया, तो बताया गया कि दमकल खराब है, रतनगढ़ से मंगवाओ। इसके बाद रतनगढ़ थाने में फोन किया गया, तो वहां भी दमकल खराब बताई गई। ऐसे में 2.15 बजे कंट्रोल रूम से एएसआई गोवर्धन को फोन कर दोनों दमकल खराब होने की सूचना दी और चूरू से दमकल भेजने की बात कही। तब एएसआई गोवर्धन मौके पर पहुंच चुके थे और वहां के हालात देखकर उन्होंने दमकल भेजने के लिए मना कर दिया। क्योंकि तब तक निजी टैंकरों से आग पर काबू कर लिया गया था। सुजानगढ़ से घटनास्थल की दूरी करीब 20 किमी है। यदि सुजानगढ़ की दमकल पहुंचती तो काबू किया जा सकता था। वहीं सुजानगढ़ एसडीएम दीनदयाल बाकोलिया के अनुसार उनके पास रात करीब 2.30 बजे सूचना आई। सरपंच और ग्रामीणों ने बता दिया कि निजी टैंकरों से आग पर काबू कर लिया गया, लेकिन इससे पहले झौंपड़े में साे रहे वृद्ध व पशुओं की जलने से मौत हो गई है। वे सूचना मिलते ही आधा घंटे में ही मौके पर पहुंच गए। पटवारी से पूरी जानकारी मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता दिलवाई जाएगी।

दमकल नहीं थी, निजी टैंकर मंगवाए जो 1 घंटे बाद पहुंचे

मेरे पास गांव के ही मांगीलाल का फोन आया था, वह हड़बड़ाया हुआ था। उसने जैसे ही मुझे बताया कि लिक्षमण के खेत में आग लगी है, आप पहुंचो। तब मैंने सबसे पहले सालासर पुलिस थाने में फोन किया। उसके बाद मैं अन्य ग्रामीणों को लेकर मौके पर पहुंचा। तब झौंपड़े और छान पूरी तरह से अाग की लपटों में घिरे हुए थे। दमकल की उपलब्धता नहीं होने के कारण पानी के निजी टैंकर मंगवाए। वे करीब एक घंटे बाद 1.30 बजे पहुंचे। इस घंटे में बेबस आंखों से सबकुछ जलता हुआ देखता रहा, लेकिन कुछ नहीं कर पाया। अधिकारियों को फोन किए।

-सांवरमल राजपुरोहित, सरपंच

सालासर में दमकल नहीं, सुजानगढ़ और रतनगढ़ की दमकल खराब थी

X
दर्दनाक हादसा
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन

किस पार्टी को मिलेंगी कितनी सीटें? अंदाज़ा लगाएँ और इनाम जीतें

  • पार्टी
  • 2019
  • 2014
336
60
147
  • Total
  • 0/543
  • 543
कॉन्टेस्ट में पार्टिसिपेट करने के लिए अपनी डिटेल्स भरें

पार्टिसिपेट करने के लिए धन्यवाद

Total count should be

543
विज्ञापन