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विधानसभा चुनाव से पहले सड़कें बनाने के दावे फेल, क्योंकि दो बार तो निरस्त हो चुके हैं टेंडर

विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार की ओर से हर क्षेत्र में सड़कों की सौगात देने का दावा सच साबित होने की स्थिति में...

Danik Bhaskar | Feb 15, 2018, 06:50 AM IST
विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार की ओर से हर क्षेत्र में सड़कों की सौगात देने का दावा सच साबित होने की स्थिति में है। क्योंकि अभी तक इन सड़कों के लिए टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है।

हालांकि पहले दो बार टेंडर हुए, लेकिन दोनों ही बार किसी न किसी वजह से निरस्त हो गए। पहली बार नवंबर में और दूसरी बार हाल ही में टेंडर निरस्त हुए हैं। सरकारी दावों के मुताबिक सितंबर तक सड़कों का काम पूरा होना था। अभी तक टेंडर नहीं होने से अब दिसंबर तक भी सड़कें बनना मुश्किल है।

जिले की दो नगरपरिषद व आठ नगरपालिका क्षेत्रों के लाखों लोगों को टूटी सड़कों से छुटकारा दिलाने के लिए इनके नवीनीकरण पर 44 करोड़ 60 लाख रुपए खर्च होने हैं। इस राशि से करीब 150 किलोमीटर तक की सड़कों को तैयार किया जा सकेगा। विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने प्रदेश के नगर निगम, नगरपरिषद और नगरपालिकाओं में एक हजार करोड़ रुपए खर्च कर नई सड़कें बनाने का प्लान बना रखा है। जिले से नगरपरिषद व पालिकाओं की ओर से सड़कों के प्रस्ताव भेजने के बाद उक्त मंजूरी मिली थी। चूरू व सुजानगढ़ नगरपरिषद को आठ-आठ करोड़ व नगरपालिकाओं को चार-चार करोड़ रुपए सड़कों के नवनिर्माण के लिए मिले हैं। केवल सरदारशहर ने 60 लाख रुपए के ही प्रस्ताव भेजे थे। रूडिस्को को सड़क निर्माण और सुधार के लिए टेंडर जारी करेगा।

750 करोड़ हुडको से लिए : मुख्यमंत्री के बजट 2017-2018 की घोषणा में सभी शहरी स्थानीय निकायों में सड़क बहाली का काम शुरू करना था। इसके लिए आरटीआईडीएफ से 250 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई है। इसे बढ़ाकर हुडको से 750 करोड़ का ऋण लेकर 1000 करोड़ रुपए किया गया है। बताया जा रहा है कि इस ऋण राशि को नियमानुसार नगरपरिषद व नगरपालिकाओं के ही खाते से काटा जाएगा। अब इनके स्तर पर ही टैंडर होंगे।

दो नगरपरिषद और आठ नगरपालिका की बदहाल सड़कें सुधारने के लिए फाइनल होने थे टेंडर, साढ़े 44 करोड़ से बननी है 150 किमी सड़कें

10 दिन में तैयार अक्टूबर में ही भेजी थी रिपोर्ट

स्वायत शासन विभाग के निदेशक एवं संयुक्त सचिव पवन अरोड़ा ने सभी आयुक्त, अधिशासी अधिकारियों से क्षतिग्रस्त सड़कों की रिपोर्ट 10 दिन में उपलब्ध करवाने के लिए कहा था। उसी आधार पर परिषद व पालिकाओं की टीम ने मौका मुआयना कर 27 अक्टूबर को रिपोर्ट तैयार कर भेजी। सभी ने अपने-अपने हिसाब से सड़कों के प्रस्ताव बनाकर 10 से 20 करोड़ रुपए तक के प्रस्ताव भेजे थे।

सबसे पहले चार दिसंबर को टैंडर खुले : नवंबर में टैंडर के बाद चार दिसंबर को टेंडर खोले गए। इसमें शर्तों के मुताबिक बताया गया था कि 13 दिसंबर को वर्कऑर्डर जारी किया जाएगा। इसके बाद सड़कों का निर्माण शुरू होकर 30 सितंबर 2018 तक सड़कों का जाल बिछाया जाएगा। इसके बाद सभी नगर निकायों ने डिटेल एस्टीमेट तैयार कर सरकार को भेजे थे। पहले टैंडर में ज्यादा रेट आने और दूसरे में ठेकेदारों द्वारा रेट कम नहीं करने की वजह से टैंडर प्रक्रिया निरस्त हो गई।

इन करोड़ों की राशि से कहां कितनी किलोमीटर बननी है सड़क : चूरू नगरपरिषद की ओर से भेजे गए प्रस्तावाें में कुल 46.74 किमी व सुजानगढ़ नगरपरिषद 22 किमी सड़क बनाएगा। इधर, रतनगढ़ नगरपालिका 16, रतननगर 9.35, बीदासर 12, राजलदेसर में कुल 25 किमी की सड़क बनेगी। दूसरी ओर तारानगर नगरपालिका ने नौ करोड़ 19 लाख रुपए के 15 किलोमीटर व सादुलपुर नगरपालिका ने पांच करोड़ 56 लाख के प्रस्ताव बनाकर कुल 24 किमी सड़क के प्रस्ताव भेजे। दोनों जगह चार-चार करोड़ रुपए का काम होगा। सरदारशहर ने 60 लाख रुपए के 2.56 किमी के ही प्रस्ताव भेजे।

अब नगरपरिषद वाइज होंगे टैंडर : नगरपरिष आयुक्त भंवरलाल सोनी का कहना है कि किसी न किसी तकनीकी कारणों की वजह से दो बार टैंडर निरस्त हुए हैं। अब इस तरह का निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक नगरपरिषद व नगरपालिका अपने स्तर पर टैंडर प्रक्रिया करेगी।