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युग शताब्दी महोत्सव 2018 के लिए किया भूमि पूजन, पंचरंगी महाध्वजा की स्थापना की

नेशनलहाइवे 11 स्थित भोला बाबा बगीची में संत पुष्करनाथ महाराज की बरशी पर होने वाले युग शताब्दी महोत्सव 2018 के लिए...

Dainik Bhaskar

Jan 05, 2018, 07:16 AM IST
युग शताब्दी महोत्सव 2018 के लिए किया भूमि पूजन, पंचरंगी महाध्वजा की स्थापना की
नेशनलहाइवे 11 स्थित भोला बाबा बगीची में संत पुष्करनाथ महाराज की बरशी पर होने वाले युग शताब्दी महोत्सव 2018 के लिए गुरुवार को भूमि पूजन किया गया पंचरंगी महाध्वज स्थापना की गई। बगीची के महंत सोमनाथ महाराज के सानिध्य में हुए कार्यक्रम में रतनगढ़ के यज्ञाचार्य पं. देवकीनंदन माठोलिया पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन ध्वज स्थापना करवाई। देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवा ने कहा कि देश में दिव्य समय चल रहा है। राजलदेसर जैसे छोटे से कस्बे में 32 मान अखाड़े का 201वां आयोजन होना अपने आप में सौभाग्य परमात्मा की कृपा है। पांच मीटर का कपड़ा शरीर पर धारण करने वाले संत-महात्माओं के काम की व्यवस्था कोई अबरपति नहीं कर सकता। उनकी व्यवस्था तो स्वयं ठाकुरजी महाराज जी करते है। इस मौके पर संत हनुमाननाथ, सुरजीतनाथ सहित अन्य संत श्रद्धालु उपस्थित थे। आयोजक महंत सोमनाथ महाराज ने बताया कि 15 से 23 जनवरी तक युग शताब्दी महोत्सव के तहत 32 मान धूणी का भंडारा, पंच कुंडीय रूद्र महायज्ञ भागवत कथा होगी।

सजाई गई राधाकृष्ण की झांकी।

सरदारशहर | वार्ड10में बाबूलाल जांगलवा के नोहरे में चल रही नानी बाई रो मायरो कथा के में गुरुवार को राधा-श्रीकृष्ण की संजीव झांकी सजाई गई। कथा के दौरान कथावाचक पं. अजय भाई ने कहा कि भगवान के भरोसे पर रहने वाले के सभी काम भगवान स्वयं पूरे करते है। नरसी भक्त ने भगवान की भक्ति में सबकुछ उन छोड़ दिया। ऐसे में भगवान को ही आगे होकर उसके सारे काम करने पड़े। भगवान ने नानी बाई का मायरा ऐसा भरा, जो आज तक कोई नहीं भर पाया। आज का मानव केवल संकट के समय भगवान को याद करता है, जबकि सुख के दिनों में उनको भूल बैठता है। ऐसी गलत हमें नहीं करनी चाहिए। सुख हो या दुख हर समय भगवान का स्मरण करना चाहिए। कथा के दौरान पालिकाध्यक्ष सुषमा पींचा, फूसराज, मंशीराम, मिलापचंद, राजू सोनी, सांवरमल पारीक आदि उपस्थित थे।

रतनगढ़| गोसेवार्थ पौद्दार गेस्ट हाऊस में चल रही भागवत कथा का समापन गुरुवार को एक कुंडीय हवन के साथ हुआ। हवन में मुख्य यजमान विश्वनाथ घोड़ीवाला दंपत्ती ने आहुतियां दी, वहीं श्रद्धालुओं ने हवन कुंड की परिक्रमा की। कथा के समापन पर शोभायात्रा निकाली गई। कथा के अंतिम दिन कथावाचक पवन जोशी ने कहा कि कथा के सुनने से व्यक्ति का कल्याण होता है तथा मन की मलिनता दूर होती है। जीवन में सेवा का संकल्प ले, क्योंकि सेवा में जो आनंद मिलता है, उसकी अनुभूति अन्यत्र कहीं नहीं होती। उन्होंने गुरुवार की कथा में उद्धव गीता, शीशपाल वध, परीक्षित मोक्ष के प्रसंगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा समापन पर भजनों की प्रस्तुति पर उपस्थित श्रद्धालु पांडाल में मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे।

रतनगढ़. पूजा-अर्चना करते यजमान उपस्थित श्रद्धालु।

राजलदेसर. भूमि पूजन करते देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवा।

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