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रावतभाटा में रखा पहला रोजा, मोड़क और चेचट में आज माहे रमजान की पहली नमाज / रावतभाटा में रखा पहला रोजा, मोड़क और चेचट में आज माहे रमजान की पहली नमाज

Bhaskar News Network

May 18, 2018, 06:35 AM IST

Rawatbhata News - शहर में दो मस्जिद हैं। मदीना मस्जिद में नमाज अदा करने वाले लोगों ने गुरुवार को पहला रोजा रखा। बुधवार को तरावीह की...

रावतभाटा में रखा पहला रोजा, मोड़क और चेचट में आज माहे रमजान की पहली नमाज
शहर में दो मस्जिद हैं। मदीना मस्जिद में नमाज अदा करने वाले लोगों ने गुरुवार को पहला रोजा रखा। बुधवार को तरावीह की नमाज पढ़ी गई। मस्जिद के प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली के हिसाब से यहां पहला रोजा रखा गया। वहीं, जामा मस्जिद में खुशी मनाई गई। यहां शुक्रवार से पहला रोजा शुरू होगा। सदर बाबूखां ने बताया कि कोटा के अनुसार यहां पर रोजा शुरू किया गया। यहां पर कुछ लोगों ने गुरुवार को पहला रोजा रखा, जबकि कुछ लोग शुक्रवार को पहला रोजा रखेंगे।

जामा मस्जिद के मौलाना जुल्फीकार अहमद रिजवी के मुताबिक सुबह सहरी, शाम को इफ्तार करने का नाम रोजा रखना नहीं है। बुरी आदतों से तौबा करने को रोजा कहते हैं। उन्होंने बताया कि न जुबां से किसी को बुरा कहें, न दिमाग में कोई बुराई उपजे, न ही कान से किसी की बुराई सुने और न उस तरफ कदम बढ़ाएं जो बुराई की तरफ ले जाता हो। इन सभी का पालन करना सही मायने में रोजा है, लोग इनका एहतराम करें।

यह होता है रोजा

रमजान का पवित्र माह फिजा में इबादत और इनायत का खूबसूरत तालमेल सजा रहा है। रोजा का अर्थ तकवा है। इंसान रोजा रख कर अपने आप को ऐसा इंसान बनने की कोशिश करता है, जैसा उसका रब चाहता है। तकवा यानी अपने आप को बुराइयों से बचाना और भलाई को अपनाना है। रोजा केवल भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं कहा जाता है, रोजा इंसान के हर एक भाग का होता है। एक रोजा भी बगैर किसी कारण छोड़ दे तो वह पूरी जिंदगी रोजा रख कर भी उस एक रोजा का सबाब नहीं पा सकता है। इफ्तार रोजे पूरे होने का वक्त तब होता है जब सूरज डूबता है।

इस बार 5 शुक्रवार

इस बार पांच शुक्रवार यानि जुमा इस माह आ रहे हैं। अगर तीस रोजे पूरे हुए तो जुमातुल विदा पर ये महीना खत्म होगा। शनिवार को ईद होगी। सदर बाबूखां ने बताया कि पहला रोजा शुक्रवार को शुरू होगा। गुरुवार रात 9.15 बजे तरावीह की नमाज अदा की गई।

मोड़क स्टेशन. गुरुवार शाम को जैसे ही आसमान में रमजान का चांद दिखाई दिया। उसी के साथ कस्बे की मुस्लिम बस्तियों में खुशी का माहौल हो गया। हर तरफ से आतिशबाजी की आवाज आने लगी। सभी एक दूसरे को माहे रमजान की मुबारकबाद देने लगे। मुबारक बाद का सिलसिला एक दूसरे के घर जा जाकर देने का भी चलता रहा। रमजान के पहले ही दिन जुमा होने के कारण मुस्लिम समाज में उत्साह ज्यादा है। मस्जिदों में गुरुवार रात से विशेष नमाज तरावीह भी अदा की गई। जो पूरे माह ईद के चांद दिखाई देने तक जारी रहेगी। इसके लिए कस्बे की तीन मस्जिदों में तरावीह की नमाज पढ़ाई जाएगी। जिसमें जामा मस्जिद में हाफिज अब्दुल बासित, छापेड़ा मस्जिद में हाफिज मकसूद,दरगाह हबीबिया मस्जिद में हाफिज नूर मोहम्मद नमाज अदा करवाएंगे।

एक नेकी के बदले 58 सवाब देता है खुदा

शहर काजी मोहम्मद जाहिद हबीबी ने बताया कि माहे रमजान में अल्लाह की और से रहमत की बरसात होती है। इस पाक माह में अगर बंदा एक नेकी करता है तो उसके बदले अल्लाह उसको 70 नेकियों का सवाब देता है। वहीं, रोजा रखने से इंसान बुराई छोड़कर अच्छाई की राह पर चलने लगता है। शहर काजी ने बताया कि इस भीषण गर्मी में 15 घटे का रोजा रहेगा। रमजान माह में कस्बे की मस्जिदों पर आकर्षक सजावट की जाएगी। अल सुबह सेहरी के लिये रोजेदारों को उठाने के लिये युवा टोलियों के रूप में गश्त करेंगे।

सुकेत. कस्बे में चांद दिखने के साथ ही मुस्लिमजनों में हर्ष की लहर दौड़ गई। चांद के दीदार के साथ ही रमजान माह का आगाज हो गया। कस्बे में कई जगहों पर आतिशबाजी कर लोगों ने माहे रमजान का स्वागत किया। एक दूसरे को बधाई दी नमाज अदा की। यहां की मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाएगी।

मोड़क स्टेशन. जामा मस्ज़िद के सामने रमज़ान की मुबारकबाद देते हुए।

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