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मंडी में सब्जी विक्रेता और किसान आमने-सामने, डेयरियों में दूध खत्म

हनुमानगढ़. किसानों द्वारा लगाई गई अस्थाई दुकानों से सब्जी खरीदते लोग। भास्कर संवाददाता|हनुमानगढ़ स्वामीनाथन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 05, 2018, 06:10 AM IST

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    हनुमानगढ़. किसानों द्वारा लगाई गई अस्थाई दुकानों से सब्जी खरीदते लोग।

    भास्कर संवाददाता|हनुमानगढ़

    स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने और फसलाें का लाभकारी मूल्य दिलवाने जैसी बड़ी मांगों को लेकर शुरू हुआ किसानों का आंदोलन अब स्थानीय स्तर पर बंटने लगा है। उधर, राष्ट्रीय स्तर पर भी आंदोलन की समीक्षा की बात सामने आई है। आंदोलन से जुड़े नेता इंद्रजीत पन्नीवाली ने बताया कि आंदोलन के भविष्य का फैसला मंगलवार को दिल्ली में होने वाली बैठक में होगा। पन्नीवाली ने बताया कि पंजाब में अांदोलन के दौरान असामाजिक तत्वों के द्वारा की गई तोड़फोड़ के चलते संगठनों ने आपात बैठक का निर्णय लिया है। स्थानीय स्तर पर भी सोमवार को मंडी में सब्जी की बोली रुकवाने के लिए पहुंचे किसानों के दल को विरोध का सामना करना पड़ा। मंडी के व्यापारियों ने कहा कि मंडी में आकर बोली रुकवाने की बजाय सब्जियों को गांवों में रोकना चाहिए। शहर में आकर व्यापारियों के कामकाज में दखल देना सही नहीं है। सब्जी बेचने आए किसानों ने भी बोली बंद करने का विरोध जताया। इन किसानों का कहना था कि बड़े जमींदारों ने गेहूं और सरसों बेच दी है। अब दो-चार बीघा जमीन ठेके पर लेकर सब्जी उगाने वाले काश्तकारों को अपनी उपज बेचने से रोका जा रहा है। सब्जी दो दिन मंडी में नहीं आएगी तो खराब हो जाएगी। अपनी उपज नहीं बेेचेंगे तो खाएंगे क्या और ठेके की राशि कहां से देंगे? इसके बाद बोली बंद करवाने आए किसान मंडी से चले गए और सामान्य दिनों की तरह काम भी हुआ। इसका असर बाजार में भी देखने को मिला। (विस्तृत पेज 15 पर )

    मंडी में बोली रुकवाने पहुंचे किसानों का विरोध, सब्जी बेचने वाले बोले- आपने अपनी गेहूं बेच दी, अब ठेके पर ली जमीन की सब्जी हम कहां लेकर जाएं?

    रावतसर: नहीं हुई कृषि जिंसों की बोली, दूध, दही छाछ 3 गुणा अधिक दाम में मिले : गांव बंद हड़ताल के चौथे दिन धानमंडी में कारोबार पूरी तरह ठप रहा। किसान आंदोलन के समर्थन में व्यापारियों ने सोमवार से कृषि जिन्सों की बोली नहीं करवाने की घोषणा की थी। इसके बाद धानमंडी सूनी नजर आई। वहीं सबसे ज्यादा परेशानी दूध व दूध से बने उत्पादों को लेकर हो रही है। सरस डेयरी के बूथों पर सोमवार को उत्पाद नहीं मिले। कुछ बूथों पर उपलब्ध दूध, दही व छाछ निर्धारित मूल्य से 3 गुणा अधिक मूल्य तक बेचे गए।

    संगरिया: ‘तेरे चंगे दिन दी उडीक च साडे मंदे दिन होगे’: किसानों ने लोक गीत और कविताएं सुना कर केंद्र सरकार को विरोध दर्ज करवाया। सरजीत सिंह ने लोकगीत सुनाए। किसान नेता बलकौर सिंह ढिल्लो ने कहा की केंद्र सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करे एवं किसानों को राहत प्रदान करें। हरिपुरा के किसानों का धरना चौथे दिन भी जारी है। वहीं किसानों ने गीत ‘तेरे चंगे दिन दी उडीक चै साडे मंदे दिन होगे।’आदि सुनाकर सरकार पर तंज कसे।

    फेफाना: नहीं हुई कृषि जिंसों की बोली, दूध, दही छाछ 3 गुणा अधिक दाम में मिले : किसानों ने पुलिस चौकी के आगे दस जून तक धरने की शुरुआत सोमवार से की। राजस्थान किसान यूनियन व स्वाभिमान किसान संघ ने मुख्यमंत्री के नाम का हवलदार मक्खन सिंह को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसान दलीप दास स्वामी, किसान नत्थूराम ज्याणी, राममूर्ति भादू, चौथमल छिपा, शेर सिंह जाखड़ आदि मौजूद थे।

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