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णमोकार मंत्र से होता है पुण्य का संचय

भास्कर न्यूज| मदनगंज-किशनगढ़ सिटी रोड स्थित जैन भवन पर मुनि पूज्य सागर महाराज ने णमोकार मंत्र पर प्रवचन दिए। मुनि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 01, 2018, 06:15 AM IST

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    भास्कर न्यूज| मदनगंज-किशनगढ़

    सिटी रोड स्थित जैन भवन पर मुनि पूज्य सागर महाराज ने णमोकार मंत्र पर प्रवचन दिए। मुनि श्री ने कहा कि जैन धर्म का सबसे बड़ा मंत्र णमोकार मंत्र है। इस मंत्र को किसी ने नही बनाया, यह अनादि मंत्र है। यह ऐसा मंत्र है जिसके स्मरण से पाप कर्म तत्काल नष्ट हो जाते हैं। ये एक अचूक मंत्र है और इसकी साधना का फल अवश्य ही मिलता है। मुनिश्री ने कहा कि णमोकार मंत्र से बड़े से बड़ा संकट भी टल जाता है। प्राचीन शास्त्रों में णमोकार मंत्र को पंच मंगल मंत्र, अपराजित मंत्र, मंत्र राज, नवकार मंत्र, मूल मंत्र, मंगल सूत्र, महामंत्र, अनादि निधन मंत्र सहित आदि नामों से जाना जाता रहा है। मुनि पूज्य सागर ने कई उदाहरण देकर अपनी बात को पूरा किया। कार्यक्रम का संचालन सीपी वैद ने किया।

    यह णमोकार मंत्र की विशेषता

    मुनि श्री ने कहा कि यह मंत्र प्राकृत भाषा में लिखा गया है। इस मंत्र में संसार की ऐसी पवित्र आत्माओं को नमस्कार किया गया है जिन्होंने संसार के मोह जाल को छोड़ दिया और आत्मा साधना पर लग कर अपना और दूसरे जीवों का कल्याण करने में लग गए। वह आत्माएं अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु परमेष्टि की है। इन पवित्र आत्माओं का चिंतन करने से अशुभ कर्म नष्ट हो जाते। पुण्य का संचय होता है वह पुण्य ही सुख देने वाला होता है। संसार के सारे सुख पुण्य से ही मिलते है। णमोकार मंत्र का मर्मज्ञ बताते हुए मुनि श्री ने कहा कि वर्तमान में आचार्य,उपाध्याय और साधु परमेष्ठी के साक्षात दर्शन होते तथा अरिहंत और सिद्ध भगवान की प्रतिमा का दर्शन होता है।

    यह है णमोकार मंत्र में

    मुनि श्री ने णमोकार मंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि णमोकार मंत्र 18432 प्रकार से बोल सकते है। इस मंत्र का सब से छोटा रूप ओम है जिसमें पांचो परमेष्ठी गर्भित है। णमोकार मंत्र में कुल 58 मात्राएं, 35 अक्षर, 34 स्वर, 30 व्यंजन और 5 पद हैं। आठ करोड़ आठ लाख आठ हजार आठ सौ आठ बार लगातार णमोकार मंत्र का जाप करने से शाश्वत सुख की प्राप्ति होती है और लगातार सात लाख जाप से कष्टों का नाश होता है । लगातार एक लाख जाप धूप के साथ करने से मन की मनोकामना पूर्ण होती है। महामंत्र में जैन पूर्ण द्वादशांग गर्भित है।

    आज सरस्वती की अाराधना

    मुनिश्री के सािनध्य में पढ़ने वाले बच्चों के लिए रविवार सुबह 8:30 बजे ज्ञान की अभिवृद्धि के लिए सरस्वती की आराधना के मंत्र संस्कार दिए जाएंगे। इसके अंतर्गत जप, साधना, मंत्र साधना के साथ पढ़ाई की किस दीक्षा का उपयोग करे इसकी जानकारी मुनि पूज्य सागर देंगे। मुनि श्री मंत्र प्रदान करेंगे और उसकी साधना की विधि भी बताएंगे। इस दौरान वह पढ़ाई करने के पहले मन को पवित्र करने का सरल रास्ता बताएंगे।

    प्रवचन देते मुनि पूज्य सागर महाराज

    मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन पंचायत की कार्यकारिणी का गठन

    विनोद पाटनी उरसेवा अध्यक्ष और सुभाष बड़जात्या मंत्री

    रूपनगढ़ रोड स्थित धर्मसागर भवन पर शनिवार को मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन पंचायत की कार्यकारिणी का गठन किया गया। चुनाव अधिकारी शिक्षाविद दीपक जौहरी के निर्देशन में गठित कार्यकारिणी में अध्यक्ष विनोद कुमार पाटनी (उरसेवा), उपाध्यक्ष दिलीप कासलीवाल, मंत्री सुभाष बड़जात्या, उप मंत्री दिनेश पाटनी व कोषाध्यक्ष चेतनप्रकाश पाण्ड्या को चुना गया। नई कार्यकारिणी को चुनाव अधिकारी ने शपथ दिलाई। इसके बाद नई कार्यकारिणी के पदाधिकारी श्री मुनिसुव्रतनाथ मंदिर जी में जिनेन्द्र दर्शन किए। मंदिर से जुलूस के रूप में नई कार्यकारिणी व समाज बंधु जैन भवन तक गए जहां विराजमान मुनि पूज्य सागर जी महाराज से आशीर्वाद लिया। इस दौरान जगह जगह नवीन कार्यकारिणी सदस्यों का स्वागत किया गया।

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