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वागड़ में होली पर तेड़ा की विशेष परंपरा

Sagwara News - भास्कर संवाददाता | सागवाड़ा वागड़ में होली पर तेड़ा अर्थात निमंत्रण की विशेष परंपरा आज भी मूल रूप में कायम है।...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 06:15 AM IST
वागड़ में होली पर तेड़ा की विशेष परंपरा
भास्कर संवाददाता | सागवाड़ा

वागड़ में होली पर तेड़ा अर्थात निमंत्रण की विशेष परंपरा आज भी मूल रूप में कायम है। इसमें सर्व समाज के लोग एक जाजम पर इकठ्ठे होकर होली की शुभकामनाएं देते हैं। बदलाव आया है तो बस इतना कि इसमें पहले रतालू की सब्जी का प्रसाद बांटा जाता था और अब उसकी जगह आलू ने ले ली है।

होली के दस दिन पहले शुरू होने वाली यह परंपरा होली के दस दिन बाद भी निभाई जाती है। गटूभाई पाटीदार टामटिया सहित बुजुर्ग बताते हैं कि पहले तेडा परंपरा में केवल रतालू की सब्जी परोसी जाती थी, लेकिन अब वागड़ में रतालू की पैदावार घटने से रतालू की जगह आलू ने ली ली है। पूरे गांव के पांचों न्यातों के लोगों को करीब डेढ़ से दो सौ किलो की सब्जी बनाकर इसका प्रसाद दिया जाता है।

सागवाड़ा. टामटिया गांव में तेडा परंपरा के तहत प्रसाद तैयार करते युवा।

पहली संतान वाले परिवार के यहां होता है आयोजन

यह परंपरा ग्रामीण क्षेत्रों में बरसों से चली आ रही है। इसे पाटीदार, ब्राह्मण, प्रजापत, सुथार, सुनार, लोहार आदि हर जाति के लोग निभाते हैं। खासियत यह है कि गांव के जिस परिवार में होली से पूर्व सालभर में पहली संतान का जन्म होता है, उसके ढूंढोत्सव को लेकर गांव के सभी परिवारों के यहां तेडा यानी निमंत्रण दिया जाता है। तेडा मिलने के बाद सुबह में सभी समाजों के पंच ढूंढोत्सव वाले परिवार के यहां इकठ्ठे होते हैं, फिर उनकी ही देखरेख में आलू की सब्जी तैयार की जाती है। पहले अमल (अफीम) देकर परिवार के लोगों द्वारा पंचों का सत्कार किया जाता था, पर नई पीढ़ी ने इसे बंद कर दिया है। अब चाय-पानी से स्वागत किया जाता है। इसके बाद आलू की सब्जी प्रसाद के रूप में सभी को बांटी जाती है। एक-दूसरे को गुलाल से तिलक लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं। वहीं शोक वाले परिवार के यहां पंच बिना बुलाए ही पहुंच कर उसे सांत्वना देते हैं।

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