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ट्रेन से पांव कटने के बाद होरीलाल का परिवार संकट में

कस्बा के शिव नगर मोहल्ला निवासी होरीलाल पुत्र लाल सिंह जाती खटीक करीब 6 माह पूर्व रेल हादसे में अपने दोनों पैर गंवा...

Dainik Bhaskar

Feb 28, 2018, 06:45 AM IST
ट्रेन से पांव कटने के बाद होरीलाल का परिवार संकट में
कस्बा के शिव नगर मोहल्ला निवासी होरीलाल पुत्र लाल सिंह जाती खटीक करीब 6 माह पूर्व रेल हादसे में अपने दोनों पैर गंवा दिए। लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि या सरकारी कर्मचारी आर्थिक सहायता तो दूर किसी ने अभी तक उसे घर पहुंचकर सांत्वना तक नहीं दी है।

पीड़ित हीरोलाल शादीशुदा है एवं बाल बच्चों वाला है। पिछले दिनों अपनी प|ी के साथ में ट्रेन से ससुराल से गांव लौट रहा था तभी स्टेशन पर उतरते समय फिसलने के कारण वह प्लेटफार्म के अंदर चला गया। हादसे में हुई होरीलाल की जान तो बच गई लेकिन उसके दोनों पैर बुरी तरह कुचल गए। बाद में उपचार के दौरान डॉक्टरों ने होरीलाल के दोनों पैर काट कर उसकी जान बचाई। इस हादसे के बाद होरीलाल की दुनिया उजड़ गई है। होरीलाल ने बताया कि दिव्यांग होने के कारण उसके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है और उसे परिवार के भरण पोषण के लाले तक पड़ गए है। लेकिन अभी तक सरकार और कोई भी जनप्रतिनिधि दिव्यांग की मदद के लिए आगे नहीं आया है। मंगलवार को एबीवीपी कार्यकर्ता होरीलाल के घर पहुंचे और उसकी पारिवारिक व आर्थिक स्थिति को देख हर संभव मदद के लिए कहा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने सैंपऊ के राजनीतिज्ञ एवं भामाशाहों को पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आने की अपील की। इस मौके पर जिला सहसंयोजक ब्रजेश बघेला नगर सह मंत्री, सनी सोनिया मीडिया प्रमुख, विवेक मित्तल, ऋषभ परमार, दीपक राजपूत, सूरज सक्सेना, रवि दिवाकर आदि कार्यकर्ता मौजूद थे।

एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने भामाशाहों से की आर्थिक संकट से जूझ रहे होरीलाल की मदद करने की अपील

सैंपऊ. पीड़ित का दुख दर्द बांटते हुए एबीवीपी कार्यकर्ता।

साइकिल से फेरी लगाकर गांव- गांव फल बेचता था होरीलाल

कस्बे की शिवनगर मोहल्ले का निवासी होरीलाल पुत्र लालसिंह खटीक के परिवार की हालत बेहद कमजोर है। वह साईकिल से फेरी लगाकर गांव-गांव फल बेचकर लोहे और प्लास्टिक का कबाड़ खरीदकर जीवन व्यतीत कर रहा है। उसने बताया कि वह प|ी के साथ ससुराल से वसैया माता के दर्शन के लिए जा रहा था। स्टेशन पर ट्रेन के नहीं रुकने पर वह चलती ट्रेन से क्या उतरा उसकी सारी जिंदगी ही बेपटरी हो गई। अब पैरों के जाने के बाद वह खुद परिवार और प|ी पर बोझ बनकर रह गया है। जिंदगी कैसे निकलेगी इस बात को लेकर उसकी आखें आसुंओं से भर आती है। कहता है कि पैर छीनने से अच्छा था कि भगवान उसको उठा लेता।

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