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गांवों में आदर्श तालाब बनाने की योजना; डेढ़ वर्ष में खुदाई भी पूरी नहीं / गांवों में आदर्श तालाब बनाने की योजना; डेढ़ वर्ष में खुदाई भी पूरी नहीं

Samdori News - सरकार भले ही ग्रामीण इलाकों में बने तालाब को आदर्श बनाने के दावे कर रही है, लेकिन हकीकत में यहां बने तालाब में एक...

Bhaskar News Network

Jul 25, 2018, 06:45 AM IST
गांवों में आदर्श तालाब बनाने की योजना; डेढ़ वर्ष में खुदाई भी पूरी नहीं
सरकार भले ही ग्रामीण इलाकों में बने तालाब को आदर्श बनाने के दावे कर रही है, लेकिन हकीकत में यहां बने तालाब में एक बूंद तक नहीं है। सौंदर्यीकरण का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं है।

तालाबों को गहरा कर बरसाती पानी का अधिक ठहराव करना व तालाबों काे सौंदर्यीकरण करने के लिए जो योजना बनाई थी, वो परवान नहीं चढ़ सकी। अधिकारियों की अरुचि के चलते योजना महज कागजों में ही दौड़ पाई। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी तालाब की दशा जस की तस है जबकि तालाब को विकसित कर आदर्श रूप देने के लिए लाखों रुपए बहा दिए गए। पंचायत राज विभाग की उदासीनता के चलते तालाबों को आदर्श बनाने के सपने दम तोड़ रहे हैं। अब बरसात का मौसम भी आया, लेकिन तालाब में एक बूंद भी नहीं ठहर सकी। हालात यह है कि तालाब स्वयं प्यासे है। उल्लेखनीय है कि कस्बे में स्थित भूरा राठौड़ आदर्श तालाब के कार्य प्रारंभ करने की तिथि 3 फरवरी 2017 थी।

तालाब की दशा मौजूदा समय में अत्यंत दयनीय बनी हुई है। आदर्श तालाब योजना को लेकर विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2017 से अब तक तालाब का निर्माण अभी तक पूर्ण नहीं हो सका है। ऐसे में इसका खामियाजा न सिर्फ ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है, वरन पशुओं को भी अपनी प्यास बुझाने के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है।

34.32 लाख रुपए स्वीकृत

महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत कस्बे के भूरा राठौड़ आदर्श तालाब निर्माण के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की ओर से 34.32 लाख रुपए स्वीकृत किए थे। तालाब को आदर्श रुप देने के लिए निर्माण कार्य 3 फरवरी 2017 को शुरू किया गया। स्वीकृत राशि में श्रम की लागत 14.76 लाख व सामग्री की लागत 19.56 लाख रूप तय की गई।

ऐसे बनने थे आदर्श तालाब

पानी का अधिक से अधिक ठहराव करने व सौंदर्यीकरण के लिए सरकार ने महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत ग्राम स्तर पर एक तालाब चिह्नित कर उसे आदर्श रुप देने की कवायद शुरु की थी। इसके तहत पानी के आवक के रास्ते सुगम करने थे। पिचिंग कार्य करना था, इससे की पानी का सालभर तक रिसाव कम होगा। चारों तरफ बैरिकेडिंग कर जगह-जगह बैंच का निर्माण करना। साथ ही सौंदर्यीकरण करने के लिए छायादार पौधे लगाने का भी प्रावधान था, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी एक भी ऐसी सुविधा मुहैया नहीं करवाई गई

एकदम सूखा पड़ा भूरा राठौड़ आदर्श तालाब


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