सरमथुरा

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अस्पताल की सफाई के लिए एक ही व्यक्ति ने डाले तीन टेंडर

स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों की गुणवत्ता पूर्ण सफाई एनजीओ के माध्यम से कराने का प्रावधान बनाया हुआ है लेकिन...

Dainik Bhaskar

Apr 04, 2018, 06:35 AM IST
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों की गुणवत्ता पूर्ण सफाई एनजीओ के माध्यम से कराने का प्रावधान बनाया हुआ है लेकिन अस्पताल प्रभारियों की मिलीभगत से स्वास्थ्य विभाग की योजना को ही चूना लगाया जा रहा है।

कस्बा के अस्पताल की सफाई का ठेका देने के लिए अस्पताल प्रभारी ने स्वास्थ्य विभाग के नियमों को ही ताक में रख दिया। अस्पताल प्रभारी ने एनजीओ संचालक से सांठ-गांठ कर ठेका निरस्त होने से लेकर नवीन ठेका देने तक की किसी को कानों कान खबर नहीं लगने दी। अस्पताल प्रभारी ने जिला के अखबारों को नजरअंदाज कर सात दिवस पूर्व जयपुर के अखबार में विज्ञप्ति प्रकाशित कर निविदा की सूचना निकलवा दी।

जिसके लिए 2 अप्रेल की तिथि निर्धारित कर दी गई। लेकिन निविदा का सूचना अस्पताल में बोर्ड पर चस्पा नहीं की गई। जिसकी खबर सिर्फ एक ही एनजीओ संचालक को थी। 2 अप्रेल को भारत बंद होने के कारण अस्पताल प्रभारी ने एनजीओ संचालक से सांठ-गांठ के चलते मंगलवार को एक ही व्यक्ति से पिछली डेट में तीन निविद लेते हुए हाथोंहाथ अस्पताल की सफाई का टेंडर दे दिया। प्रक्रिया पूरी होने तक अस्पताल प्रभारी ने किसी को कानोंकान खबर तक नहीं लगने दी। इस पूरी प्रक्रिया में अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी भागीदार थे।

30 हजार का ठेका सिर्फ 5 सौ कम में दिया

अस्पताल प्रभारी ने एक ही व्यक्ति से तीन निविदा लेते हुए निर्धारित कीमत से 5 सौ कम में ही सफाई करने का कान्ट्रेक्ट कर दिया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल की सफाई का कान्ट्रेक्ट 30 हजार रुपए प्रतिमाह तक देने का प्रावधान किया हुआ है लेकिन अस्पताल प्रभारी ने एनजीओ संचालक से सांठगांठ कर सिर्फ 5 सौ रुपए कम कर कान्ट्रेक्ट कर दिया है।

5 साल से एक ही एनजीओ पर सफाई का ठेका

सफाई करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा पारदर्शिता के साथ प्रतिवर्ष नवीन कान्ट्रेक्ट करने का प्रावधान है। जिसके लिए लोकल अखबार में विज्ञप्ति प्रकाशित करने सहित पूरी पारदर्शिता रखने का उल्लेख है। लेकिन अस्पताल प्रभारियों की सांठगांठ के कारण पांच वर्ष से एक ही एनजीओ से कान्ट्रेक्ट किया हुआ है जबकि प्रशासन के अधिकारी कई बार सफाई व्यवस्था से नाराज होकर ब्लैकलिस्ट करने तक के निर्देश दे चुके है। लेकिन अस्पताल प्रशासन जानबूझकर एक ही एनजीओ से कान्ट्रेक्ट कर रहा है।


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