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बाघिन ‘मछली’ के स्मारक निर्माण की राह हुई आसान

सवाई माधोपुर | रणथम्भौर की रानी बाघिन टी16 मछली के स्मारक निर्माण की राह आसान हो गई है। स्मारक निर्माण को लेकर राज्य...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 04:15 AM IST
सवाई माधोपुर | रणथम्भौर की रानी बाघिन टी16 मछली के स्मारक निर्माण की राह आसान हो गई है। स्मारक निर्माण को लेकर राज्य के वनमंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने वनाधिकारियों एवं विशेषज्ञों के साथ आमा घाटी में मछली के अंतिम संस्कार वाले स्थान पर स्मारक निर्माण की संभावनाएं तलाशी। इस दौरान वनमंत्री ने स्मारक निर्माण को लेकर वनाधिकारियों से खुल कर चर्चा भी की।

अंतिम संस्कार वाले स्थान पर बनेगा चबूतरा

रणथम्भौर की क्विन बाघिन टी-16 मछली का अंतिम संस्कार वन क्षेत्र स्थित आमा घाटी में वन विभाग ने पूरे सम्मान के साथ किया था। मछली की यादों को सहेजने के लिए वन विभाग द्वारा आमा घाटी को टाईगर ट्यूरिज्म और कंजर्वेशन के काम लेने की योजना बनाई है। इसके लिए वनमंत्री खींवसर ने मछली के अंतिम संस्कार वाले स्थान पर एक खूबसूरत चबुतरा निर्माण का सुझाव दिया है। सवाई माधोपुर आगमन पर खीवसर सीएफ वाईके साहू, वाईल्डलाईफ बोर्ड के सदस्य गज सिंह एवं धर्मेंद्र खांडल के साथ दिल्ली से आए संदीप शर्मा आदि प्रमुख लोगों के साथ आमाघाटी की वन चौकी पर पहुंचे जहां पर बाघिन का अंतिम संस्कार किया गया था।

सवाई माधोपुर. निरीक्षण करते वनमंत्री खींवसर एवं वन विभाग के अधिकारी।

टाइगर क्वीन ऑफ रणथम्भौर

टाइगर क्वीन ऑफ रणथम्भौर की उपाधि सिर्फ और सिर्फ टी-16 यानि मछली को ही मिली। मछली की बदौलत ना सिर्फ रणथम्भौर बल्कि सरिस्का को भी आबाद करने में कामयाबी मिली। बाघिन ने बीस वर्ष के जीवन काल में लगभग एक दर्जन शावकों को जन्म दिया, जिससे रणथम्भौर समेत सरिस्का आबाद हुए हैं। मछली को लाइफ टाइम अचीवमेन्ट समेत कई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

कई फिल्में बनी

टी-16 बाघिन के परिवार के कारण रणथम्भौर में बाघों का कुनबा बढ़ा है। रणथम्भौर को आबाद करने के साथ ही इस बाघिन ने रणथम्भौर को विश्व मानचित्र पर प्रसिद्धी भी दिलाई। इसने देशी-विदेशी सैलानियों को अपनी और रिझाया। टाइगर क्वीन ऑफ रणथम्भौर के नाम से प्रसिद्ध मछली पर कई फिल्में भी बनी। (पेज 15 भी देखें)