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अष्टान्हिका महापर्व पर हुए कई कार्यक्रम

सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से इन दिनों जैन धर्म का 8 दिवसीय अष्टान्हिका महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्वक...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 06:20 AM IST
सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से इन दिनों जैन धर्म का 8 दिवसीय अष्टान्हिका महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्वक विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान मन्दिर समितियों के पदाधिकारियों के सान्निध्य में जिला मुख्यालय स्थित जिनालयों में आयोजित विशेष पूजा-अर्चना के धार्मिक कार्यक्रमों में जिनेन्द्र भक्त बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे हैं।

प्रवक्ता प्रवीण जैन ने बताया कि इस अवसर पर नगर परिषद के क्षेत्र के जिनालयों में प्रातः काल मांगलिक क्रियाओं के साथ जिनेन्द्र देव का प्रासुक जल से अभिषेक एवं हर्षोल्लास के वातावरण में शांतिधारा कर विश्व कल्याण की कामना की गई। अभिषेक एवं शांतिधारा के उपरांत इन्द्र-इन्द्राणियों ने देव-शास्त्र-गुरू की पूजन के साथ विशेष रूप से नंदीश्वरद्वीप एवं पंचमेरू की अष्ट द्रव्यों से पूजन कर पर्व के प्रति भक्ति व आस्था प्रकट की। पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति देकर पूजार्थियों को नृत्य करने पर मजबूर कर दिया। अष्टान्हिका के पर्व के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में आलनपुर स्थित दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र चमत्कारजी में श्रद्धालुओं द्वारा शांतिनाथ विधान मंडल का संगीतमय पूजन किया गया। पंडित उमेश जैन शास्त्री द्वारा मांगलिक क्रियाएं मंत्रोच्चार पूर्वक सम्पन्न कराई तथा विधान पूजन से पूर्व सौधर्म इन्द्र-इन्द्राणी की भूमिका निभाते हुए महेन्द्र कुमार-ममता पाटनी ने मंडल पर मंगल कलशों एवं मंगल दीप की स्थापना की गई और 120 अर्घ्य समर्पित किए। इसी प्रकार राजनगर कॉलोनी के शांतिनाथ दिगंबर जैन मन्दिर में मन्दिर समिति के अध्यक्ष दिनेश चन्द जैन-राजेश जैन श्रीमाल ने सौधर्म इन्द्र-इन्द्राणी की भूमिका निभाते हुए निर्मल भक्ति पूर्वक मंडल पर 120 अर्घ्य समर्पित किए। मंडल विधान पूजन के दौराने श्रद्धालुओं द्वारा एक से बढ़कर एक भजनों की दी गई मनभावन प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु भक्ति नृत्य कर जिनेन्द्र देव को रिझा रहे थे। इस दौरान जिनालय भक्ति और आस्था के रंग में डूबे नजर आए।

शास्त्र सभाओं में दिए प्रवचन : दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र चमत्कारजी आलनपुर में गणधराचार्य श्री कुन्थु सागरजी के शिष्य धर्मेंद्र भैया ने तत्व चर्चा के दौरान कहा कि जीवन में यदि स्वयं का कल्याण करना है तो स्वयं को पहचानकर अहिंसा-त्याग-संयम व दया का भाव रखकर मनुष्य भव की सार्थकता सिद्ध करनी चाहिए। जीवन में धर्म शाश्वत है और धन क्षण भंगुर है। साथ ही शहर स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मुदायमी मन्दिर एवं आदिनाथ दिगंबर जैन सांवलियान मन्दिर में आयोजित प्रेरणास्पद शास्त्र सभाओं में श्रावक-श्राविकाओं ने शामिल होकर धर्म लाभ लिया।

सवाई माधोपुर. राजनगर कॉलोनी स्थित शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में शांति विधान मंडल पर अर्घ्य समर्पित करते श्रद्धालु।