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ट्रेन के रैक के मुकाबले प्लेटफाॅर्म छोटा, आए दिन यात्री घायल

भास्कर न्यूज| चौथ का बरवाड़ा रेल प्रशासन की ओर से यात्रियों सुरक्षा तथा सुविधाओं के विस्तार के दावे तो काफी किए...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 06:55 AM IST
भास्कर न्यूज| चौथ का बरवाड़ा

रेल प्रशासन की ओर से यात्रियों सुरक्षा तथा सुविधाओं के विस्तार के दावे तो काफी किए जाते है, लेकिन उन पर कार्य नहीं किए जाने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन रेलवे स्टेशनों पर रेलवे को काफी आय हो रही है, वहां के लोगों को प्लेटफार्म जैसी मुख्य सुविधाएं भी नहीं मिल रही है। छोटे स्टेशन का तो हाल ही बेहाल है। जयपुर-सवाई माधोपुर रेलमार्ग पर चौथ का बरवाड़ा रेलवे स्टेशन पर रेलवे को बड़ी आय होती है, लेकिन प्लेटफार्म ही इतना छोटा है कि उस पर ट्रेनों का रेक नहीं आ पाता है। ऐसे में काफी ऊंचाई पर चढने तथा ट्रेन का ठहराव कम होने से आए दिन यात्री गिरने से घायल हो रहे है। रेलवे के अधिकारियों को बार बार अवगत कराने के बाद भी सुविधा नहीं बढ पाने से लोगों में नाराजगी है। जयपुर-सवाई माधोपुर रेलमार्ग पर रेलवे को चौथ का बरवाड़ा से अन्य स्टेशनों के मुकाबले ज्यादा आय होती है। यहां चौथ माता का प्रसिद्ध मंदिर होने के कारण हमेशा ही यात्रियों की अधिकता रहती है। ऐसे में स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ की अपेक्षा सुविधाएं नहीं होने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे मुख्य समस्या इस समय प्लेटफार्म का छोटा होना है। यहां पर दो प्लेटफार्म है। इसमें से प्लेटफार्म दो पर तो बिल्कुल भी सुविधाएं नहीं है। वहीं प्लेटफार्म एक भी इतना छोटा है कि ट्रेनों का रेक प्लेटफार्म पर नहीं आ पाता है। सुबह व शाम को आने वाली सुपरफास्ट गाड़ियों के सामान्य श्रेणी के ड़िब्बे प्लेटफार्म बजाए मुख्य लाइन की गिट्टियों के पास आ रहे हैं। ऐसे में यात्रियों का चढने व उतरने में परेशानी के साथ साथ जोखिम उठाना पड़ रहा है। इसी के चलते पिछले कई दिनों से चढने उतरने के प्रयास में यात्री घायल हो रहे है।

चौथ का बरवाड़ा. रेलवे प्लेटफार्म छोटा होने से प्लेटफार्म के बाद ट्रेन में चढने की मशक्कत करते यात्री।

दस सालों से अटका एफओबी

कस्बे के रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म बदलने के लिए दस साल पहले एफओबी अर्थात पैदल पुल को बनाने का कार्य स्वीक्त किया था, लेकिन आज तक यह कार्य पूरा नहीं हो पाया है। पिछले कई दिनों से कार्य बंद रहने से यात्रियों को प्लेटफार्म बदलने की सुविधा नहीं मिल रही है। ऐसे मे यात्री जोखिम उठाकर प्लेटफार्म बदलते है जिसमे हमेशा ही जान का खतरा रहता है। प्लेटफार्म बदलने के चक्कर में अब तक सात से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।