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विकास कार्यो में अवैध खनन की बजरी से हो रहे सरकारी निर्माण

एक वर्ष पहले
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पंचायत समिति खंडार की विभिन्न ग्राम पंचायतों में इन दिनों चल रहे विकास कार्यों में अवैध खनन की बजरी का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति के संबंधित अधिकारियों द्वारा खनन माफियाओं को राजकीय कोष से अवैध खनन की बजरी का भुगतान भी हो रहा है। दूसरी ओर प्रशासन के आलाधिकारी आंख मूंदकर बैठे है। ऐसे में खनन माफिया मिलीभगत के दम पर न्यायालय के आदेशों की खिलाफत कर मोटा मुनाफा कमाने में कामयाब हो रहे है।

पंचायत समिति खंडार क्षेत्र में कुल 32 ग्राम पंचायतें है। लगभग सभी ग्राम पंचायतों में पिछले 5 वर्ष में करोड़ों रूपए के विकास कार्य हो चुके है तथा लाखों रूपए के विकास कार्य वर्तमान में चल रहे है। खास बात तो यह है कि इन विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन की बजरी की खपत हो रही है। यही कारण है कि क्षेत्र में खनन माफिया पनप रहा है और बजरी के अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है। हालात यह है कि मिलीभगत के दम पर माफिया बेखोफ होकर बनास नदी को खोदकर सरकारी कार्यों में बड़े स्तर पर अवैध खनन की बजरी की सप्लाई कर रहे है।

सड़कों में अवैध खनन की बजरी का सर्वाधिक उपयोग

क्षेत्र में अवैध खनन की बजरी का सर्वाधिक उपयोग खंडार ग्राम पंचायत सहित अन्य ग्राम पंचायतों में चल रहे इंटरलॉकिंग कार्यों में हो रहा है। क्योंकि ग्राम पंचायतों द्वारा अधिकतर स्थानों पर सीधे ही अवैध खनन की बजरी बिछाकर उस पर इंटरलॉकिंग टाइलें लगाकर इंटरलॉकिंग सड़कें बनाई जा रही है। इसमें बड़े स्तर पर बजरी की खपत हो रही है। । पिछले दिनों सवाईमाधोपुर-बहरावंडा खुर्द सड़क निर्माण में भी अवैध खनन की बजरी के उपयोग का मामला सामने आया था। इस मामले में ठेकेदार पर खनिज विभाग की टीम द्वारा बड़ी पैनल्टी की कार्रवाई हुई थी।


आमजन पर जुर्माना और सरकारी कामों में खुली छूट

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद से ही बजरी के अवैध खनन को लेकर क्षेत्रीय प्रशासन द्वारा कार्रवाई के नाम पर दोहरी नीति अपनाई जा रही है। अगर आमजन अवैध खनन की बजरी का उपयोग करता है तो उसे प्रशासन द्वारा रोककर जुर्माना वसूला जाता है। वहीं अवैध खनन की बजरी को खनन माफियाओं द्वारा सरकारी कार्यों में ले जाया जाता है तथा उसका वहां उपयोग होता है तो इसके लिए कोई रोक टोक क्षेत्र में नहीं है। प्रशासन द्वारा सरकारी कार्यों में अवैध खनन की बजरी की खुली छूट दे रखी है। ऐसे में क्षेत्र में बजरी के अवैध खनन व खनन माफिया को बढ़ावा मिल रहा है।
-देवी सिंह, तहसीलदार, खंडार

खंडार|ग्राम पंचायत खंडार द्वारा करवाए जा रहे इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण में हो रहा अवैध खनन की बजरी का उपयोग।

द्वारा सरकारी कार्यों में ले जाया जाता है तथा उसका वहां उपयोग होता है तो इसके लिए कोई रोक टोक क्षेत्र में नहीं है। प्रशासन द्वारा सरकारी कार्यों में अवैध खनन की बजरी की खुली छूट दे रखी है। ऐसे में क्षेत्र में बजरी के अवैध खनन व खनन माफिया को बढ़ावा मिल रहा है।
-देवी सिंह, तहसीलदार, खंडार


अवैध खनन की बजरी का उपयोग प्राईवेट या सरकारी किसी भी तरह के निर्माण कार्यों में नहीं हो सकता है। अगर कहीं पर भी किसी भी विभाग के अंतर्गत सरकारी निर्माण कार्यों में बजरी का उपयोग हो रहा है तो वह अवैध है। क्योंकि तहसील क्षेत्र में कहीं पर भी बजरी का वैध विकल्प नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन है कि किसी भी हालत में बजरी का अवैध खनन नहीं होना चाहिए, सरकार इसका विकल्प तलाशें। मैरी जानकारी के अनुसार सरकारी निर्माण कार्यों में कोटा थर्मल पावर प्लांट, जहां पर भी बिजली बनती है उससे निकलने वाली राख से ही सरकारी निर्माण कार्य हो सकते हैं।
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