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लीज के रूप में बुक हुए पार्सल को रेलवे संपत्ति माना जाएगा

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 10:05 AM IST

Sawai Madhopur News - पैसेंजर ट्रेनों के पार्सल कोच को लीज पर देने के बाद उनमें होने वाली चोरी की वारदातों को अब रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ)...

Sawai Madhopur News - rajasthan news parcel booked as lease will be treated as railway property
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पैसेंजर ट्रेनों के पार्सल कोच को लीज पर देने के बाद उनमें होने वाली चोरी की वारदातों को अब रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) देखेगी। अभी ऐसे मामले राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) में दर्ज हो रहे थे। रेलवे का मानना है कि चोरी की वारदातें बढ़ती जा रही है और जीआरपी ऐसे मामलों की जांच में उतनी असरदार साबित नहीं हो पा रही है। ऐसे में लीज पॉलिसी में बदलाव किया गया है। लीज के रूप में बुक हुए पार्सल को रेलवे संपत्ति माना जाएगा, जिसके चोरी होने पर जांच का क्षेत्राधिकारी आरपीएफ के हवाले हो जाएगा। दरअसल, ट्रेनों के पार्सल वैन में सेंध लगने की वारदातें सालाना एक हजार से ज्यादा हो रही हैं।

ज्यादातर ट्रेनों के पार्सल वैन लीज पर होने से लीजधारक को चोरी होने पर रेलवे की ओर से आर्थिक नुकसान की भरपाई नहीं के बराबर होती है। ऐसी वारदातों की जांच का जिम्मा जीआरपी के पास था। आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने हाल ही में एक निर्देश जारी कर कहा कि जीआरपी के सीमित क्षेत्राधिकार व अपराधों की रोकथाम, जांच आदि का अत्यधिक कार्य का भार होने के कारण वह लीज पार्सल वैन में चोरी की वारदातों पर असरदार कार्रवाई करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में लीज पार्सल वैन में चोरी की वारदातें अब आरपीएफ दर्ज करेगी, जांच भी करेगी।

सामान्य व्यक्ति को भी ज्यादा राहत नहीं

जो व्यक्ति सीधे रेलवे के माध्यम से पार्सल बुक करवाते हैं, उनका पार्सल चोरी होने पर रेलवे क्लेम देती है, पर उसे लेना भी आसान नहीं है। रेलवे प्रति किग्रा वजन के आधार पर मुआवजा देती है जो 50 रुपए ही होता है। यदि व्यक्ति अपने पार्सल को बुक करते समय उसकी वास्तविक कीमत दर्शाता है तो क्लेम के लिए पक्का बिल व इंश्योरेंस के दस्तावेज मुहैया करवाने होते हैं। रेलवे क्लेम ट्रिब्युनल सुनवाई करता है, जिसमें कई माह से साल तक निकल जाते हैं।

चोरी मतलब लीजधारक का नुकसान

जो व्यापारी या सामान्य व्यक्ति लीजधारक के माध्यम से पार्सल बुक करवाते हैं, उसके चोरी होने पर लीजधारक को ही आर्थिक नुकसान की भरपाई करनी होती है। इसके लिए वे कुछ शुल्क ज्यादा भी लेते हैं। रेलवे ऐसे मामलों में क्षतिपूर्ति नहीं देती। जीआरपी आरोपी को पकड़े व सामान की बरामदगी करे तो थोड़ी राहत मिलती है।

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