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मकर संक्रांति पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश, दान-पुण्य का बहुत महत्व

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 06:35 AM IST

Sawai Madhopur News - साल में कुछ समय विशेष ऐसे आते हैं, जब कुछ कर्म विशेष करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है। इस बार की मकर संक्रांति...

Sawai Madhopur News - rajasthan news signs of sun39s capricorn on makar sankranti significance of charity and charity
साल में कुछ समय विशेष ऐसे आते हैं, जब कुछ कर्म विशेष करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है। इस बार की मकर संक्रांति भी कई मायनों में सिद्ध समय है। मकर संक्रांति के दौरान सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इस महापर्व पर दान का बहुत महत्व है। लोग मकर संक्रांति पर गायों को चारा डालने सहित कई प्रकार के दान-पुण्य करते हैं।

ज्योतिषाचार्य आचार्य ताराचंद शास्त्री ने बताया कि सबसे पहले सूर्य एक राशि में एक महीना रहता है और 12 राशियों में 12 महीने और 12 महीने बाद वापस सूर्य उसी राशि में उसी तारीख को लगभग प्रवेश करता है। इसी वजह से हर वर्ष 14 जनवरी या फिर 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य को राजा कहा गया है और वह जिस राशि में भी प्रवेश करता है उस राशि में एक क्रांति आती है, एक चमक, एक बदलाव, एक जागृत, एक बड़ी अच्छी ऊर्जा आती है। इसी वजह से सूर्य के किसी भी राशि में प्रवेश को महत्व दिया गया है।

उन्होंने बताया कि सूर्य जब मकर राशि में आता है तो उस समय उत्तरायण हो जाता है इसलिए मकर रेखा पर सूर्य की किरणें सीधी पढ़ना शुरू हो जाती है और पृथ्वी पर गर्मी का प्रभाव उस जगह पर पड़ना शुरू हो जाता है। इसी वजह से सूर्य के मकर राशि में आने के बाद मकर संक्रांति के बाद उत्तरायण होने के बाद अगले 6 महीने सूर्य उत्तरायण कहता है, जिसमें ज्यादा शुभ ऊर्जा पृथ्वी पर आती है। इस वजह से उत्तरायण को देवताओं का समय कहा गया है और दक्षिणायन जो कि मकर संक्रांति के 6 महीने बाद सूर्य प्रवेश करता है उस समय को दक्षिणायन कहते हैं, जब थोड़ी सर्दी शुरू होती है। उन्होंने बताया कि जब भी सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। लेकिन इस वर्ष 14 जनवरी की रात्रि को सूर्य अस्त के बाद सूर्य ग्रह मकर राशि में प्रवेश करेंगे और सूर्य अस्त के बाद जब सूर्य ग्रह मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का त्योहार अगले दिन सूर्य उदय के बाद ही मनाया जाना उचित रहता है। 15 जनवरी को उदय तिथि पड़ने के कारण मकर संक्रांति इसी दिन ही मनाई जानी चाहिए। मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी प्रातःकाल से सूर्यास्त तक रहेगी। पूरे दिन पर्व का शुभ मुहूर्त है।

क्या करें इस दिन पर

इस दिन प्रातः उठकर स्नान करके भगवान भास्कर को प्रणाम कीजिए। इस दिन गुरु गोरखनाथजी को खिचड़ी चढ़ाई जाती है। हर घरों में खिचड़ी बनाई जाती है तथा लोग खिचड़ी ही खाते हैं। तिल के लड्डू का प्रयोग भी होता है। इस दिन मौन व्रत करना भी बहुत विशेष रहता है। गरीब व्यक्तियों को खिचड़ी, कम्बल, ऊनी वस्त्र व अन्य गर्म कपड़े, भोजन, सुहाग सामग्री व बहुत सी अन्य वस्तुओं का दान भी आज के दिन करना उत्तम रहेगा।

बौंली | मकर संक्रांति को पतंग खरीदते बच्चे एवं युवा।

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