रणथंभौर के बाहर प्रतिबंधित सीमा में नगर परिषद देने जा रही पर्यटन इकाई का पट्‌टा

Sawai Madhopur News - सरकार खुद ही कानून बनाती है और जब कोई रसूख वाला फंसता है तो खुद सरकार ही उस नियम को ताक में रखने का फरमान जारी कर देती...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 10:55 AM IST
Sawai Madhopur News - rajasthan news tourism unit lease out to the city council in restricted limits outside ranthambore
सरकार खुद ही कानून बनाती है और जब कोई रसूख वाला फंसता है तो खुद सरकार ही उस नियम को ताक में रखने का फरमान जारी कर देती है। यहां एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें वन विभाग, नगर परिषद एवं न्यायालय के बीच पेच फंस गया है। ऐसे में स्वायत्त शासन विभाग ने रसूखवाले आदमी का काम निकलवाने के लिए ऐसा मार्गदर्शन जारी कर दिया है । अगर जन प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने इस मार्गदर्शन के अनुसार काम किया तो यहां पर जमीनों के रूपांतरण एवं पट्‌टे जारी करने को लेकर भूचाल आना तय है।

क्या है मामला: सवाई माधोपुर के तहत रणथंभौर रोड पर एक नामचीन होटल के पास खसरा नं. 1121 की कुल जमीन 0.33 हेक्टेयर जमीन का पर्यटन इकाई में परिवर्तन किया जाना है। इसके लिए पत्रावली की फाइल इस समय नगर परिषद के पास पट्‌टे के लिए आई हुई है। पूर्व में यह फाइल लंबे समय तक यूआईटी के पास रही, लेकिन वहां से तकनीकी खामियों के कारण पट्टा नहीं बन सका। पट्‌टे बनाने का काम यूआईटी से नगर परिषद को दे दिया गया, लेकिन न्यायालय की रोक के कारण यहां भी लगभग 3 हजार पट्‌टों की फाइल कमरों में पड़ी इंतजार कर रही है।

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स्वायत्त शासन विभाग पर रसूखदारों के आगे घुटने टेकने व गलत मार्गदर्शन का आरोप

क्यों नहीं बन सकता इस जमीन का पट्‌टा

सूत्रों के अनुसार उच्च न्यायालय एक मामले की सुनवाई के दौरान एक स्थगन आदेश जारी कर चुका है। इसमें कहा गया है कि जब तक किसी शहर या जमीन का जोनल एवं सेक्टर प्लान बनकर पास नहीं हो जाता है तब तक इस प्रकार की किसी भी जमीन पर आवेदक को पट्‌टा जारी नहीं किया जा सकता है। यहां यह बात साफ है कि सवाई माधोपुर में पट्‌टे बनाने का काम इसलिए ठप है कि यहां न तो जोनल प्लान बना है और न ही सेक्टर प्लान। ऐसे में परिषद बोर्ड की बैठक भी यह प्रस्ताव परित कर चुकी है कि न्यायालय के मार्गदर्शन के अनुसार यह दोनों प्लान बन कर पास नहीं होते हैं तब तक इस प्रकार की जमीन के कोई भी पट्‌टे जारी नहीं किए जा सकते।

पट्‌टा जारी करने पर पहली अड़चन वन विभाग लगा चुका है। दूसरी अड़चन न्यायालय का स्टे है एवं तीसरी अड़चन परिषद बोर्ड का वह प्रस्ताव है जिसमें इस प्रकार की जमीनों पर पट्‌टा जारी नहीं करने पर नामंजूरी की मुहर लगाई जा चुकी है। नगर परिषद ने इन सभी अड़चनों का हवाला देते हुए स्वायत्त शासन विभाग जयपुर से मार्गदर्शन मांगा था।

वन विभाग इस जमीन को नपवा चुका है


सवाईमाधोपुर| अभयारण्य के चारों तरफ पसरी लाखों बीघा जमीन।


जयपुर से मार्गदर्शन प्राप्त हो गया


नहीं दी एनओसी

जमीन में एक और बड़ा पेच फंसा हुआ है। यहां पर अभयारण्य की पेराफैरी के एक किमी के दायरे में किसी भी जमीन का भू-परिवर्तन पर्यटन से जुड़े होटल व्यवसाय या व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं किया जा सकता है। जमीन एक हजार मीटर यानी एक किमी के दायरे में आती है। फोरेस्ट की एनओसी नहीं मिलती है तब तक परिषद पट्‌टा जारी नहीं कर सकती है। वन विभाग भी एनओसी देने से मना कर चुका है कि यह जमीन वन सीमा के एक हजार मीटर के दायरे में आती है।

नप पट्‌टा जारी करने पर आमादा

सारी चीजें खुली सामने आने के बावजूद मामले में पट्‌टा जारी करने जा रही है। अधिकारी पट्‌टा जारी करने की सहमति दे चुके हैं। अगर कोई नहीं बोला तो एक-दो दिन में पट्‌टा जारी कर नगर परिषद सभी को धत्ता दिखा देगी और साफ कर देगी की कांग्रेस राज में न तो कानून का कोई मान है और न ही नियमों का कोई सम्मान।

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