विधानसभा में गूंजा खंडार का उड़द घोटाला
प्रदेश में चर्चित खंडार के उड़द घोटाले की गूंज गुरूवार को विधानसभा में सुनाई दी। खंडार विधायक अशोक बैरवा ने इस बड़े घोटाले के मामले को उठाते हुए राजफेड व कॉपरेटिव अधिकारियों को निलंबित करने एवं वास्तविक किसानों का तत्काल भुगतान करवाने की मांग की। वर्ष 2018 में उड़द की सरकारी खरीद के दौरान मिलीभगत से यह बड़ा घोटाला हुआ था, जिसका दैनिक भास्कर द्वारा लगभग तीन दर्जन से अधिक विस्तृत समाचार प्रकाशित कर पूरा खुलासा किया था।
खंडार विधायक अशोक बैरवा ने विधान सभा में घोटाले के इस मामले को उठाते हुए बताया कि उनके विधान सभा क्षेत्र में उपखंड मुख्यालय खंडार पर वर्ष 2018 में समर्थन मूल्य पर उड़द की सरकारी खरीद हुई थी। जिसमें राजफेड एवं कॉपरेटिव अधिकारियों ने दलालों एवं बिचोलियों से मिलीभगत कर करोड़ों रूपए का बड़ा घोटाला किया हैं। इस दौरान राजस्व विभाग द्वारा जारी जमाबंदी व गिरदावरियों में ओवरराइटिंग कर बड़े स्तर पर कांट छांट की गई। वहीं मध्यप्रदेश व अन्य दूरदराज के बाजारों से उड़द लाकर सरकारी खरीद केंद्र पर तोलकर बड़ा भ्रष्टाचार किया है।
बजरिया के चूड़ी मार्केट से अतिक्रमण हटाकर रास्ते का खुलासा करवाया जाए, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
सवाई माधोपुर|बजरिया चूड़ी मार्केट के लोगों तथा व्यापारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चूड़ी मार्केट जाने वाले रास्ते से अतिक्रमण हटाकर रास्ते का खुलासा करने की मांग की है। लालीदेवी, गीतांजलि शर्मा, शिवकुमार, पवन शर्मा आदि ने बताया कि चूड़ी मार्केट बजरिया के मुख्य बाजार में स्थित है, जिसमें करीब 12 फीट चौड़ा रास्ता है और दर्जनों दुकानें बनी हुई है। लेकिन चूड़ी मार्केट के मुख्य द्वार पर दुकानदारों द्वारा काउंटर लगाकर रास्ते का संकरा कर दिया है। ऐसे में वहां से गुजरने वाले व्यापारियों सहित खरीदारी करने वाले ग्राहकों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है। ऐसे में उन्होंने चूड़ी मार्केट के मुख्य द्वार से अतिक्रमण हटाकर रास्ते का खुलासा करवाने की मांग की है।
मिलीभगत के दम पर हुआ दलालों का भुगतान
विधायक ने विधानसभा में बताया कि करोड़ों रूपए का घोटाला हो जाने के बाद इस मामले में शिकायतें हुई और जांच भी हुई। अधिकारियों ने मिलीभगत कर दलालों का भुगतान तो कर दिया, लेकिन क्षेत्र के हजारों वास्तविक किसानो का भुगतान रोक दिया, जो आज तक भी नहीं हो पाया हैं। ऐसे में डेढ़ साल से भुगतान नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। वहीं दलाल और अफसर मालामाल हो गए। इस मामले में वह स्वयं दो बार मंत्री से भी मिल चुके हैं।
अफसरों के संरक्षण में हुआ
था घोटाला
विधायक ने बताया कि करोड़ों रूपए के इस बड़े घोटाले को अंजाम देने के लिए राजफेड के अधिकारियों एवं माफियाओं की एक बड़ी गैंग सक्रिय थी जिसने यह पूरा घोटाला किया। वहीं भरतपुर के राजफेड के अधिकारियों ने इस पूरे खेल का संचालन किया था।
चना और सरसों की खरीद में भी हुआ था बड़ा घोटाला: विधायक ने बताया कि वर्ष 2018 में ही उपखंड मुख्यालय खंडार पर चना एवं सरसों की समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद भी हुई थी। इस खरीद में भी अफसरों, दलालों एवं माफियाओं द्वारा मिलीभगत कर बड़ा घोटाला किया गया है। इस मामले में भी आज तक भी ना तो कोई एफआईआर दर्ज हुई है और ना हीं कोई विभागीय कार्रवाई हो पाई है। यहां तक की इसकी तो अभी तक जांच भी शुरू नहीं हो पाई है।
मंत्री को सौंप चुके घोटाले की रिपोर्ट: विधायक ने विधानसभा में बोलते हुए बताया कि उड़द घोटाले की जांच रिपोर्ट वह स्वयं मंत्री को सौंप चुके हैं तथा सरसों एवं चना खरीद में हुए घोटाले से भी उन्हें अवगत कराया जा चुका है। इस पर मंत्री ने घोटालेबाज अधिकारियों का ट्रांसफर भी कर दिया था लेकिन सांठगांठ के चलते वह फिर से वहीं आकर लग गए है। विधायक ने वास्तविक हकदार किसानों का शीघ्र भुगतान कराने एवं घोटालेबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करवाने एवं भ्रष्ट एवं दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल निलंबित करने की मांग की है।
मंत्री के आदेश हवा, नियम विरुद्ध अफसर लगाने का आरोप
विधानसभा में उड़द घोटाले का मामला उठाने पर क्षेत्रीय किसानों ने विधायक का आभार जताते हुए बताया कि वर्ष 2018 में चना एवं सरसों की खरीद की जांच करवाने के आदेश स्वयं विभागीय मंत्री द्वारा दिए जा चुके है लेकिन मिलीभगत के चलते उनके आदेशों पर आज तक भी अफसरों ने गौर नहीं किया है, जिससे आज तक भी इस मामले की जांच शुरू नहीं हो पाई है। वहीं सहकारिता विभाग में अब भी नियम विरूद्ध अफसर लगे हुए है जिनमें विभाग के एमडी शामिल है जो नियमविरूद्ध अपने गृह जिले में ही जमे हुए हैं।