वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बने कचरा पात्र

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बरसात का पानी संरक्षित करने के उद्देश्य से पूर्व में लाखों रुपए खर्च कर कलेक्ट्रेट सहित विभिन्न विभागों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किए गए थे। लेकिन रखरखाव के अभाव एवं अनदेखी के चलते वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम या तो कचरा पात्र बन गए है या फिर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में आने वाले समय में बरसात का पानी व्यर्थ बह जाएगा।

कलेक्ट्रेट का वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बना कचरा पात्र: पानी संरक्षित करने के उद्देश्य से सरकार के आदेशों के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में भी राजीव गांधी सेवा केन्द्र के पीछे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करवाया गया था। काफी गहराई, ऊंचाई व चौड़ाई का होद तैयार करवाया गया था। इससे बरसात के दिनों में बरसात के पानी को नालियां बनाकर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ा गया था। जब इसका निर्माण हुआ उस वर्ष बरसात के मौसम में इसका उपयोग हुआ और बरसात का पानी संरक्षित होकर भू तल में गया। लेकिन इसके बाद जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों ने सुध नहीं ली। सरकारी कार्यालयों के कार्मिकों ने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए बने होद में कचरा डालकर जलाना शुरु कर दिया। रखरखाव के अभाव में इससे जुड़ी नालियों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। ऐसे में बरसात का पानी संरक्षित होने की जगह व्यर्थ बह जाता है।

कलेक्ट्रेट सहित कई कार्यालयों में बने हैं वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
सवाईमाधोपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में बने वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट में पड़ा कचरा।

छतों के पाइप क्षतिग्रस्त, यूं ही बह जाएगा बरसात का पानी
पूर्व में सरकारी भवनों को भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ा गया था। सरकारी भवनों की छत पर जमा होने वाले बरसात के पानी को पाइप के माध्यम से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ा गया था। लेकिन वर्तमान में विभिन्न सरकारी कार्यालयों का सम्पर्क वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से टूट गया है। इसका कारण पाइपों का क्षतिग्रस्त होना है। विभागीय अधिकारियों ने इसकी सुध नहीं ली और पाइप टूट गए और सरकारी भवनों का वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से सम्पर्क टूट गया। ऐसे में बरसात का पानी छत पर जमा होकर जमीन पर फैल जाता है। सरकारी कार्यालयों के वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम व अन्य स्थानों पर बने सिस्टम की सारसंभाल की जाए तो आने वाले बरसाती मौसम में बरसात के पानी को संरक्षित करना संभव हो सकेगा।

खबरें और भी हैं...