Hindi News »Rajasthan »Shahjanpur» समाज सेवा करने के लिए भीतरी पहनावे को बदलें

समाज सेवा करने के लिए भीतरी पहनावे को बदलें

यह मध्यप्रदेश के छतरपुर स्थित सरकारी जिला अस्पताल था। इस रविवार को जब मैं वहां गया तो दंग रह गया। मैंने कभी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 03, 2018, 06:30 AM IST

यह मध्यप्रदेश के छतरपुर स्थित सरकारी जिला अस्पताल था। इस रविवार को जब मैं वहां गया तो दंग रह गया। मैंने कभी केजुल्टी (आकस्मिक दुर्घटना) वार्ड के साथ क्लब नहीं देखा! यह ऐसा क्लब है, जिसके सदस्यों ने स्वयं को अपने निर्माता को समर्पित कर दिया है। अचरज नहीं कि उन्होंने इसे समर्पण क्लब नाम दिया है। वहां मैंने अस्पताल में देखी जाने वाली गहमागहमी और शांति दोनों को एक साथ मौजूद देखा।

क्लब के बाहर खुद ही अनुशासन से खड़े लोगों की कतार थी., जिनके चेहरे पर खासतौर पर आभार के भाव देखे जा सकते हैं। जिस क्षण कोई व्यक्ति हैंड वॉश लिक्विड लेकर उनके पास आकर कहता, ‘अपने हाथ दिखाइए,’ वे अपनी दाहिनी हथेली फैलाकर सामने कर देते और बाएं हाथ की हथेली से उसे कसकर पकड़ते जैसे वे कोई ‘प्रसाद’ ग्रहण कर रहे हों। उनमें से ज्यादातर नहीं जानते कि उस हैंड वॉश का करना क्या है और कोई निर्देश देने के पहले कुछ ने तो वह पारदर्शी चिपचिपा द्रव सिर पर लगा लिया या उसे चख लिया जैसे वह अस्पताल से 50 किलोमीटर दूर स्थित उस प्रसिद्ध शिव मंदिर जटाशंकर का ‘अभिषेक तीर्थ हो,’ जिसके बारे में माना जाता है कि वहां की जटाओं से ही गंगा निकली है। 60 से 70 लोगों की भीड़ ने भी खुद को ‘समर्पण’ क्लब के सदस्यों के सामने समर्पित कर दिया था। हैंडवॉश देने वाला जोर से चिल्लाकर कहता है, ‘यह आपके हाथ धोने के लिए हैं, खाने के लिए नहीं।’ कुछ अपने हाथ धोते हैं, जबकि जो चाट गए थे वे सिर्फ हाथ मल कर उस वातानुकूलित हॉल में बैठ जाते हैं, जहां भरपूर भोजन परोसा जा रहा है। अप्रैल की शुरुआत में ही बाहर तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहंुच गया है, इसलिए उन गरीबों के लिए एसी ने बहुत फर्क पैदा कर दिया है, जिन्हें एक वक्त के भोजन के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है, जबकि उनके नाते-रिश्तेदार अस्पताल में विभिन्न कारणों से भर्ती हैं। 250 बिस्तरों के उस हमेशा भरे रहने वाले अस्पताल में भर्ती लोगों के संबंधियों को रोज करीब 120 लोगों का खाना परोसा जाता है। 365 दिनों में से 300 दिन भोजन मुफ्त दिया जाता है, जबकि शेष दिनों में क्लब 5 रुपए प्रति प्लेट शुल्क लेता है। ये वे दिन होते हैं, जब शहर से भोजन को प्रायोजित करने वाला कोई नहीं मिलता।

‘समर्पण’ क्लब 2005 में बैंक, स्थानीय स्वशासन संस्थाओं, मेडिकल फील्ड आदि के शीर्ष पदों से सेवानिवृत्त पेशेवरों ने समाज को लौटाने के उद्‌देश्य से अपना पैसा दान करके शुरू किया। उनके पैसे से नहीं, बल्कि वे खुद मुस्कराते हुए रोज जो शारीरिक सेवा देते हैं फर्क उससे पड़ा है। 2013 में तब के कलेक्टर राजेश बहुगुणा वहां व्यक्तिगत रूप से खाना खाकर बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने क्लब सदस्यों से रोगियों को भी भोजन देने का अनुरोध इस वादे के साथ किया कि इसका सारा पैसा सरकार लौटा देगी, क्योंकि बाहर से कैटरिंग की सेवा लेने में उन्हें बहुत भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता था। उसके बाद से क्लब रोगियों को रोज नाश्ता, दोपहर का भोजन, दोपहर बाद स्नैक्स, रात का भोजन और कुपोषित बच्चों व गर्भवती माताओं को रोज रात को दूध और वह भी स्टील की प्लेट को बाकायदा फॉइल लगाकर। कोई आश्चर्य नहीं कि एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में पूर्व प्रधान सचिव प्रवीण कृष्णा ने कहा, ‘समर्पण क्लब का योगदान ऐसा है कि राज्य के अस्पतालों को उसका अनुसरण करना चाहिए।’ ऊंचे पदों और अच्छी आर्थिक पृष्ठभूमि से आने के बाद भी मैं इन बुजुर्गों में एक ही बात देख पाया, उन्होंने सेवा के लिए अपने भीतरी पोशाक को बदल लिया था।

फंडा यह है कि  यदि आप समाज सेवा में भरोसा रखते हैं, तो आपको अपना भीतरी पहनावा बदलना होगा।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें FUNDA और SMS भेजें 9200001164 पर

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Shahjanpur

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×