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मेंटेनेबल नहीं है संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका : महाधिवक्ता

प्रदेश के 10 संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देने के मामले में राज्य सरकार के महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा सोमवार को...

Dainik Bhaskar

Apr 03, 2018, 06:35 AM IST
प्रदेश के 10 संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देने के मामले में राज्य सरकार के महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा सोमवार को हाईकोर्ट में जवाब पेशकर कहा कि यह याचिका मेंटेनेबल (चलने योग्य) नहीं है। याचिका में संसदीय सचिवों को पक्षकार नहीं बनाया गया है और न ही डिमांड नोटिस जारी किया गया है।

याचिका संसदीय सचिवों की नियुक्ति के डेढ़ साल बाद दायर की गई है, जबकि 15 प्रतिशत से ज्यादा एमएलए को मंत्री नहीं बनाए जाने का संशोधन 2004 में हुआ था। राज्य सरकार ने 1968 में ही संसदीय सचिव के कार्य व अधिकार का प्रावधान कर दिया था। अपने जवाब में लोढ़ा ने कहा कि संसदीय सचिव की नियुक्ति मंत्री को सहयोग के लिए होती है। वे केबीनेट की मीटिंग में शामिल नहीं होते और न ही कोई नीतिगत निर्णय ले सकते हैं। संसदीय सचिव अंतिम फैसले की कोई नोटशीट भी जारी नहीं कर सकते। ये केवल जिस क्षेत्र या विभाग के मंत्री की सहायता के लिए नियुक्त हुए हैं उतना ही काम करते हें। मंत्री तो कार्यपालिका व राजनीति की स्थिति रख सकते हैं लेकिन ये कार्यपालिका में दखल नहीं दे सकते। असम व सिक्किम में तो संसदीय सचिवों की नियुक्ति के एक्ट बनाने को चुनौती दी थी लेकिन राजस्थान राज्य में संसदीय सचिवों की नियुक्ति का कोई एक्ट नहीं बना है। न्यायाधीश केएस झवेरी व वीके व्यास की खंडपीठ ने राज्य सरकार के जवाब के बाद मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को तय की।

गौरतलब है कि अधिवक्ता दीपेश ओसवाल ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका में कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2017 में असम राज्य के मामले में दिए निर्णय के अनुसार संवैधानिक प्रावधानों से संसदीय सचिव नियुक्त नहीं कर सकती। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करवाया जाए और दस संसदीय सचिव की नियुक्ति को रद्द कर इन्हें हटाया जाए।

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