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बजरी खनन पर रोक जारी, सुप्रीम कोर्ट ने लीज पर दी जमीन की सीमांकन रिपोर्ट भी मांगी

बजरी खनन मामले में सरकार और 82 एलओआई होल्डर को राहत नहीं मिल पाई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रदेश में बजरी खनन...

Dainik Bhaskar

Apr 03, 2018, 06:35 AM IST
बजरी खनन मामले में सरकार और 82 एलओआई होल्डर को राहत नहीं मिल पाई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रदेश में बजरी खनन पर लगी रोक को बरकरार रखते हुए सुनवाई एक सप्ताह तक टाल दी। कोर्ट ने राज्य सरकार से बजरी खनन के लिए लीज पर दी गई जमीन की सीमांकन रिपोर्ट भी आगामी सुनवाई पर पेश करने को कहा है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने करीब पांच माह से बजरी खनन पर रोक लगाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मदन बी. लोकुर व दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने सोमवार को राज्य सरकार व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए रोक यथावत रखी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नेचर क्लब व दस्तक एनजीओ सहित करीब एक दर्जन प्रार्थना पत्रों को खारिज कर दिया। अदालत ने दस्तक एनजीओ को छूट दी है कि वह नए सिरे से प्रार्थना पत्र पेश कर सकते हैं।

कृषि भूमि पर खनन से उर्वरता प्रभावित होगी : याचिकाकर्ता

नेचर क्लब ने 2013 में प्रार्थना पत्र दायर कर पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के बिना चल रही खानों को शुरू करने की प्रार्थना की थी। जबकि दस्तक एनजीओ ने राज्य सरकार द्वारा खातेदारी की जमीन को बजरी खनन पर देने पर पाबंदी लगाने का आग्रह किया था। इसमें कहा था कि पर्यावरण मंत्रालय ने दूसरे राज्यों में कृषि भूमि को बजरी खनन पर देने के लिए मना किया है। कृषि भूमि को बजरी खनन पर देने से उर्वरता प्रभावित होगी। बजरी खनन के लिए सरकार नए नियम बना रही है। इसलिए कृषि भूमि को बजरी खनन के लिए लीज पर नहीं दिया जाए।

कोर्ट ने सुनवाई एक हफ्ते तक टाली

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