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एससी-एसटी अांदोलन का सियासी पोस्टमार्टम

सालों से दलिताें के साथ हो रहे भेदभाव व उत्पीड़न को रोकने के लिए ही एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम अस्तित्व में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 04, 2018, 06:40 AM IST

एससी-एसटी अांदोलन का सियासी पोस्टमार्टम
सालों से दलिताें के साथ हो रहे भेदभाव व उत्पीड़न को रोकने के लिए ही एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम अस्तित्व में आया था। आज यह वर्ग इस एक्ट में सीधी गिरफ्तारी के प्रावधान पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के फैसले से गुस्से में है। प्रदेश में सत्ता में चाहे कांग्रेस रही हो या भाजपा, राज की राह दलित वोट ही तय करते हैं। राजस्थान में ही आधी सीटों पर एससी-एसटी वर्ग का दबदबा है। यही वजह है कि सामाजिक रूप से भले ही एससी-एसटी के साथ भेदभाव होता हो, लेकिन राजनीतिक रूप से हर पार्टी इन्हें गले लगाना चाहती है। दलित आंदोलन को भाजपा-कांग्रेस से लेकर तमाम दलों के समर्थन के पीछे बड़े वोट बैंक की कहानी है।

2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में 17.80% आबादी अनुसूचित जाति और 13.50% अाबादी अनुसूचित जनजाति की है। ‌एससी-एसटी की सुरक्षित सीटों में यदि इस वर्ग की बहुलता वाली सीटों को भी जोड़ें तो करीब 100 सीटें ऐसी हैं जहां एससी-एसटी वोट सियासी समीकरणों को उथल-पुथल करने की क्षमता रखते हैं। मौजूदा विधानसभा में एससी-एसटी की 59 सुरक्षित सीटों में से 50 सीटों पर तो भाजपा का ही कब्जा है। दलित आंदोलन को लेकर कांग्रेस सत्ता के खिलाफ बोलकर विपक्ष की भूमिका निभा रही है वहीं भाजपा के मंत्री-विधायक खुला समर्थन देकर अांदोलन को हवा दे रहे हैं। हर नेता सुप्रीम कोर्ट के फैसले से असहमति प्रकट कर इस पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है। इसके पीछे इस वर्ग का वो बड़ा वोट बैंक है जिसको आने वाले चुनावों में हर दल अपनी फसल समझकर चल रहा है।

100 सीटों पर दबदबा, इसीलिए भाजपा व कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के फैसले से असहमत

59 सीटें सिर्फ एससी-एसटी के लिए रिजर्व

एससी के लिए सुरक्षित 34 सीटें

अजमेर साउथ, अलवर ग्रामीण, कठूमर, बारां-अटरूं, चौहटन, वैर, बयाना, शाहुपरा(भीलवाड़ा), खाजूवाला, केशोरायपाटन, कपासन, सुजानगढ़, सिकराय, बसेड़ी, रायसिंह नगर, अनूपगढ़, पीलीबंगा, दूदू, बगरू, चाकसू, जालौर, डग, पिलानी, भोपालगढ़, बिलाड़ा, हिंडौन, रामगंजमंडी, जायल, मेड़ता, सोजत, खंडार, धोद, रेवदर(सिरोही), निवाई

रिजर्व सीटों पर कांग्रेस के विधायक : एससी-एसटी सुरक्षित सीटों पर कांग्रेस की ओर से भजनलाल जाटव, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, घनश्याम मेहर, रमेश मीणा, हीरालाल दरांगी विधायक हैं।

रिजर्व सीटों पर भाजपा के इन विधायक-मंत्रियों की सियासी जमीन

एससी रिजर्व सीट : कैलाशचंद्र मेघवाल, अनिता भदेल, बाबूलाल वर्मा, सुंदरलाल, कमसा, जयराम जाटव, मंगलराम, रामपाल, तरुणराय कागा, भजनलाल जाटव, बच्चूसिंह, विश्वनाथ, अर्जुनलाल जीनगर, खेमाराम, रानी सिलोटिया, शिमला बावरी, द्रोपती, प्रेमचंद बैरवा, कैलाश वर्मा, लक्ष्मीनारायण बैरवा, अमृता मेघवाल, रामचंद्र,अर्जुनलाल, राजकुमारी, चंद्रकांता मेघवाल, मंजू बाघमार, सुखराम, संजना आगरी, जितेंद्रकुमार गोठवाल, गोरधन, जगसीराम, हीरालाल विधायक हैं।

एसटी रिजर्व सीट : डॉ. किरोड़ीलाल, नंदलाल मीणा, गोलमा देवी, नवनीतलाल, जीतमल खांट, धनसिंह रावत, भीमाभाई, ललित कुमार, देवेंद्र कटारा, गोपीचंद मीणा, अनिता कटारा, सुशील कटारा, जगदीश नारायण, कुंजीलाल, समाराम गरासिया, प्रताप लाल भील, नानालाल अहारी, फूलसिंह मीणा, अमृतलाल, गौतम लाल।

एसटी की 25 रिजर्व सीटें

राजगढ़-लक्ष्मणगढ़, घाटोल, गढ़ी, बांसवाड़ा, बागीदौरा, कुशलगढ़, किशनगंज, लालसोट, डूंगरपुर, आसपुर, सागवाड़ा, चौरासी, जमवारामगढ़, बस्सी, टोडाभीम, सपोटरा, बामनवास, पिंडवाड़ा,गोगूंदा, झाड़ाेल, खैरवाड़ा, उदयपुर ग्रामीण, सलूंबर, धरियावद, प्रतापगढ़

23 सीटें जहां एससी-एसटी का बाहुल्य

बड़ी सादड़ी, थानागाजी, महवा, दौसा, जहाजपुर, देवली-उनियारा, सवाईमाधोपुर, छबड़ा, मावली, पीपल्दा, वल्लभनगर, बूंदी, निंबाहेड़ा, कुंभलगढ़, नाथद्वारा, गंगापुरसिटी, करौली, अंता, आहोर, श्रीमाधोपुर, सूरजगढ़, भरतपुर, कोलायत, नागौर में एससी या एसटी दूसरे बाहुल्य में हैं।

मनोहरथाना, हिंडौली, खानपुर, बेगूं, सुमेरपुर, केकड़ी, नीमकाथाना, शेरगढ़, खंडेला, मुंडावर, दांतारामगढ़, नदबई, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, किशनगढ़, बैरवा, सूतरगढ़, हनुमानगढ़, नोहर, भादरा, बीकानेर पूर्व, डूंगरगढ़, लाडनूं, डेगाना, परबतसर, नावां में एससी-एसटी दूसरे या तीसरे नंबर पर हैं।

भारतबंद में हिंसा पर 300 लोग गिरफ्तार, दूसरे दिन भी प्रदर्शन

नीमकाथाना में हिंसा के विरोध में बाजार बंद रखकर रैली निकालते लोग।

मंगलवार को भी प्रदेश के कई जिलों में माहौल तनावपूर्ण रहा। कई स्थानों पर रैली निकाली गई। प्रदेशभर में 176 मुकदमे दर्ज किए और 300 लोगोें को गिरफ्तार किया गया। शांतिभंग की धाराओं में 726 लोग गिरफ्तार हुए।

अलवर में भारत बंद के दौरान हिंसा की जांच होगी। मंगलवार को हिंडौनसिटी में बंद के दौरान अलवर की एक रोडवेज बस करौली में फंस गई। अलवर से हिंडौन, महावीरजी, करौली व कैलादेवी जाने वाली 8 बसों का संचालन नहीं हुआ।

भरतपुर में भारत बंद के दौरान विरोध-प्रदर्शन के नाम पर उपद्रव मचाने के जिले में 26 मामले दर्ज हुए। एहतियात के तौर पर बीएसएफ की तीन कम्पनियां बुलाई हैं, जो कुम्हेर, बयाना व भरतपुर मुख्यालय पर रखी जाएंगी।

बंद के दौरान टोडा के सरकारी स्कूल में छुट्टी देने पर मंगलवार को ग्रामीणों ने विरोध-प्रदर्शन किया। प्रधानाचार्य रामकुमार बलाई को एपीओ किया गया है।

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