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सीएस तक पहुंचा सचिवालय कैंटीन विवाद, मंत्रियों के चाय-नाश्ते के 17 लाख के बिल अटके

सचिवालय में मंत्रियों के चाय-नाश्ते के बिलों के भुगतान को लेकर सचिवालय कर्मचारी संघ और कैबिनेट सचिवालय...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 04, 2018, 06:45 AM IST

सचिवालय में मंत्रियों के चाय-नाश्ते के बिलों के भुगतान को लेकर सचिवालय कर्मचारी संघ और कैबिनेट सचिवालय आमने-सामने हो गए हैं। सरकार ने सिंगल सोर्स पर सचिवालय कर्मचारी संघ को सचिवालय कैंटीन का ठेका दे रखा है। कैंटीन ने पिछले दिनों मंत्रियों के चाय-नाश्ते की एवज में 3 महीने के 17 लाख रुपए के बिल कैबिनेट सचिवालय को भेजकर भुगतान मांगा। कैबिनेट सचिवालय ने आरटीपीपी नियमों का हवाला देते हुए बिल भुगतान करने से मना कर दिया। विवाद बढ़ा और मुख्य सचिव एनसी गोयल तक पहुंच गया। गोयल ने मामले में कैबिनेट सचिवालय को नोटशीट पर तथ्य पेश करने के निर्देश दिए हैं।

वित्त विभाग ने परिपत्र जारी कर निर्देश दिए थे कि टेंडर जारी करने के लिए आरटीपीपी नियमों में छूट की पूर्व अनुमति वित्त विभाग से नहीं ली गई तो ऐसे मामलों में कार्योत्तर सहमति वित्त विभाग नहीं देगा। इसके बाद भी कोई अधिकारी आरटीपीपी के नियमों की पालना नहीं करता तो उसके खिलाफ विभाग के स्तर पर कार्रवाई कर मंत्रिमंडल उपसमिति को भेजे जाएंगे। पिछले दिनों ऐसे ही मामले में वित्त विभाग की ओर से सीएमओ में नाश्ते के बिलों के भुगतान किए जाने पर रोक लगा दी थी। कैबिनेट सचिवालय ने तीन बार यह फाइल वित्त विभाग को भेजी लेकिन वित्त विभाग ने तीनों पर आरटीपीपी नियमों के मुताबिक ही बिल भुगतान करने की हिदायत दी।

सिंगल सोर्स ठेका दिए जाने पर आपत्ति

कैबिनेट सचिवालय ने अपने जवाब में 16 जनवरी 2018 के वित्त विभाग के सर्कुलर का हवाला देते हुए लिखा कि कैंटीन का ठेका देने में राजस्थान ट्रांसपेरेंसी प्रोक्योरमेंट रूल्स (आरटीपीपी) का उल्लंघन किया गया है। आरटीपीपी रूल्स 2013 से प्रभावी हो चुके लेकिन इसके बाद भी कैंटीन को लगातार सिंगल सोर्स पर ठेका दिया गया और बिलों का भुगतान भी किया जाता रहा। जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए जिस कंपनी टेंडर से ठेका दिया गया उसमें आरटीपीपी नियमों की पालना की गई। इसके साथ ही उस कंपनी की ठेका दरें भी सचिवालय कैंटीन से कम हैं।

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