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धैर्य रखिए, निचले स्तर पर निवेश का मौका मिलेगा

ऐसे समय जब सबकुछ गड़बड़ चल रहा है, चौथी तिमाही के नतीजे बाजार में तेजी का सेंटिमेंट लौटा सकते हैं। पिछले साल नोटबंदी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 04, 2018, 06:45 AM IST

ऐसे समय जब सबकुछ गड़बड़ चल रहा है, चौथी तिमाही के नतीजे बाजार में तेजी का सेंटिमेंट लौटा सकते हैं। पिछले साल नोटबंदी के कारण चौथी तिमाही के नतीजे निराशाजनक रहे थे। लेकिन इसी निचले बेस के कारण इस बार ग्रोथ के नंबर अच्छे रहेंगे और बाजार में तेजी लाने में मददगार होंगे। हालांकि तेजी सीमित ही रहेगी। बाजार निचले स्तर पर स्थिर हो रहा है। ऐसे में कंपनियों के आकर्षक आंकड़े निवेशकों को लुभाएंगे। शॉर्ट टर्म में खरीदारी के नए मौके निकलेंगे। मार्च में बाजार में 3.5% गिरावट आई। बहुत सी कंपनियां 200 दिनों के औसत (मूविंग एवरेज) से नीचे ट्रेड कर रही हैं।

गिरावट सीमित रहेगी, पर रैली के बहाव में न आएं : यह देखना होगा कि नई तेजी, गिरावट के दौर के अंत का संकेत है या आगे और कमजोरी का अंदेशा है। वैसे व्यापार घाटा, एफपीआई की बिकवाली और आईपीओ के कारण लिक्विडिटी में कमी जैसे निगेटिव कारणों को बाजार जज्ब कर चुका है। इसलिए आगे गिरावट सीमित रहेगी। पर इस रैली के बहाव में न आएं। यह थोड़े समय की तेजी हो सकती है। आगे कई फैक्टर हमारी इकोनॉमी को दबाव में रखेंगे। राज्यों में होने वाले चुनाव और अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दर में 4 बार बढ़ोतरी करना प्रमुख कारण होंगे। ये खतरे साल के अंत तक अच्छी कंपनियों में कम वैलुएशन पर निवेश के अवसर दिलाएंगे।

सरकारी बैंकों में बाउंस-बैक के आसार : सेक्टर के लिहाज से देखें तो कॉमर्शियल वाहन सेगमेंट को फिलहाल किनारे रखें। 20 साल से ज्यादा पुराने वाहन स्क्रैप करने की नीति 2020 से लागू होने से वाहनों की डिमांड देर से बढ़ेगी। स्टील और एल्युमिनियम पर अमेरिका द्वारा आयात शुल्क लगाने से भारतीय कंपनियों पर सीधा असर नहीं होगा, लेकिन कमोडिटी के दाम नीचे रहने से उनका मुनाफा कम रह सकता है। दूसरी तरफ, पीएनबी घोटाले के बाद भारी गिरावट झेलने वाले सरकारी बैंकों में बाउंस-बैक के आसार हैं। इनमें तेजी की संभावना इसलिए भी है क्योंकि इनका बुरा दौर बीत चुका है। गैस यूटिलिटी भी ऐसा सेक्टर है जिसमें कंपनियों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। मौजूदा वैलुएशन पर इनमें निवेश लांग टर्म में अच्छा रिटर्न दे सकता है।

लिक्विडिटी संकट सबसे अधिक प्रभावित करेगा : सवाल उठता है कि खरीदारी का वक्त आ गया है या हमें अब भी सावधानी बरतनी चाहिए? दुनिया के बाजार एक दूसरे से जुड़े हैं। ग्लोबल कारणों से आने वाला लिक्विडिटी संकट घरेलू बाजार को सबसे अधिक प्रभावित करेगा। पूरे साल बाजार पर काले बादल मंडराते रहेंगे। इसलिए पूर्वग्रहों और भीड़ की सोच वाली मानसिकता से निकल अलग सोचना होगा। निचले स्तर पर मौके आने दीजिए, वर्ना किनारे रहना ही बेहतर है।

स्टॉक मार्केट/कमोडिटी

जिमित मोदी, सीईओ एवं संस्थापक, सैमको सिक्युरिटीज एंड स्टॉकनोट

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