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तीन घंटे में नहीं पैंतालीस मिनट में पेशेंट बनेगा टोटल स्टोन फ्री और नहीं होगी किडनी डैमेज

हैल्थ रिपोर्टर जयपुर आजकल स्टोन बनना एक सामान्य प्रॉब्लम बन चुकी है। अभी तक किडनी और यूरेटर से...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 07:00 AM IST
हैल्थ रिपोर्टर


आजकल स्टोन बनना एक सामान्य प्रॉब्लम बन चुकी है। अभी तक किडनी और यूरेटर से सर्जरी करके स्टोन निकालने के बावजूद भी कुछ टुकड़े रह जाते थे। जो पेशेंट्स को तकलीफ देते रहते थे। वहीं, सर्जरी के दाैरान किडनी डैमेज और ज्यादा ब्लीडिंग होने का खतरा बना रहता था। हाल ही में शॉक पल्स टेक्नाेलॉजी ने स्टोन सर्जरी को जहां अासान बना दिया है वहीं पेशेंट्स को भी दर्द से काफी हद तक िरलीफ दिया है। शॉक पल्स एक तरह का जनरेटर है। यह ना सिर्फ किडनी, यूरेटर और गाल ब्लेडर से स्टोन्स को ब्रेक करता है बल्कि स्टोन के छोटे-छोटे कणों को खींचकर बाहर िनकाल देता है। पेशेंट टॉटल स्टॉन फ्री बन जाता है। स्टोन को ब्रेक करने में भी बहुत कम समय लगता है। अभी तक दस सेंटिमीटर के स्टोन को निकालने में तीन घंटे लगते थे। इसके जरिए सिर्फ 45 मिनट में स्टोन के इस सबसे बड़े साइज को निकाला जा सकता है। तीन सेंटिमीटर का स्टोन निकालने में पांच से दस मिनट का समय चाहिए।

शॉक पल्स एक तरह का जनरेटर है। यह ना सिर्फ किडनी, यूरेटर और गाल ब्लेडर से स्टोन्स को ब्रेक करता है बल्कि स्टोन के छोटे-छोटे कणों को खींचकर बाहर िनकाल देता है। इस टेक्निक से डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के पेशेंट‌्स में सर्जरी करने पर ब्लीडिंग का खतरा नहीं रहता।

कारण




स्टोन हो सकती है।

हर एक घंटे में एक गिलास पानी पीएं, स्टाेन बनने की संभावना कम

ज्यादा पानी पीने से क्रिस्टल बाहर निकल जाते हैं। स्टोन बनने का खतरा कम रहता है।

शॉक पल्स टेक्नाेलॉजी से फायदा

डयबिटीज, हाई ब्लड - प्रेशर के पेशेंट की किड़नी काफी सॉफ्ट हो जाती है। सॉफ्ट किडनी में कोई भी प्रोसिजर करते वक्त ब्लीडिंग ज्यादा होने का खतरा बना रहता है। लेकिन इस टेक्नोलॉजी से इन पेशेंट्स में स्टोन निकालते वक्त किडनी से ब्लीडिंग ज्यादा नहीं होती है। क्योंकि इस टेक्नोलॉजी में इंस्ट्रूमेंट अपनी तरफ स्टोन्स को अट्रेक्ट करता है। जिससे स्ट्रोन्स के टुकड़ों को यह पूरी तरह से खींचकर निकाल देता है। इसे यूज करना बहुत ही आसान है। पेशेंट्स की रिकवरी बहुत जल्दी होती है। चौबीस घंटे में पेशेंट्स को डिस्चार्ज कर देते हैं। जबकि अभी तक सर्जरी के बाद भी स्टोन्स के कुछ टुकड़े रह जाते थे, जो एक्स-रे में दिखाई देते थे। लेकिन उन्हें दुबारा निकाल सकते थे। इस टेक्निक के जरिए पेशेंट्स टॉटल स्टोन फ्री हो जाता है। इससे पहले डायबिटीज, हाई बीपी के पेशेंट्स की किडनी सॉफ्ट होने पर फट जाती थी। स्टोन के टुकडे किडनी के अंदर जाने से निकलना मुश्किल हो जाता था। किडनी को डैमेज होने से बचाया जा सकता है। वहीं, यह छोटे बच्चों की स्टोन सर्जरी के लिए बहुत ही फायदेमंद है। बच्चों की किडनी बेहद ही नाजुक होती है। पहले स्टोन को ब्रेक करते हुए किडनी डैमेज का खतरा बना रहता था। अब इस प्रोसेस के दौरान स्टोन को खींचकर बाहर निकाल लाती है।

अभी तक यह माना जाता रहा है कि पानी कम पीने से किडनी में खराबी होती है। यह सही है। पानी कम पीने से भी स्टोन की प्रॉब्लम हो सकती है। कभी-कभी यूरिन में क्रिस्टल रह जाते हैं। पानी कम पीने के कारण ये क्रिस्टल यूरिन में जम जाते हैं और बाहर नहीं निकल पाते हैं। इससे स्टोन्स बनती है। गर्म जगह के पानी में कई तरह के मिनरल्स रहते हैं।

इस पानी को बिना फिल्टर किए हुए पीने से मिनरल्स सीधे बॉडी में जाते हैं। इससे स्टोन बनने के चांस बने रहते हैं। स्टोन से बचने के लिए पानी को बॉयल और फिल्टर करके पीने से स्टोन बनने की संभावना कम हो जाती है। स्टोन से बचने के लिए हर घंटे में एक गिलास पानी पिएं। ताकि बॉडी मेन्टेन रहें।

अक्सर लोग दो-तीन घंटे तक पानी नहीं पीते हैं। इसके बाद एक बोतल पानी एक साथ पीते हैं। यह हैल्थ के लिए सही नहीं है, क्योंकि ऐसा करने से बॉडी को ज्यादा फोर्स लगाती होती है। इसका सीधा असर किडनी और हार्ट पर पड़ता है। इसलिए एक साथ पानी नहीं। एक-एक घंटे के अंतराल में पानी पीने से दिनभर में पंद्रह गिलास पानी पी लेंगे।

- डॉ प्रशांत पटनायक,

यूरोलॉजिस्ट, मुंबई

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