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प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में पहली बार घटा छात्रों का नामांकन

प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में इस बार लड़कों का नामांकन पिछले सत्र की तुलना में 4.49 प्रतिशत घटने से लड़के-लड़कियों का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 07:00 AM IST

प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में इस बार लड़कों का नामांकन पिछले सत्र की तुलना में 4.49 प्रतिशत घटने से लड़के-लड़कियों का अनुपात 51-49 पर आ गया है। अब तक लड़कियों के नामांकन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जाती रही है लेकिन लड़कों का नामांकन पहली बार घटा है। डेढ़ दशक पहले लड़के-लड़कियों का अनुपात 70-30 था। पिछले सत्र में ये अनुपात 54-46 रहा था। हाल ही राज्य सरकार द्वारा सत्र 2017-18 के आंकड़ों में ये बात निकलकर आई है। हालांकि प्राइवेट कॉलेजों में नामांकन के आंकड़े अब तक सरकार जुटा नहीं पाई है और इस मामले में 300 प्राइवेट कॉलेजों को नोटिस जारी किए गए हैं।

प्रदेश में पहली बार सरकारी कॉलेजों के नामांकन में लड़कों के नामांकन में 4.49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ये कमी पिछले साल हुए सरकारी कॉलेजों के नामांकन की तुलना में है। वर्ष 2016- 17 में लड़कों के नामांकन 2 लाख 5 हजार 176 थे वहीं 2017-18 में ये 1 लाख 96 हजार 46 ही रह गए हैं। 9 हजार 130 की कमी दर्ज की गई है। लड़कियों का नामांकन बढ़ा है। पिछले 25 वर्षों का ट्रेंड बरकरार रहा है और सरकारी कॉलेजों में लड़कियों की संख्या पिछले वर्षों के नामांकनों की तुलना में 6.44 प्रतिशत बढ़ी है। हालांकि 2015- 16 और 2016-17 में ये वृद्धि 5.88 प्रतिशत थी। सरकारी कॉलेजों में लड़कियां का नामांकन इस बार 1 लाख 86 हजार 509 रहा है, जबकि पिछले सत्र 2016-17 में ये 1 लाख 75 हजार 221 रहा था। पिछले साल की तरह हर वर्ग में एससी-एसटी, ओबीसी और जनरल कैटेगरी में लड़कियों की संख्या चार प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।

तुलनात्मक 4.49 प्रतिशत कम हुए लड़कों के एडमिशन

ये लीजिए सरकारी आंकड़ा

वर्ष छात्र छात्राएं

2010-11 14968 80457

2011-12 162469 95678

2012-13 171680 112233

2013-14 192665 136465

2014- 15 204138 151311

2015-16 204427 165481

2016-17 205176 175221

2017- 18 196046 186509

नोट- ये सिर्फ सरकारी कॉलेजों के एडमिशन के आंकड़े है। इसमें प्राइवेट कॉलेज, यूनिवर्सिटी बीएड और टेक्निकल कॉलेज शामिल नहीं है।

ऐसा क्यों

लड़के-लड़कियों का अनुपात डेढ़ दशक पहले 70- 30 था। ऐसे में लड़कों की संख्या क्यों घटी इसके 3 महत्वपूर्ण कारण हैं। पहला यह कि लड़के साधारण ग्रेजुएशन को प्राथमिकता देने से बचते रहे। तकनीकी और प्रोफेशनल कोर्सेस की ओर डायवर्ट हुए। उधर लड़कियां साधारण ग्रेजुएशन को महत्व देती रहीं क्योंकि उनकी प्राथमिकता शिक्षिका बनना और प्रतियोगी परीक्षाएं रहीं। साथ ही लड़के प्रदेश से बाहर जाते रहे और लड़कियां लोकल सरकारी कॉलेज में ही रहीं। इसके अलावा सरकार ने 15 साल में लड़कियों के लिए कॉलेज खोले और फीस में भी छूट दी।

बेटों की तुलना में बेटियां आगे बढ़ रही हैं और बेटियों के नामांकन में लगातार वृद्धि हो रही है, ये बहुत अच्छी बात है। बेटियों ने ये मुकाम मैरिट में आकर हासिल किया है। हम सबको बेटियों को आगे लाना है, जिसमें सफलता मिल रही है। वैसे भी अभी प्राइवेट कॉलेजों का डेटा आना बाकी है। ये आंकड़े हैं। कम ज्यादा होते रहते हैं। -किरण माहेश्वरी, मंत्री हायर एजुकेशन

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