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28 साल की सर्विस में 5 बार एपीओ, अब 7 साल पहले नौकरी से विदाई

एडीजी इंदू भूषण ने नोटिस नहीं लिया तो थानाप्रभारी ने उनके वैशाली नगर स्थित आवास हवालात पर चस्पां कर दिया।

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 05, 2018, 07:05 AM IST

28 साल की सर्विस में 5 बार एपीओ, अब 7 साल पहले नौकरी से विदाई
एडीजी इंदू भूषण ने नोटिस नहीं लिया तो थानाप्रभारी ने उनके वैशाली नगर स्थित आवास हवालात पर चस्पां कर दिया।

प्रदेश के 17 अाईपीएस अफसरों की परफोर्मेंस चैक के बाद फैसला

लंबे समय से एपीओ चल रहे हैं इंदु भूषण

भास्कर न्यूज | जयपुर

हमेशा विवादों में रहने वाले अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक इंदु कुमार भूषण को केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। प्रदेश में किसी आईपीएस को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का यह अब तक का पहला मामला है। नवंबर 2017 में केंद्रीय कार्मिक प्रशिक्षण मंत्रालय की ओर से प्रदेश के आईपीएस अफसरों का कराए गए प्रदर्शन के आंकलन के बाद यह आदेश जारी किया गया है। एडीजी भूषण 1989 बैच के आईपीएस हैं व मूलतः बिहार के रहने वाले है। भूषण को विवादों में रहने के कारण राज्य सरकार ने गत दिनों एपीओ कर दिया था। इंदुभूषण ने बीटेक की पढ़ाई की है। उनके खिलाफ शास्त्री नगर और वैशाली नगर थानों में तीन केस दर्ज हैं।

गौरतलब है कि राजस्थान कैडर के 21 अफसरों के परफारमेंस का आंकलन किया था। इंदू भूषण के अलावा अन्य 20 आईपीएस अफसरों का प्रदर्शन ठीक रहा, जो भविष्य में सेवाएं देते रहेंगे।

राजस्थान में पहली बार किसी अफसर पर केंद्र सरकार की ऐसे कार्रवाई

अब भी वही तेवर, नोटिस भी नहीं लिया, घर पर चस्पां किया गया

पीएचक्यू ने अनिवार्य सेवानिवृति के आर्डर की तामिल करवाने के लिए बुधवार दोपहर को वैशाली नगर एसएचओ को हनुमान नगर विस्तार स्थित इंदुभूषण के घर भेजा। पहले दो पुलिसकर्मी घर का माहौल देखने आए। इसके बाद एसएचओ वहां पहुंचे। घर के बाहर लगी डोर बेल के जरिए एडीजी से बात की तो उन्होंने ऑर्डर लेने से मना कर दिया। दस मिनट बाद दुबारा उनसे बात की तब भी कोई बाहर नहीं आया। इसके बाद पुलिस ने दरवाजे के बाहर ऑर्डर चस्पां कर दिया। 10 मिनट इंतजार और वीडियोग्राफी के बाद पुलिस वहां से लौट गई। इस मामले में जब एडीजी इंदूभूषण ने कुछ भी बताने से इंकार किया है।

28 साल में सिर्फ 6 दिन की फिल्ड पोस्टिंग, दो बार यूएन मिशन पर भी गए

इंदु भूषण की 28 साल की सर्विस में केवल 6 दिन की फिल्ड पोस्टिंग रही। सात जुलाई 1999 को इंदु भूषण को डूंगरपुर जिले का एसपी बनाया गया और 12 जुलाई 1999 को उन्हें एसपी के पद से हटा दिया गया। इसके बाद से लेकर आज तक उन्हें कोई फिल्ड पोस्टिंग नहीं मिली। भूषण दो बार यूएन मिशन पर गए। पहली बार दस मई 2000 से 14 मई 2001 तक कोसेवा तथा दूसरी बार 3 सितंबर 2004 से 3 सितंबर 2005 तक सिएरा लिओन में डेपुटेशन पर रहे। 30 दिसंबर 1965 को जन्में भूषण बीटेक की पढ़ाई करने के बाद आईपीएस बने और पहली पोस्टिंग के तौर पर उदयपुर में असिस्टेंट एसपी के पद पर लगे। तभी से विवादों में रहने लगे थे। इसके बाद सीआईडी सीबी जयपुर में लगाया गया। सर्विस के दौरान उन्हें पांच बार एपीओ किया गया।

कभी राज्यपाल से उलझे तो कभी डीजीपी पर गिरफ्तार करने का आरोप लगाया

ड्राफ्टिंग के मास्टर माने जाने वाले भूषण ने कुछ माह पहले तत्कालीन डीजीपी अजीत सिंह पर गिरफ्तार करवाने का अारोप लगाया था।

मिड कैरियर ट्रेनिंग के लिए एडीजी भूषण हैदराबाद स्थित पुलिस अकादमी में गए। जहां आंध्र तेलंगाना के तत्कालीन राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन राव से बहस हो गई। इसके बाद उनको जबरन फ्लाइट से जयपुर रवाना किया गया।

डीजीपी की मीटिंग में भूषण ने एडीजी क्राइम पीके सिंह से उनकी संपत्ति के लिए पूछ लिया तथा कई सवाल उठाए।

पुलिस मुख्यालय में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की ओर से मीटिंग लेने के दौरान भूषण डीजीपी से बहस करने लगे।

वर्ष 2015 में एडीजी जेल रहते हुए जेल डॉक्टर को फोन कर गाली गलौच करने के आरोप लगे। जिस पर शिकायत भी दर्ज हुई।

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