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38% जेलों में क्षमता से अधिक कैदी, चार साल में 12 जेलें बननी थीं, सिर्फ उदयपुर में जमीन फाइनल

हाल ही सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी ने पूरे देश का ध्यान अपनी आेर खींचा। कोर्ट ने 30 मार्च को एक सुनवाई के दौरान कहा-...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 05, 2018, 07:05 AM IST

हाल ही सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी ने पूरे देश का ध्यान अपनी आेर खींचा। कोर्ट ने 30 मार्च को एक सुनवाई के दौरान कहा- कैदियों को जानवरों की तरह नहीं रखा जा सकता। अगर आप उन्हें ठीक तरह से नहीं रख सकते तो बाहर कर दीजिए। सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई कि 1300 जेलों में निर्धारित कैदियों की संख्या से 150 से 600 प्रतिशत तक कैदी ज्यादा हैं। इस टिप्पणी के बाद भास्कर ने राज्य की जेलों के हालात जाने।

जेल महानिदेशालय की 28 फरवरी तक की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की नौ सेंट्रल जेल, 26 जिला जेल और 60 सब जेलों सहित 96 जेलों की तुलना में 36 जेलें ऐसी है जिनमें क्षमता से कहीं ज्यादा बंदियों को ठूंस-ठूंस कर रखने की मजबूरी है। इन जेलों में कुल 20540 बंदियों की क्षमता है। मौजूदा 18306 बंदियों में 4840 को सजा हो चुकी है। वहीं, 13418 बंदी विचाराधीन हैं। सबसे अधिक नैनवां सब जेल में क्षमता से 220 फीसदी, सवाई माधोपुर में 174, राजसमंद में 173, पाली में 171, जालोर में 166 और कोटा में 145 प्रतिशत तक ज्यादा बंदी मौजूद है।

जयपुर सेंट्रल जेल में क्षमता से 119% बंदी ज्यादा, जेल शिफ्ट होनी है, पर जमीन नहीं...

5 सेंट्रल जेलों में क्षमता से ज्यादा बंदी

प्रदेश की नौ सेंट्रल जेलों में 9573 बंदियों को रखने की क्षमता है। इनमें 9258 बंदी मौजूद हैं, जिनमें 4185 सजायाफ्ता और 5031 के मामले अदालतों में विचाराधीन है। पांच सेंट्रल जेलों में बंदियों की संख्या क्षमता से सौ फीसदी से ज्यादा है। इनमें कोटा में 145 प्रतिशत, उदयपुर में 120, जयपुर में 119, अजमेर में 106 और गंगानगर में 103 प्रतिशत कैदी क्षमता के मुकाबले ज्यादा हैं।

12 जिला जेलों में स्थिति सबसे खराब

प्रदेश में 26 जिला जेलें हैं। इनमें 12 जेलें ऐसी है जिनमें जेल की क्षमता की तुलना में सौ फीसदी से लेकर 174 प्रतिशत तक ज्यादा बंदी रखे जा रहे हैं। इनमें बारां जिला जेल में 143 प्रतिशत, बाड़मेर में 101 प्रतिशत, भीलवाड़ा में 114, बीकानेर में 101, डूंगरपुर में 127, जयपुर में 100, जालोर में 166, झुंझुनूं में 127, नागौर में 158, पाली 171, राजसमंद में 173 प्रतिशत और सवाई माधोपुर में 174 प्रतिशत बंदी है।

जबकि हाई सिक्योरिटी जेल में

क्षमता के मुकाबले सिर्फ 17 फीसदी

बीकानेर, जोधपुर, भरतपुर एवं अलवर सेंट्रल जेल में क्षमता से 90 फीसदी से भी कम बंदी हैं। प्रदेश की एकमात्र हाई सिक्योरिटी में सिर्फ 17 प्रतिशत बंदी मौजूद हैं। इस जेल की क्षमता 264 बंदियों की है जबकि, 28 फरवरी तक यहां सिर्फ 47 बंदी थे। उधर, 26 में से 14 जिला जेलों की स्थिति ठीक कही जा सकती है जहां बंदियों की क्षमता की तुलना में सौ प्रतिशत तक बंदी कम हैं।

12 जेलें शिफ्ट करनी थी, एक भी नहीं हुई

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2014-15 के बजट में 12 जेलों को शहर से बाहर शिफ्ट करने का एलान किया था। इनमें उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, पाली, डूंगरपुर, अकलेरा, भवानी मंडी, निंबाहेड़ा, आबूरोड़, रतनगढ़, भीम, शाहपुरा-भीलवाड़ा की जेल शामिल हैं। इसमें सिर्फ उदयपुर की जमीन फाइनल हो पाई।

19 सब जेलों में चौंकाने वाले हालात

प्रदेश में 60 सब जेलें हैं। इन जेलों में क्षमता 4412 बंदियों की है, लेकिन 2839 बंदी ही हैं। फिर भी 19 जेलों में क्षमता से कहीं ज्यादा बंदी मौजूद हैं। इनमें बाली में 138 प्रतिशत, बहरोड में 148 प्रतिशत, भादरा में 128 प्रतिशत, भवानी मंडी में 131 प्रतिशत, भीनमाल में 162 प्रतिशत, फलौदी में 129 प्रतिशत, फतेहपुर में सौ प्रतिशत, गुलाबपुरा में 159 प्रतिशत, गंगापुर सिटी में 100 प्रतिशत, हिंडौन सिटी 103 प्रतिशत, किशनगढ़ बास में 111 प्रतिशत, कुशलगढ़ में 120 प्रतिशत, मांडलगढ़ में 141 प्रतिशत, नैनवां में 220 प्रतिशत, निंबाहेड़ा में 129 प्रतिशत, पोकरण में 106 प्रतिशत, रतनगढ़ में 143 प्रतिशत, सागवाड़ा में 120 प्रतिशत, और सांचौर में 133 प्रतिशत कैदी हैं।

12 जेलों के अलावा जयपुर जेल को भी शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना कई सालों से अटकी पड़ी है, लेकिन अभी तक जमीन ही फाइनल नहीं हो सकी है।

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