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रियल एस्टेट को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा नहीं मिलने से बिल्डर निराश

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 07:05 AM IST

गुरुवार को पेश किए गए आम बजट में मंदी से जूझ रहे रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं होने से बिल्डरों में...
गुरुवार को पेश किए गए आम बजट में मंदी से जूझ रहे रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं होने से बिल्डरों में निराशा है। हालांकि बिल्डरों को मानना वित्त मंत्री ने बजट में कुछ रियायतें दी है। इसका रियल एस्टेट क्षेत्र को फायदा मिलेगा।

इसके अलावा कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाने से भी बाजार को बूस्ट मिलने की उम्मीद है। लेकिन रियल एस्टेट क्षेत्र को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा मिलना चाहिए था। ऐसा होने पर बिल्डरों को आसानी से सस्ता कर्ज मिलने के साथ कुछ और सुविधाएं मिल सकती थी। वैसे बजट में प्रोजेक्ट का कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने वाले बिल्डर को आयकर के पुराने नियमों के तहत प्रोजेक्ट के बिना बिके हिस्से की आय किराए के रुप में दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे थोड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन आयकर अधिनियम की धारा 45 मे नया प्रावधान जोड़ा गया है। इसके तहत बिल्डर किसी संपत्ति को फर्म से हटाकर अपने पास वापस लेता है तो उसे व्यापार के तहत आय मानने का प्रावधान है। इससे बिल्डरों पर बोझ बढ़ेगा।

कृषि क्षेत्र के लिए अधिक आवंटन से फायदे की उम्मीद

रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए बजट में कोई खास घोषणा नहीं है। वित्त मंत्री ने संपत्ति खरीद-बिक्री के मामले में थोड़ी राहत दी है। इसके अलावा कृषि समेत दूसरे क्षेत्रों के लिए अधिक आवंटन का फायदा होने की उम्मीद की जा सकती है। बजट से बिल्डर्स ने काफी उम्मीदें लगा रखी थी। -एन. के गुप्ता, चेयरमैन, मंगलम ग्रुप

बजट प्रस्तावों से अफोर्डेबल हाउसिंग क्षेत्र को फायदा होगा। वित्त मंत्री ने अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए अलग कोष बनाने का प्रस्ताव किया है। कृषि क्षेत्र के लिए अधिक आवंटन का प्रावधान करने से भी बाजार में पैसा आएगा और इसका रियल एस्टेट क्षेत्र को भी लाभ होने की उम्मीद है। -विभिषेक सिंह, निदेशक, यूनिक ग्रुप

रियल एस्टेट को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा नहीं देने से बिल्डर्स निराश है। आयकर प्रावधानों में कुछ राहत दी है। इक्विटी निवेश पर लॉन्ग टर्म केपिटल गेन टैक्स से रियल एस्टेट क्षेत्र को फायदा होने की उम्मीद है। सरकार को बिल्डरों के लिए सामाजिक पेंशन योजना के बारे में भी सोचना चाहिए था। -आत्माराम गुप्ता, चेयरमैन, एआरजी ग्रुप

क्रेडाई ने वित्त मंत्री से होम लोन पर ब्याज पर आयकर छूट सीमा को दो से बढ़ाकर तीन लाख रुपए करने की मांग की थी। लेकिन इस मांग को पूरा नहीं किया गया। यदि सरकार होम लोन ब्याज पर आयकर छूट सीमा बढ़ाती तो, इसका मकान खरीदारों के साथ रियल एस्टेट क्षेत्र को फायदा होता। -हितेष धानुका, निदेशक, धानुका ग्रुप

बजट में रियल एस्टेट क्षेत्र पर ध्यान नहीं दिया गया। यदि सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट को जीएसटी से बाहर और होम लोन की ब्याज दरों में कमी करती तो आम लोगों के साथ रियल एस्टेट क्षेत्र को भी इसका फायदा मिलता। रियल एस्टेट क्षेत्र को बूस्ट करने की जरूरत है। -अजय कृष्ण मोदी, निदेशक, ओके प्लस ग्रुप

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Web Title: रियल एस्टेट को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा नहीं मिलने से बिल्डर निराश
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