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जानवरों पर क्रूरता के खिलाफ कड़ा संदेश

अभिनेता सलमान खान ‘बीइंग ह्यूमन’ यानी मानवीय होने के लिए ख्यात हैं लेकिन, गुरुवार को इस बात की चर्चा थी कि वे ऐसे...

Dainik Bhaskar

Apr 06, 2018, 07:10 AM IST
जानवरों पर क्रूरता के खिलाफ कड़ा संदेश
अभिनेता सलमान खान ‘बीइंग ह्यूमन’ यानी मानवीय होने के लिए ख्यात हैं लेकिन, गुरुवार को इस बात की चर्चा थी कि वे ऐसे मानव हैं, जिन्होंने किसी काले हिरण या किसी एेसे प्राणी की जान ली, जिसे वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 और अन्य कानूनों के तहत संरक्षण प्राप्त है। सलमान खान पर भिन्न अवसरों पर काले हिरण और चिंकारा हिरण का शिकार करने का आरोप था। दोनों खतरे में पड़ी प्रजातियां हैं, जिन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की पहली सूची के अंतर्गत सर्वोच्च संरक्षण दिया गया है। चिंकारे के शिकार का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लेकिन, काले हिरण के मामले में सलमान खान को दोषी पाया गया है और उन्हें 1998 के इस मामले में जोधपुर कोर्ट ने पांच साल कैद की सजा सुनाई है। इस मामले से जुड़े सिनेमा जगत के अन्य सितारों को छोड़ दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ पुख्ता सबूत न होने की वजह से यह निर्णय दिया गया है।

यह फैसला बीस साल लंबी चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है। सलमान पर जोधपुर के पास भगोड़ा की धाणी में दो काले हिरण मारने का आरोप था। यह घटना एक फिल्म की शूटिंग के दौरान 1 व 2 अक्टूबर 1998 की दरमियानी रात को हुई थी। उन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51 के तहत दोषी पाया गया, जिसमें अधिकतम छह साल कैद की सजा का प्रावधान है। ट्रायल कोर्ट में गत 28 मार्च को अंतिम सुनवाई हुई थी, जिसके बाद चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने फैसला सुरक्षित रख दिया था।

दोषी बताए जाने का यह फैसला दर्शाता है कि चाहे आप फिल्म स्टार सलमान खान हों या कोई साधारण नागरिक, कोई भी अदालत तथ्यों पर गौर करती है और कानून की ही विजय होती है। वन्य जीवों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को इस मामले से यह सबक मिलता है कि अब ऐसे मामले हमारे देश में गंभीरता से लिए जाएंगे। और वन्य जीव संबंधी अापराधिक प्रकरण के इस तरह लंबे समय तक खींचते चले जाने की संभावना अब बहुत कम होगी। अापराधियों को समझ लेना चाहिए कि उन पर जल्दी मुकदमा कायम होकर सजा भी जल्दी सुनाई जाएगी। इसी तरह के एक अन्य मामले में महाराष्ट्र के वाशिम जिले के रिसोड तालुके में रहने वाले पवन डांगर ने लंगूर की निर्दयतापूर्वक पिटाई करके उसे मार डाला था। ‘पेटा इंडिया’ ने मामले को उठाया और उसे तुरंत गिरफ्तार किया गया और पांच बार उसकी जमानत की याचिका ठुकरा दी जा चुकी है।

काला हिरण और चिंकारा विलुप्तप्राय प्रजातियां मानी जाती हैं और उन्हें अत्यधिक खतरे में पड़े जीवों की श्रेणी में समझा गया है। इस तथ्य को परे रखकर यह कहना जरूरी है कि वे सारे जानवर जिनका शिकार किया जाता है वे अत्यधिक पीड़ा और यंत्रणा से गुजरते हैं। शिकारी प्राय: प्राणियों को गंभीर रूप से घायल तो कर देते हैं पर उन्हें मारने में नाकाम रहते हैं। ऐसे में जानवर भाग जाता है और फिर धीरे-धीरे खून बहने की वजह से, गैंगरीन होने से अथवा भूख के कारण तड़प-तड़पकर मरता है। शिकार के कारण जानवरों का परिवार तहस-नहस हो जाता है और मादा के मारे जाने पर असंख्य प्राणी निराश्रित हो जाते हैं।

सिर्फ वन्यजीवों को ही हमारे संरक्षण की जरूरत नहीं है। हमारे देश में कुत्तों को जहर दिया जाता है, गायों को एसिड से जला दिया जाता है और देशभर में असंख्य जानवरों को हर दिन प्रताड़ित किया जाता है। अवारा कुत्तों को देखते ही उन्हें यूं ही पत्थर मार देना अथवा गाय अथवा सांड के दिखने पर उन्हें डंडे से पीटना हमारे देश में आम है।

आवारा पशुओं के साथ क्रूरता के साथ पालतू पशु भी कम क्रूरता के शिकार नहीं होते। उसके साथ व्यवहार उसके मालिक की मनस्थिति पर निर्भर होता है और उनके द्वारा घर में नुकसान पहुंचाए जाने पर उनके साथ क्रूरता आम है। मुंबई और देश के अन्य बड़े शहरों में आजकल आप आमतौर पर ऊंची नस्ल के कुत्ते यहां-वहां घूमते देख सकते हैं। यह उन्हें शौक से पालने के लिए लाने के बाद उन्हें घर से बाहर निकाल देने का परिणाम है। घर के सुरक्षित वातावरण में पले-बढ़े कुत्ते जैसे पालतू पशु बाहर के वातावरण में अपने आप को एडजस्ट नहीं कर पाते। उनकी भी मौत दारूण परिस्थितियों में होती है। यह भी जानवरों के प्रति क्रूरता का एक प्रकार है।

इसकी वजह यह है कि जानवरों के प्रति क्रूरता (रोकथाम) अधिनियम 1960 के तहत पहले अपराध के लिए सिर्फ 50 रुपए का जुर्माना है। ऐसे में प्राणियों को प्रताड़ित करने वाले सोचते हैं कि वे जघन्य अपराध करके आसानी से बच निकल सकते हैं लेकिन, यह सच नहीं है। जानवरों के खिलाफ किए गए अपराध के तहत प्राय: भारतीय दंड संहिता की धारा 429 का उल्लंघन होता है, जिसके तहत कैद की सजा का प्रावधान है। इसके तहत पांच साल तक की कैद, जुर्माना अथवा दोनों सुनाए जा सकते हैं। कई अन्य कानून भी प्राय: ऐसे मामले में लागू होते हैं। पेटा इंडिया और हमारे जैसे कई अन्य समूह लगातार पुलिस को इन मामलों के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास करते रहे हैं। हम उन पर दबाव डालते हैं कि वे सारे कानूनों के प्रावधानों का प्रयोग कर जानवरों को प्रताड़ित करने वालों को अधिक सजा दिलवाने की कोशिश करे। हमारी कोशिश है हर शहर में ऐसे विशेष थाने हों जहां पर जानवरों के प्रति क्रूरता की शिकायत की जा सके और शिकायत करने वाले की पहचान भी गोपनीय रखी जा सके।

सलमान खान के बारे में मशहूर है कि वे कुत्तों की बहुत देखभाल करते हैं। अब उम्मीद है कि कम से कम इस अनुभव के बाद वे अपनी दया का दायरा बढ़ाकर उसमें अन्य प्रजातियों के जानवरों को भी लाएंगे। भविष्य में वे अपनी सितारा हैसियत का उपयोग शिकार के खिलाफ और अन्य जानवरों को तकलीफ देने के खिलाफ आवाज उठाने में करेंगे। अभी तो हमें यही विश्वास है कि सलमान खान को मिली सजा उनके प्रशंसकों और देशभर के अन्य लोगों को यह स्पष्ट संदेश देने में कामयाब रही है कि सच में मानवीय होने का मतलब है, सभी जानवरों के प्रति दया व करुणा दिखाना।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

स्वाति संबली

सीनियर लीगल एसोसिएट, पेटा, प्राणी अधिकारों की संस्था

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