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बैंक या ईवॉलेट के जरिए नहीं खरीद सकेंगे बिटकॉइन, रिजर्व बैंक ने लगाई रोक; आरबीआई अपनी डिजिटल करेंसी लाएगा

रिजर्व बैंक ने महंगाई का हवाला देते हुए लगातार चौथी समीक्षा में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन दूसरे कई...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 06, 2018, 07:10 AM IST

बैंक या ईवॉलेट के जरिए नहीं खरीद सकेंगे बिटकॉइन, रिजर्व बैंक ने लगाई रोक; आरबीआई अपनी डिजिटल करेंसी लाएगा
रिजर्व बैंक ने महंगाई का हवाला देते हुए लगातार चौथी समीक्षा में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन दूसरे कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की। इसने बैंकों से कहा कि वे बिटकॉइन जैसी डिजिटल करेंसी खरीदने-बेचने वाले व्यक्तियों और कंपनियों के साथ डीलिंग तत्काल बंद करें। यह निर्देश ईवॉलेट पर भी लागू होगा। यानी बैंक अकाउंट या ईवॉलेट के जरिए कोई बिटकॉइन नहीं खरीद सकता है। रिजर्व बैंक अपनी डिजिटल करेंसी लाने पर विचार कर रहा है। अध्ययन के लिए एक समूह बनाया है जो जून तक रिपोर्ट देगा।

गुरुवार को नए वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आरबीआई के डिप्टी गवर्नर बी.बी. कानूनगो ने बताया कि कई देशों के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी लाने पर चर्चा कर रहे हैं। कागज की करेंसी के साथ ये भी चलन में होंगे। इससे कागजी करेंसी छापने का खर्च कम होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट भाषण में निजी कंपनियों की वर्चुअल करेंसी को अवैध बताया था।

आरबीआई ने भारत में पेमेंट सिस्टम ऑपरेट करने वाली कंपनियों से यहीं डेटा स्टोर करने को कहा है। इसका मकसद यूजर की सूचनाओं की सुरक्षा करना है। अमल के लिए कंपनियों को 6 महीने का वक्त दिया गया है। दिशानिर्देश हफ्ते भर में जारी होंगे। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि अभी चुनिंदा कंपनियां ही आंशिक या पूरा डेटा भारत में स्टोर करती हैं।

आरबीआई ने लगातार चौथी समीक्षा में ब्याज दरें नहीं बदलीं, महंगाई का दिया हवाला, अगस्त 2017 में भी 10 माह बाद की थी 0.25% कटौती

आरबीआई के कदम से लोन की ईएमआई नहीं बदलेगी, पर बैंक ब्याज घटाने-बढ़ाने के लिए स्वतंत्र

मौद्रिक नीति समीक्षा के लिए जाते आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल।

अप्रैल-सितंबर के लिए महंगाई का अनुमान 5.1-5.6% से घटाकर 4.7-5.1% किया

रिजर्व बैंक ने फरवरी की समीक्षा में अप्रैल-सितंबर 2018 के दौरान महंगाई दर 5.1-5.6% रहने का अनुमान व्यक्त किया था। इसे घटाकर 4.7-5.1% कर दिया है। दूसरी छमाही में 4.4% महंगाई दर की उम्मीद है। पुराना अनुमान 4.5-4.6% का था। पहली छमाही में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ेंगे, लेकिन फरवरी-मार्च में कीमतें नीची रहने से महंगाई दर पुराने अनुमान से कम होगी।

ब्याज दर|रेपोरेट 6% और रिवर्स रेपो 5.75% पर बरकार

मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। रेपो रेट 6% और रिवर्स रेपो 5.75% पर बरकार है। रिजर्व बैंक जिस ब्याज दर पर बैंकों को कर्ज देता है उसे रेपो और जिस रेट पर उनसे पैसे लेता है उसे रिवर्स रेपो कहते हैं। कच्चे तेल के दाम, सरकार का घाटा और अनाज के दाम बढ़ने के कारण आरबीआई महंगाई को लेकर अनिश्चित है। गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अगस्त 2017 से ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। समिति के 6 में से 5 सदस्यों ने दरें यथावत रखने के पक्ष में वोट दिया। सिर्फ आरबीआई के ईडी माइकल पात्रा दरें 0.25% बढ़ाने के पक्ष में थे। अगली समीक्षा 5-6 जून को होगी।

बैंक कर्ज और जमा पर ब्याज दरें बढ़ाने या घटाने के लिए स्वतंत्र: रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरें यथावत रखने का मतलब है कि होम लोन और ऑटो लोन की ईएमआई पर फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि बैंक अपनी तरफ से कर्ज और जमा पर ब्याज दरें बढ़ाने या घटाने के लिए स्वतंत्र हैं। क्रिसिल और इक्रा को ब्याज दरों में छह महीने तक बदलाव की उम्मीद नहीं है।

0.25%

रेपो रेट बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया ईडी माइकल पात्रा ने

नए अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के लिए बैंकों को और एक साल, अप्रैल 2019 से लागू होगा

नया इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड लागू करने के लिए आरबीआई ने बैंकों को और एक साल का वक्त दे दिया है। बैंकों को इसे 1 अप्रैल 2018 से ही लागू करना था। डिप्टी गवर्नर एन.एस. विश्वनाथन ने बताया, रिजर्व बैंक का आकलन है कि बहुत से बैंक अभी नए मानकों के लिए तैयार नहीं हैं।

जीडीपी|इसवर्ष ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7.4% किया

आरबीआई ने कहा है कि इस साल इकोनॉमी में निवेश बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। कैपिटल गुड्स का उत्पादन बढ़ रहा है और ग्लोबल डिमांड में बढ़ोतरी हो रही है। इसलिए जीडीपी ग्रोथ रेट पिछले साल के 6.6% की तुलना में 7.4% रहने की उम्मीद है। पहली छमाही में ग्रोथ रेट 7.3-7.4% और दूसरी छमाही में 7.3-7.6% तक रहेगी। संसद में 29 जनवरी को पेश इकोनॉमिक सर्वे में इस साल 7-7.5% ग्रोथ का अनुमान जताया गया था।

इकोनॉमी आकलन के तरीके पर सरकार से मतभेद: रिजर्व बैंक देश की अर्थव्यवस्था को जीडीपी में ही मापेगा, जीवीए में नहीं। डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा कि सभी प्रमुख देश जीडीपी में ही इकोनॉमी का आकलन करते हैं, इसीलिए यह फैसला किया गया है। सरकार ने जनवरी 2015 में जीवीए का तरीका शुरू किया था। यह उत्पादन यानी सप्लाई के नजरिए से आर्थिक गतिविधियों को बताता है। जीडीपी डिमांड का संकेतक है। सरकार का तर्क था कि जीडीपी में इकोनॉमी की सही स्थिति का पता नहीं चल पाता है।

7.30%

रह सकती है इकोनॉमी की विकास दर अप्रैल-सितंबर छमाही में

रिजर्व बैंक की घोषणाओं से शेयर बाजार में उत्साह का माहौल रहा। बीएसई का सेंसेक्स 577.73 अंकों की तेजी के साथ 33,596.80 पर और एनएसई का निफ्टी 196.75 अंक बढ़कर 10,325.15 पर बंद हुआ। एक दिन पहले आरबीआई ने दिवालिया कार्रवाई से गुजरने वाली करीब 40 कंपनियों के कर्ज की प्रोविजनिंग में छूट देने की घोषणा की थी। इससे भी बैंकिंग इंडेक्स में 2.78% की बढ़त रही।

रिजर्व बैंक की घोषणाओं से शेयर बाजार में उत्साह, सेंसेक्स 578 अंक उछला

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