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पिछले महीनों में मंदी की वजह से कपड़ों का निर्यात बुरी तरह से प्रभावित रहा

आगामी वैवाहिक सीजन के लिए कपड़ा बाजारों में जोरदार ग्राहकी चल रही है। उत्पादक सेंटरों पर कपड़ों के भाव में वृद्धि की...

Dainik Bhaskar

Apr 06, 2018, 07:10 AM IST
आगामी वैवाहिक सीजन के लिए कपड़ा बाजारों में जोरदार ग्राहकी चल रही है। उत्पादक सेंटरों पर कपड़ों के भाव में वृद्धि की गई है, किंतु लोकल बाजारों में भाव वृद्धि का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। सूरत में कई राज्यों के व्यापारी खरीदी के लिए उतरने लगे हैं। रेडी स्टॉक का माल लेकर चल रहे हैं। कॉटन, कोर्स काउंट, फाइन काउंट के भावों में तेजी आई है। गर्मी का सीजन शुरू होने से केम्ब्रिक, हरक, लॉग क्लाथ कपड़ों में मांग बढ़ने लगी है। ई-वे बिल का ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर प्रभाव पड़ा है। ठहरो और देखो की नीति का अनुसरण कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में हलकी किस्म की लेन-देन की साड़ियों में अच्छी मांग बनी हुई है। मंदी की वजह से कॉटन, पोलिस्टर, कपड़ों के निर्यात में गिरावट आई है। निर्यात में जनवरी 2018 तक 13 प्रतिशत की गिरावट रही।

उत्पादक क्षेत्रों में तेजी

आगामी अक्षय तृतीया पर वैवाहिक लग्न बड़ी मात्रा में होंगे। इस वजह से बाजारों में ग्राहकी अच्छी मात्रा में चल रही है। आगामी कुछ दिनों तक बनी रहेगी। अक्षय तृतीया के बाद ग्राहकी कुछ कमजोर पड़ सकती है। मई में मुहूर्त कम है जब कि जून में अधिक मात्रा में मुहूर्त बताए जा रहे हैं। हालांकि उत्पादक क्षेत्रों में भाव बढ़ाकर बोले जा रहे हैं, किंतु बाजार इस तेजी को पचा नहीं पा रहा है। पुराने भावों पर ही बाजारों में कपड़ों की बिक्री हो रही है। बाजार धन की तंगी से ग्रस्त है, पिछले दिनों कुछ राज्यों में अशांत वातावरण बन गया था, यह वातावरण अभी शांत भी नहीं हुआ है। 1 अप्रैल से ई-वे बिल लागू हो गया है, उसका प्रभाव कुछ मात्रा में तो पड़ा है, किंतु 100 प्रतिशत प्रभाव पड़ता नजर नहीं आ रहा है।

पानी की कमी

पिछले सीजन में देश के कई राज्यों में वर्षा कम होने से गर्मी के सीजन में प्रोसेस-हाउस को पानी के संकट से गुजरना पड़ सकता है। कुछ राज्यों में अभी से प्रोसेस-हाउस पानी की कमी से जूझ रहे हैं। प्रोसेस दर बढ़ाने की घोषणा करते रहते हैं, किंतु काम इतना कम मिलता है कि वे दरें बढ़ाना ही भूल जाते हैं। अनेक जगह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कठोर होने से भी काम कम हो गया है। अभी तो गर्मी की शुरुआत है। देश के कई बांधों एवं नदियों में पानी नहीं है जिसका प्रभाव दैनिक उपयोग में आने वाले पानी पर भी पड़ेगा। इस गर्मी में कई राज्यों को पानी के संकट से जूझना पड़ेगा।

निर्यात में गिरावट

कपड़ा उद्योग में मंदी की वजह से कॉटन जैसे कपड़ों के निर्यात में गिरावट के साथ पॉलिस्टर कपड़ों का निर्यात भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। हालांकि केंद्र सरकार इस संबंध में गंभीर लग रही है, इसलिए कपड़ा मार्केट के विकास के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। सीआईटीआई की हाल ही की रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ पॉलिस्टर कपड़ों का निर्यात घटा ऐसी बात नहीं है वरन कॉटन कपड़ा और गारमेंट का निर्यात भी जनवरी 2018 तक 13 प्रतिशत घटा है। मैनमेड टेक्सटाइल के निर्यात में 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

आगामी वैवाहिक सीजन के लिए कपड़ा बाजारों में जोरदार ग्राहकी व भाव स्थिर

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