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भाजपा राज में अकाल प्रभावित क्षेत्रों की गोशालाओं को भी सरकारी अनुदान बंद

मनोज शर्मा. जयपुर | केंद्र एवं राज्य में, भाजपा की सरकार होने के बावजूद गौशालाओं में मौजूद 6 लाख से अधिक छोटे-बड़े गौ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 06, 2018, 07:15 AM IST

भाजपा राज में अकाल प्रभावित क्षेत्रों की गोशालाओं को भी सरकारी अनुदान बंद
मनोज शर्मा. जयपुर | केंद्र एवं राज्य में, भाजपा की सरकार होने के बावजूद गौशालाओं में मौजूद 6 लाख से अधिक छोटे-बड़े गौ वंश पर बड़ा संकट आ गया है। केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन में सिर्फ उसी गौ वंश के लिए गौशालाओं को सहायता दी जाएगी, जिन पशुओं की एंट्री 16 नवंबर के बाद से गौशालाओं में हुई है। इनमें शर्त लगा दी गई है कि सिर्फ लघु एवं सीमांत कृषकों की ओर से छोड़े गए पशुओं को ही यह सहायता देय होगी। केंद्र सरकार की इस नई गाइडलाइन से अकाल प्रभावित इलाकों की 1700 गौशालाओं के करीब 6 लाख पशुओं पर सीधा असर पड़ेगा। इससे नाराज गौशाला संचालकों ने सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है। उधर, राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से गाइडलाइन में बदलाव का आग्रह किया है। ताकि, पहले की भांति गौशालाओं में मौजूद सभी पशुओं के लिए सहायता उपलब्ध करवाई जा सके। अकाल प्रभावित क्षेत्रों में प्रति बड़े पशु 70 रुपए और छोटे पशु 35 रुपए प्रतिदिन का अनुदान दिया जाता है। वहीं, बड़े पशु के एक किलो और छोटे पशु के लिए आधा किलो पशु आहार के लिए अनुदान देय होता है। राज्य सरकार ने गत 16 नवंबर को बारिश की कमी, सतही जल के अभाव एवं भूजल की उपलब्धता में कमी, फसलों की कमजोर स्थिति एवं रिमोट सेंसिंग को ध्यान में रखते हुए 13 जिलों की 41 तहसीलों के 4151 गांवों को अभावग्रस्त घोषित किया था। केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन से इन अकाल प्रभावित गांवों की गौशालाओं को पशु शिविर तो मान लिया जाएगा, लेकिन उनमें मौजूद पशुओं को सहायता नहीं दी जाएगी। इसलिए, मामूली पशुधन को ही इसका फायदा मिल सकेगा। गौरतलब है कि गौ पालन विभाग के सर्वे के अनुसार प्रदेश की 2562 गौशालाओं में 8 लाख 58 हजार 960 पशु मौजूद हैं। इनमें से अकाल प्रभावित 13 जिलों की 1682 गौशालाओं में 5 लाख 86 हजार 257 छोटे-बड़े गौ वंश मौजूद हैं। श्री राजस्थान गोसेवा समिति जयपुर के अध्यक्ष महंत दिनेश गिरी ने राज्य सरकार से सात दिन में संशोधित आदेश जारी करने का आग्रह किया है। अन्यथा गोशाला संचालकों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।

नाराजगी की 3 बड़ी वजह

पिछले साल तक गौशालाओं में पहले से मौजूद गायों को भी अनुदान दिया जाता रहा है। केंद्र एवं राज्य में भाजपा सरकार है बावजूद अनुदान बंद कर दिया गया। गौशाला संचालकों पर संकट आ गया है।

सरकार ने शर्त रख दी कि 16 नवंबर के बाद आने वाले पशुओं में भी सिर्फ लघु एवं सीमांत कृषकों की ओर से छोड़े गए पशुओं को ही अनुदान दिया जाएगा। पशु ऐसे पहचान कैसे हो सकेगी?

राजफैड या आरसीडीएफ के माध्यम से पशु आहार खरीदने की बाध्यता भी उचित नहीं है। वहीं, पशुओं के बारे में शपथ पत्र मांगा जा रहा है। वीडियोग्राफी करवाई जा रही है। यह सब ठीक नहीं है।

13 जिलों की 41 तहसीलों के 4151 गांव अभावग्रस्त

बाड़मेर के 1717, जैसलमेर के 645, सवाई माधोपुर के 424, जयपुर के 328, जोधपुर के 193, भीलवाड़ा के 191, चूरू के 174, हनुमानगढ़ के 141, झुंझुनूं के 131, डूंगरपुर के 106, बीकानेर के 52, श्रीगंगानगर के 25 एवं नागौर के 24 गांव शामिल हैं।

अब तक सबको मिलता था अनुदान

राज्य सरकार का मानना है कि अभावग्रस्त जिलों की गौशालाओं में संरक्षित पशुओं को भी अकाल राहत के तहत सहायता प्रदान की जा रही थी। लेकिन, वर्ष 2016 की नई गाइडलाइन में अब इसे बंद कर दिया गया है। गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने भी केंद्र सरकार को गाइडलाइन में बदलाव का आग्रह किया है।

सूखा प्रभावित क्षेत्रों की गौशालाओं में नवंबर के बाद आने वाले गौ वंश के हिसाब से ही अनुदान देय होगा। पहले से मौजूद गायों के लिए अनुदान नहीं दिया जाएगा। केंद्र सरकार की ऐसी स्पष्ट गाइडलाइन है। पिछली बार भी करीब 150 करोड़ रुपए केंद्र ने नहीं दिए। हमने केंद्र सरकार से रियायत की मांग की है। -हेमंत गेरा, सचिव, आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग, जयपुर

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