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ऐसा जीवन जीएं जिसकी कोई सीमा न हो

स्टोरी 1 : कोलकाता के नज़दीक सोनापुर की 23 वर्षीय अपर्णा माल और मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में उसके जैसी सैकड़ों लड़कियों...

Dainik Bhaskar

Apr 06, 2018, 07:15 AM IST
ऐसा जीवन जीएं जिसकी कोई सीमा न हो
स्टोरी 1 : कोलकाता के नज़दीक सोनापुर की 23 वर्षीय अपर्णा माल और मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में उसके जैसी सैकड़ों लड़कियों में स्थान और ज़िद के दो फर्क हैं। अपर्णा अपने छिंदवाड़ा के हमउम्रों की तरह स्कूल में पढ़ाई छोड़ने वाली लड़की है और आर्थिक रूप से कमजोर अपने परिवार को सहारा देने के लिए उतनी ही बेचैन है। छिंदवाड़ा की बहुत सारी युवतियां टेली-कॉलिंग जॉब में पहला प्रयास करती हैं और उन्हें अहसास होता है कि वे पर्याप्त भुगतान नहीं करते। फिर वे बेचैनी के साथ एक-दो हुनर सीखने की कोशिश करती हैं। छिंदवाड़ा की कई युवतियां तीन महीने तक की अल्पावधि के नि:शुल्क कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नामांकन कराती हैं लेकिन, हुनर में महारत हािसल करने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम को आगे नहीं बढ़ातीं।

अपर्णा ने भी ठीक यही किया। उसने लगभग दो वर्ष तक टेली-कॉलर का काम किया, जहां उसे इतना वेतन नहीं दिया जाता था कि वह पति से अलग हो चुकी अपनी मां के आर्थिक बोझ को हल्का कर सके। उसने हताशा में टेलरिंग कोर्स के लिए भी नामांकन कराया। महारत हासिल करने के लिए उसने खुद को दो साल दिए। आज उनके प्रशिक्षकों को उसमें इतनी प्रतिभा दिखाई दी कि इस जुलाई में सियोल में होने वाली फैडरेशन ऑफ एशिया मास्टर टेलर्स की 27वीं कांग्रेस और अगले साल वेरोना में होनी वाली 38वें वर्ल्ड फैडरेशन ऑफ मास्टर टेलर्स में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली है।

28 फरवरी, 2018 को सोनापुर की इस लड़की ने मुंबई में ‘कौन बनेगा मास्टर स्टाइलिस्ट कंपीटिशन’ में कल्पनाशीलता और टेक्नीक की झलक दिखाई। जहां उसकी बनाई एसिमेट्रिक चॉकलेट-एंड-ब्लैक शेरवानी को देखकर जज दंग रह गए। चार जोन से अंतिम दौर में पहुंचे 40 प्रतियोगियों में जमशेदपुर के वरिष्ठ प्रतियोगी शमसाद के बाद अपर्णा दूसरे स्थान पर आई। अपर्णा और शमसाद दुनिया की श्रेष्ठ प्रतिभाओं से मुकाबला करेंगे।

सोनापुर से सियोल तक की यात्रा आसान नहीं रही। दो साल तक अपर्णा एक तरफ जाने के लिए दो ट्रेनों, एक बस की सवारी और फिर पैदल चलकर घर से प्रशिक्षण संस्थान पहुंचती थी। अपर्णा कभी मूवी थिएटर नहीं गई लेकिन, वह न सिर्फ शाहिद कपूर की ड्रेस बना रही है बल्कि उनकी फिल्म के प्रीमियर में जाना भी उसकी ज़िंदगी की एक हसरत है। उस बड़े सपने ने उसकी ज़िद को बनाए रखा। अब वह सिलाई के हर एक टांके के साथ अपना कॅरिअर निर्मित कर रही है।

स्टोरी 2 : ओएनजीसी से रिटायर इंजीनियर वडोदरा के 74 वर्षीय मोहनलाल पी. चौहान और उनकी 67 वर्षीय प|ी लीलाबेन ने खुद को मॉर्निग वॉक तक सीमित नहीं रखा है! अभिभावक के रूप में अपने कर्तव्य पूरे करने के बाद उन्होंने ज़िंदगी का आनंद लेने का फैसला! बचत के पैसे से वे अपनी 1974 की विंटेज रॉयल एनफील्ड बाइक वे 18 जनवरी, 2018 को 16,000 किलोमीटर की बाइक सवारी पर निकले हैं, जिसके दौरान पेट्रोल, भोजन और होटल में ठहरने पर 7 लाख रुपए खर्च आएगा। चौहान बाइक की साइड कार में सवार लीलाबेन के साथ रोज सुबह 8 बजे से दोपहर बाद 4 बजे तक 200 किलोमीटर की दूरी तय करते हैंै,जबकि कई लोग सोचते हैं कि यह उम्र एडवेंचर करने की नहीं होती। चौहान ने इस ट्रिप के लिए दस माह तक रिसर्च की। दोनों नए शहर, लोग और संस्कृतियों का अनुभव लेना चाहते हैं।

फंडा यह है कि  खुद को ऐसे वाक्यों से सीमित न करें कि मैं गरीब हूं या मैं बूढ़ा हूं। अपनी क्षमताओं को विस्तार दीजिए और सीमाहीन ज़िंदगी जीएं!

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें FUNDA और SMS भेजें 9200001164 पर

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

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