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अपनी ऊर्जा के उपयोग में जागरूकता रखें

हमारे पास सीमित ऊर्जा होती है। अपने काम-काज के सिलसिले में कई लोगों से मिलना पड़ता है। उनमें से कुछ आपको सुलझाते...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 10, 2018, 05:00 AM IST

हमारे पास सीमित ऊर्जा होती है। अपने काम-काज के सिलसिले में कई लोगों से मिलना पड़ता है। उनमें से कुछ आपको सुलझाते हैं, कुछ उलझन में डालते हैं। अपनी ऊर्जा का उपयोग करने में जागरूकता रखनी पड़ेगी। कुछ लोग ऐसे भी होंगे, जो आपकी ऊर्जा को निचोड़ लेंगे और आपके हाथ कुछ नहीं लगेगा। अंगद रावण से बात करते समय कहते हैं चौदह लोगों को मैं मुर्दे के समान समझता हूं और मुर्दों से क्या उलझना? इस संवाद पर तुलसीदासजी ने लिखा है- ‘जौं अस करौं तदपि न बड़ाई। मुएहि बधें नहिं कछु मनुसाई।। कौल कामबस कृपिन बिमूढ़ा। अति दरिद्र अजसी अति बूढ़ा।। सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमुख श्रुति संत बिरोधी।। तनु पोषक निंदक अघ खानी। जीवत सव सम चौदह प्रानी।। अंगद कहते हैं- मरे हुए को मारने में कोई पुरुषत्व नहीं है। वाममार्गी, कामी, कंजूस, अत्यंत मूढ़, बहुत दरिद्र, बदनाम, अत्यधिक बूढ़ा, नित्य का रोगी, सदैव क्रोध करने वाला, भगवान से विमुख, वेद और संतों का विरोधी, अपना ही शरीर पोषित करने वाला, दूसरों का निंदक और महापापी, ये चौदह प्राणी जीते जी मुर्दे के समान हैं। यह सोचकर ही मैं तुझसे नहीं उलझ रहा हूं। यहां अंगद के माध्यम से बताया गया है कि हमें इन 14 प्राणियों को बड़ी सावधानी से अपने जीवन में प्रवेश करने देना चाहिए। जब भी ऐसे लोग सामने आएं, अपनी ऊर्जा बचाएं और आगे बढ़ चलें, क्योंकि बहुत से काम ऐसे हैं जो इस प्रकार की वृत्ति के लोगों को दूर रखकर ही किए जा सकते हैं।

जीने की राह कॉलम पं. विजयशंकर मेहता जी की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें JKR और भेजें 9200001164 पर



पं. िवजयशंकर मेहता

humarehanuman@gmail.com

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