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महिला खिलाड़ियों से रोशन होता भारतीय खेल जगत

हिंदुस्तानी खेल लगातार नया कौशल और आत्मविश्वास हासिल कर रहा है और क्रीड़ा क्षितिज पर नई प्रतिभाओं का उदय हो रहा है।...

Dainik Bhaskar

Apr 10, 2018, 05:00 AM IST
हिंदुस्तानी खेल लगातार नया कौशल और आत्मविश्वास हासिल कर रहा है और क्रीड़ा क्षितिज पर नई प्रतिभाओं का उदय हो रहा है। इस बात को राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की महिला खिलाड़ी दमदारी के साथ साबित कर रही हैं। वे घरेलू खींचतान और लैंगिक असमानता की बाधाएं तोड़कर भारत का नाम रोशन कर रही हैं। राष्ट्रमंडल खेलों के टेबल टेनिस मुकाबले में सिंगापुर जैसी मजबूत टीम को हराना वैसा ही है जैसे ओलिंपिक में चीन को परास्त करना। भारतीय कोच मसिमो कांस्तैंतिनी को लगता था कि भारतीय टीम तो सिंगापुर टीम की प्रशंसक (फैन) टीम है न कि प्रतिस्पर्धी। इस धारणा को ध्वस्त करते हुए भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्टा में मणिका बत्रा और मौमा दास के सहारे वह कमाल कर दिया, जिस पर हम नाज कर सकते हैं। 2006 में पुरुषों की टीम को स्वर्ण मिला था। महिला टीम तो 2002 से ही इंतजार कर रही थी। इस जीत ने मणिका को भी हैरत में डाल दिया, क्योंकि वे जब भी सिंगापुर की यिहान झाउ से खेलती थीं तो हार ही नसीब होती थी। अकेले दम पर सर्वाधिक प्रशंसनीय उपलब्धि तो मनु भाकर की है जिन्होंने 10 मीटर की एअर पिस्टल निशानेबाजी में स्वर्णपदक जीता। भारत की सबसे कम उम्र की स्वर्ण पदक विजेता भाकर महज 16 वर्ष की हैं। झज्जर की यह खिलाड़ी इतनी अल्हड़ है कि मेडल जीतने के बाद उसे अपने बिस्तर के सिरहाने रखकर टेबल टेनिस खेलने में लग गई। इसीलिए कोच जसपाल राणा मानते हैं कि ऊर्जा और प्रतिभा से भरपूर भाकर भारत के लिए बड़ी संभावना हैं। पूनम यादव ने भी 222 किलो का वजन उठाकर न सिर्फ इंग्लैंड की सराह डेविस को हराया है बल्कि भारत की झोली में स्वर्ण पदक डालकर देश को खेल के स्तर पर ऊंचा उठाया है। साइना नेहवाल ने हमेशा की तरह अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज की है। महिला खिलाड़ियों की यह उपलब्धियां पुरुष खिलाड़ियों को प्रेरणा देने वाली हैं। यह सारी उपलब्धियां तब हासिल की गई हैं, जब भारतीय खेल तमाम तरह की राजनीति का शिकार है और इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन ने खेल गांव में रहे भारतीय खिलाड़ियों के लिए आचार संहिता की लंबी चौड़ी सूची जारी की है। इसमें चोरी, शराब, जुआ और यौन दुराचार से बचने की हिदायत दी गई है। बिखराव, कमजोरी और आशंका के विपरीत वातावरण में खिलाड़ियों की उपलब्धियां भारत का माथा ऊंचा करने वाली हैं।

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