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खरीफ की फसल को कीट-कीड़ों से बचाना है तो अभी जुताई कर खाली छोड़ दें खेत

खरीफ की फसल को कीट और कीड़ों से बचाना है और अच्छी उत्पादकता कायम रखनी है, तो खेत की अप्रैल में एक बार जुताई करें। इस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 10, 2018, 05:05 AM IST

खरीफ की फसल को कीट और कीड़ों से बचाना है और अच्छी उत्पादकता कायम रखनी है, तो खेत की अप्रैल में एक बार जुताई करें। इस दौरान पड़ने वाली गर्मी और बढ़ते तापमान से खेत में मौजूद हानिकारक कीट और कीड़ों के साथ सूत्रकृमियों का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाएगा। सिंचित क्षेत्र में रबी की फसल की कटाई के तुरंत बाद इस प्रक्रिया को प्राथमिकता से करना चाहिए, ताकि इसके अवशेष जमीन में समा जाएं और खाद के समान काम करें। यह न सिर्फ खरीफ की बाजरा, मूंग, मोठ और तिल-मूंगफली की फसल के लिए उपयोगी होगा, बल्कि यह उद्यानिकी से जुड़ी फल-सब्जी की फसल के लिए भी उपयोगी होगा।

गहरी जुताई से ये होगा फायदा : दुर्गापुरा स्थित राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान के सहायक प्रोफेसर डॉ. रिद्धिशंकर शर्मा का कहना है कि अप्रैल के महीने में खेत की जुताई करना खेत को नयापन देने के समान होता है। गहरी जुताई करने से जमीन में मौजूद सूत्रकृमि कम हो जाते हैं। अप्रैल में पड़ने वाली तेज गर्मी सूत्रकृमि बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। हानिकारक कीड़े भी मर जाते हैं और इससे फसल पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव कम हो जाता है। जुताई से जमीन पोली हो जाती है और बारिश आते ही पानी भूमि के अंदर तक बिना रुकावट जा सकता है। रबी या अन्य पहले कोई अन्य बुआई की हुई हो, तो उसके अवशेष जमीन के अंदर घुलमिल कर खाद का काम करेंगे। ऐसे अवशेषों को जलाना नहीं चाहिए। जुताई से खेत में मौजूद अन्य अनावश्यक पेड़-पौधे भी खत्म किए जा सकते हैं।

गोबर नहीं डालें

डॉ. रिद्धिशंकर शर्मा का कहना है कि जुताई के तत्काल बाद खेत में गोबर की खाद नहीं डालें। गर्म तापमान के चलते गोबर की खाद में विद्यमान जरूरी पोषक तत्व फास्फोरस, पोटाश व माइक्रोन्यूट्रेंट नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में किसानों को गर्मी में गोबर की खाद खेत में नहीं डालनी चाहिए। उन्होंने बताया कि किसानों को मानसून आने से 7 या 10 दिन पहले ही गोबर की खाद डालनी चाहिए, ताकि पहली बारिश या उससे पहले आद्रता के चलते मिट्टी में घुल जाए।

उद्यान में फल-सब्जी के लिए : डॉ. शर्मा ने बताया कि जो किसान रबी की फसल के बाद फलदार पौधे लगाने के इच्छुक हैं, वे इसी दौरान उचित दूरी बनाए रखते हुए गड्‌ढे खोदकर छोड़ दें। इससे भूमि में पहले से मौजूद जीवाणु या कीड़े मर जाएंगे और सूत्रकृमि कम हो जाएंगे। बारिश आने के बाद किसान इन गड्‌ढों में फल वाले पौधे लगा सकते हैं।

जायद की खेती में करें स्प्रे : जायद की फसल लेने वाले किसानों को सब्जी या मूंग व मूंगफली में लगने वाले कीड़ों और कीट से बचाने के लिए क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञों की ओर से दी गई सलाह के अनुसार कीटनाशक का स्प्रे करना चाहिए। छिड़काव के बाद विभाग द्वारा बताए गए समय के बाद ही फल या सब्जी की तुड़ाई करनी चाहिए। मुख्य रूप से तरबूज और खरबूज की खेती करने वाले किसान फल मक्खी से बचने के लिए उचित कृषि कार्य करें।

माउंट आबू में बनेगा फूलों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, पर्यटकों को सिखाएंगे खेती

जयपुर|
राजस्थान में एग्रो टूरिज्म को प्रोत्साहित करने के लिए माउंट आबू में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जा रही है। एग्रो टूरिस्ट एंड फ्लोवर रिसर्च सेंटर के नाम से शुरू होने वाले इस सेंटर में माउंट आबू आने वाले पर्यटकों को फूलों की खेती के बारे में जानकारी भी दी जाएगी। कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी ने बताया कि माउंट आबू में सनसेट पॉइंट के निकट इस सेंटर के लिए जगह चिन्हित की गई है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस काम के लिए पीडीकोर का चयन करने का प्रस्ताव है। मई में वहां काम शुरू हो जाएगा और 4-5 माह में सेंटर विकसित हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस सेंटर में खासतौर से फूलों की खेती जाएगी। यहां बर्ड्स पैराडाइज, लिलियम, ट्यूलिप, रजनीगंधा, आर्किड्स, चरबेरा सहित अन्य आकर्षक फूलों को उगाया जाएगा। इनके साथ ही जैतून, खजूर, क्विनोवा आदि भी उगाए जाएंगे। यहां लैंड स्केप बनाने के साथ पेड़ों से यहां विभिन्न तरह की आकृतियां भी तैयार करवाई जाएंगी, जो पर्यटकों के लिए खासतौर से आकर्षण का केंद्र रहेंगी। फूलों की खेती सीखने के लिए आने वाले पर्यटकों के रहने के लिए यहां 20-25 टैंट भी लगाए जाएंगे। इस सेंटर में स्थित नाले में रंगरंगीली मछलियां भी डाली जाएंगी, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इस सेंटर को उद्यान विभाग संचालित करेगा।

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