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किसान महापंचायत ने सरकार को सात दिन में मांगें मानने का दिया अल्टीमेटम

पॉलिटिकल रिपोर्टर.जयपुर। राज्य में सभी प्रकार की कृषि उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर उनकी खरीद की गारंटी...

Dainik Bhaskar

Apr 09, 2018, 07:00 AM IST
पॉलिटिकल रिपोर्टर.जयपुर। राज्य में सभी प्रकार की कृषि उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर उनकी खरीद की गारंटी के लिए कानून बनाने की मांग किसान महापंचायत ने उठाई है। नए कानून में ग्रामीण स्तर पर सालभर खरीद केंद्र संचालित करने के लिए स्थाई तंत्र विकसित करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे भावों पर फसलों की बिक्री को रोकने व कृषि उपजों के लिए आयात-निर्यात निधि का संचालन राज्यों को सौंपे जाने जैसे प्रावधान किए जाने की मांग रखी गई है। किसान नेता रामपाल जाट की तरफ से मुख्य सचिव, कृषि विभाग के अधिकारियों, नेफेड एवं राजफेड को एक नोटिस भी भेजा है। जिसमें कहा गया है कि सात दिन में सरकार ने किसानों की बात नहीं मानी तो हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।

किसानों का कहना है कि वर्ष 2017-18 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बाजरा एवं मक्का की खरीद प्रारंभ करने की व्यवस्था ही नहीं थी। इसकी वजह से बाजरा 900 से 1100 रुपए प्रति क्विंटल पर बेचना पड़ा। जबकि, समर्थन मूल्य 1425 रुपए प्रति क्विंटल था। इसी तरह मक्का के दाम भी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की तुलना में 1200 रुपए प्रति क्विंटल से भी कम मिले। यही नहीं मूंग, मूंगफली, उड़द एवं सोयाबीन की खरीद घोषणा के साथ ही प्रारंभ कर देनी चाहिए थी। लेकिन, किसानों को औने-पौने दामों में उपज बेचनी पड़ी। गारंटेड न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित करने के लिए भारत सरकार एवं राजस्थान सरकार किसानों को हुए घाटे की आपूर्ति सात दिन में करे। इसके तहत कृषि उपजों की भविष्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने की समुचित व्यवस्था करने की भी मांग की गई है। सरकार को कानून बनाते समय भावांतर भुगतान योजना प्रारंभ करने एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य से बाजार भाव नीचे नहीं आवे, ऐसे प्रावधान करने चाहिए। ताकि, किसानों को नुकसान नहीं उठाना पड़े। उन्हें उपज का पूरा फायदा मिल सके।

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