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योग्यता विवाद में फंसे 10% लेक्चरर्स एसोसिएट प्रोफेसर की दौड़ से बाहर हुए

कॉलेज शिक्षा में लेक्चर्स का पदनाम एसिसटेंट प्रोफेसर करते हुए पहली बार हो रही सीएएस के प्रमोशन में 2010 और 2016 का...

Danik Bhaskar | Apr 09, 2018, 07:00 AM IST
कॉलेज शिक्षा में लेक्चर्स का पदनाम एसिसटेंट प्रोफेसर करते हुए पहली बार हो रही सीएएस के प्रमोशन में 2010 और 2016 का स्कोरिंग नियम बाधा बन रहा है। विवाद कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के प्रमोशन में योग्यता का है। उच्च शिक्षा विभाग ने 11 जुलाई 2016 के यूजीसी गजट नोटिफिकेशन को प्रमोशन का आधार बनाया है। जबकि आयुक्तालय के 10 प्रतिशत शिक्षक ऐसे है जो कि वर्ष 2013 में ही पुराने नियमों के अनुसार एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए एलिजिबल हो गए थे। लेकिन अब 2016 के नियम- मापदंड पूरे नहीं कर पा रहे हैं । शिक्षकों का तर्क है 2013 में प्रभावी 2010 की यूजीसी गाइड लाइन के अनुसार मापदंड के अनुसार स्कोर किया था। भले ही अब मापदंड बदल चुके है लेकिन सरकारी विश्वविद्यालयों में कई प्रमोशन केस में ये उदाहरण है कि जिस समय प्रमोशन के दावेदार बनें, तभी के रूल्स और क्राइटेरिया फॉलो हुए है। उधर प्रमोशन की दौड़ से खुद को बाहर होता देख इन 10 प्रतिशत यानी की पौने चार सौ से ज्यादा शिक्षकों ने विभाग में विवाद खड़ा कर दिया है। इसी विवाद और इन्हीं शिक्षकों के दबाव में कॉलेज निदेशालय ने प्रमोशन आवेदन की अंतिम तिथि 7 अप्रेल से बढ़ाकर 18 अप्रेल कर दी है।

एपीआई स्कोर में बदलाव

2013 के नियम अनुसार शिक्षक को प्रमोशन में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस और नेशनल कान्फ्रेंस या सेमीनार के 10 से 15 अंक, रीजनल कॉन्फरेंस के 7.5 अंक और लोकल लेवल पर 5 अंक मिलते है। वर्ष 2016 के संशोधित नियम अनुसार कॉन्फ्रेंस के अंक देने के नियम में बदलाव आया और प्रतिदिन के 0.8 अंक काउंट हुए। यानी कि शिक्षक को दो दिन का 1.6 और तीन दिन का 2.4 ही मिलेगा। साथ ही 15 अंकों की अधिकतम सीमा भी तय हुई।

आगे क्या विवाद का ये हो सकता है समाधान

अगर राज्य सरकार यूजीसी के नवंबर 2014 में जारी पब्लिक नोटिस को मानेगी ताे अभी प्रमोशन से वंचित हो रहे 10 प्रतिशत शिक्षक सीएएस के तहत प्रमोशन के दावेदार बनेंगे। इस पब्लिक नोटिस में कहा गया है कि इंटरव्यू की डेट प्रमोशन का आधार नहीं है। जिस दिन प्रमोशन ड्यू हुआ है। उसी तिथि काे प्रमोशन का आधार माना जाएं।