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12 वर्ष पुराने टेलीमेडिसिन सेंटर पर लगा ताला...कभी 125 मरीज रोज उठाते थे लाभ

प्रदेश के 32 जिलों के लाखों मरीजों को उन्हीं के क्षेत्र में तुरंत और बेहतर इलाज देने के लिए शुरू की गई टेलीमेडिसिन...

Danik Bhaskar | Apr 09, 2018, 07:00 AM IST
प्रदेश के 32 जिलों के लाखों मरीजों को उन्हीं के क्षेत्र में तुरंत और बेहतर इलाज देने के लिए शुरू की गई टेलीमेडिसिन योजना ठप हो गई है। वजह है, सरकार और चिकित्सा विभाग की अनदेखी। करोड़ों रुपए के उपकरण और सेंटर बनाने के बाद भी 12 साल पहले शुरू की गई इस योजना में अब एक भी मरीज को फायदा नहीं मिल पा रहा है। हकीकत यह है कि एसएमएस अस्पताल में बनाए गए टेलीमेडिसिन सेंटर पर ओपीडी टाइम में ही ताले लगे रहते हैं, जबकि व्यवस्था यह की गई थी कि ओपीडी समय के अलावा भी शेष समय में टेलीमेडिसिन सेंटर खुला रहेगा और जरूरत पड़ने पर सम्बन्धित विभाग के डॉक्टर को ऑन कॉल बुलाया जाएगा। आर्थो, कार्डियो, न्यूरो, ईएनटी के अलावा ट्रोमा मरीजों के लिए यह व्यवस्था काफी फायदेमंद साबित हो रही थी, लेकिन शुरुआती दौर के बाद व्यवस्था लगभग पूरी तरह खत्म ही हो गई। यहां तक कि जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर के मेडिकल कॉलेज में भी टेलीमेडिसिन सेंटर की योजना नाकाम हो चुकी है। वर्ष 2006 में शुरू की गई योजना का उददेश्य था कि मरीजों को उन्हीं के जिला अस्पतालों में एसएमएस मेडिकल कॉलेज जैसे विशेषज्ञों की राय और परामर्श मिल सके।

ये हालात तब हैं जबकि यह प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक था। खुद उन्होंने ही बिड़ला अॅडिटोरियम से इसका लाइव उद‌्घाटन किया था। इसके बाद एसएमएस अस्पताल में इसका सेंटर बनाया गया और 32 जिलों में टेलीमेडिसिन सेंटर से लाभ लेने की व्यवस्था की गई। साथ ही घोषणा की गई थी कि आने वाले समय में सभी जिला अस्पतालों में यह व्यवस्था की जाएगी ताकि मरीजों को स्थानीय अस्पताल में ही उच्च स्तरीय इलाज ले सकें। हालात ऐसे हैं कि अभी टेलीमेडिसिन सेंटर पर एक वार्ड ब्याय और टेक्नीशियन रहते हैं, लेकिन ये भी यहां यदा-कदा ही नजर आते हैं।

पहले लगा था ताला, जैसे ही बात की, पहुंच गया वार्ड ब्वाय

संदीप शर्मा | जयपुर

प्रदेश के 32 जिलों के लाखों मरीजों को उन्हीं के क्षेत्र में तुरंत और बेहतर इलाज देने के लिए शुरू की गई टेलीमेडिसिन योजना ठप हो गई है। वजह है, सरकार और चिकित्सा विभाग की अनदेखी। करोड़ों रुपए के उपकरण और सेंटर बनाने के बाद भी 12 साल पहले शुरू की गई इस योजना में अब एक भी मरीज को फायदा नहीं मिल पा रहा है। हकीकत यह है कि एसएमएस अस्पताल में बनाए गए टेलीमेडिसिन सेंटर पर ओपीडी टाइम में ही ताले लगे रहते हैं, जबकि व्यवस्था यह की गई थी कि ओपीडी समय के अलावा भी शेष समय में टेलीमेडिसिन सेंटर खुला रहेगा और जरूरत पड़ने पर सम्बन्धित विभाग के डॉक्टर को ऑन कॉल बुलाया जाएगा। आर्थो, कार्डियो, न्यूरो, ईएनटी के अलावा ट्रोमा मरीजों के लिए यह व्यवस्था काफी फायदेमंद साबित हो रही थी, लेकिन शुरुआती दौर के बाद व्यवस्था लगभग पूरी तरह खत्म ही हो गई। यहां तक कि जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर के मेडिकल कॉलेज में भी टेलीमेडिसिन सेंटर की योजना नाकाम हो चुकी है। वर्ष 2006 में शुरू की गई योजना का उददेश्य था कि मरीजों को उन्हीं के जिला अस्पतालों में एसएमएस मेडिकल कॉलेज जैसे विशेषज्ञों की राय और परामर्श मिल सके।

ये हालात तब हैं जबकि यह प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक था। खुद उन्होंने ही बिड़ला अॅडिटोरियम से इसका लाइव उद‌्घाटन किया था। इसके बाद एसएमएस अस्पताल में इसका सेंटर बनाया गया और 32 जिलों में टेलीमेडिसिन सेंटर से लाभ लेने की व्यवस्था की गई। साथ ही घोषणा की गई थी कि आने वाले समय में सभी जिला अस्पतालों में यह व्यवस्था की जाएगी ताकि मरीजों को स्थानीय अस्पताल में ही उच्च स्तरीय इलाज ले सकें। हालात ऐसे हैं कि अभी टेलीमेडिसिन सेंटर पर एक वार्ड ब्याय और टेक्नीशियन रहते हैं, लेकिन ये भी यहां यदा-कदा ही नजर आते हैं।

भास्कर ने दोपहर डेढ़ बजे टेलीमेडिसिन सेंटर की फोटो की। इस समय यहां ताला लगा था, लेकिन जैसे ही मामले में सम्बन्धित अधिकारियों से पूछताछ की तो कुछ ही देर में ताला खुल गया और वार्ड ब्वाय भी पहुंच गया। बोला- ये तो रोज खुलता है, लेकिन डॉक्टर का पता नहीं, कब आते हैं।

जानिए...क्या है टेलीमेडिसिन योजना और कैसे मिलता है दूर बैठे मरीजों को इसका लाभ

एसएमएस मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध अस्पतालों में सीनियर और एक्सपर्ट डॉक्टर हैं। साथ ही उनका डायग्नोस और ट्रीटमेंट भी बेहतर माना जाता है। प्रदेश भर के मरीज दिखाने के लिए एसएमएस अस्पताल आते हैं। आने-जाने में लगने वाले समय और इमरजेंसी में मरीज को बेहतर इलाज देने के लिए यह टेलीमेडिसिन सेंटर शुरू किया गया था। इसके तहत किसी भी जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीज की रिपोर्ट एसएमएस अस्पताल में बनाए गए टेलीमेडिसिन सेंटर में सम्बन्धित स्पेशलिस्ट डॉक्टर देख सकते थे और इलाज बता सकते थे। यहां तक कि शुरुआती दौर में टेलीमेडिसिन सेंटर का उपयोग ऑपरेशन तक में किया गया।

ऐसे कम हुआ काम और अब औपचारिक रूप से खुलता है

शुरुआती दौर में तो जिला अस्पतालों से डॉक्टर्स टेलीमेडिसिन सेंटर पर लगातार राय लेते थे और इलाज करते थे। उस समय सेंटर पर रोजाना 100 से 125 कॉल आ रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे एसएमएस हॉस्पिटल में बने टेलीमेडिसिन सेंटर पर आने वाली कॉल पर डॉक्टर्स पहुंचना बंद हो गए या आते भी थे तो सीनियर रेजीडेंट। ऐसे में जिला अस्पतालों में मौजूद सीनियर डॉक्टर्स को यह अच्छा नहीं लगता था। नतीजतन सेंटर पर कॉल आना बंद हो गए।