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फैकल्टी, प्लेसमेंट व फंड उपयोग में कमी से रैंकिंग में पिछड़े हमारे संस्थान

एजुकेशन रिपोर्टर. जयपुर | एमएचआरडी की ओर से जारी शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग में राज्य सरकार के अधीन एक भी सरकारी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 09, 2018, 07:00 AM IST

एजुकेशन रिपोर्टर. जयपुर | एमएचआरडी की ओर से जारी शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग में राज्य सरकार के अधीन एक भी सरकारी शिक्षण संस्थान टॉप 100 में जगह नहीं बना सका है, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हमारे सभी शिक्षण संस्थान फेकल्टी की कमी, प्लेसमेंट, रिसर्च, स्कॉलरशीप, वित्तीय संसाधनों के उपयोग सहित 12 कसौटियों पर खरे नहीं उतर सकें थे। राज्य सरकार से जुड़ा एक भी शिक्षण संस्थान 12 बिंदुओं में से एक भी स्टेर्ण्ड पैमाने पर अच्छे अंक अर्जित नहीं कर सका। प्राइवेट डीम्ड यूनिवर्सिटी और केंद्रीय शिक्षण संस्थान ही ओवरऑल रैंकिंग और यूनिवर्सिटी केटेगरी की रैंकिंग में जगह बना सके हैं। हाल ही में राज्यपाल कल्याण सिंह ने प्रदेश के समस्त सरकारी विश्वविद्यालयों पर सवाल उठाया था कि भर्ती में विलंब क्यों हुआ और बजट क्यों नहीं खर्च किए जा रहे है। इस मामले में राज्यपाल ने कुलपतियों पर माफीनामे जैसे कार्रवाई तक तय कर दी है।

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क्या है क्राइटेरिया और क्या है हकीकत

फेकल्टी मेंबर विद पीएचडी क्वालिफिकेशन : सरकारी यूनिवर्सिटी में 40% फेकल्टी कम। नई भर्तियों में 20% शिक्षकों की पीएचडी पूरी नहीं।

स्कॉलरशिप : 70% सरकारी विश्वविद्यालयों में स्कॉलरशिप राशि रुकी है।

प्लेसमेंट एंड हायर स्टडीज : 70% सरकारी विवि प्लेसमेंट की दौड़ में पिछड़ रहे है।

पीएचडी स्टूडेंट : पीएचडी और रिसर्च मामलों में आधे से ज्यादा विवि पिछड़े हुए हंै।

पीएचडी स्टूडेंट इंटीग्रेटेड पीएचडी शामिल : इस तरह से जुड़ी रिसर्च के मामलों में सिर्फ 50% यूनिवर्सिटी ही कसौटी पर खरी उतरी।

एग्जाम : 80% यूनिवर्सिटी में परंपरागत होने की वजह से कमियां सामने आई ।

वित्तीय संसाधान और उसका उपयोग : 60% विवि वित्तीय संसाधन और उपयोग के क्राइटेरिया पर पिछड़े हैं।

3 वर्ष की पब्लिकेशन डिटेल : 40 % विवि पिछड़े।

3 वर्ष की एक्जीक्यूटिव डवलपमेंट प्रोग्राम : आधे से ज्यादा विश्वविद्यालयों में कमियां मिली।

3 वर्ष की स्पोन्सर्ड रिसर्च प्रोजेक्ट डिटेल : 80% से ज्यादा सरकारी विवि पिछड़े ।

3 वर्ष की कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट डिटेल : 70% से ज्यादा विवि खरे नहीं उतरे।

दिव्यांग स्टूडेंट के लिए सुविधाओं की स्थिति: 80% से ज्यादा विश्वविद्यालय इस मापदंड पर रहे लेकिन 100% क्राइटेरिया पूरा नहीं कर सके।

ये है रैंकिंग में हमारे हालात

ओवरआल श्रेणी : बिट्स पिलानी 26, एमएनआईटी 125, सेंट्रल यूनिवर्सिटी किशनगढ़ 154 व राजस्थान यूनिवर्सिटी 179 रैंक।

यूनिवर्सिटी श्रेणी : बिट्स पिलानी 17, बनस्थली 64 सेंट्रल यूनिवर्सिटी किशनगढ़ 104, आरयू 131, राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वेटेरनरी एंड एनिमल साइंस बीकानेर 132, एमिटी 154 और एलएनएम यूनिवर्सिटी 194 पर रैंक पर रही।

फार्मेसी श्रेणी : बनस्थली 23वीं रैंक

इंजीनियरिंग : बिट्स पिलानी 17, एमएनआईटी 52वीं रैंक

लॉ केटेगरी : नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी 5वें स्थान प्रबंधन श्रेणी : आईआईएम उदयपुर 13वें स्थान

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Web Title: फैकल्टी, प्लेसमेंट व फंड उपयोग में कमी से रैंकिंग में पिछड़े हमारे संस्थान
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