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पराली नहीं जलाने पर किसानों को इंसेंटिव, पंचायतों को भी इनाम

प्रदूषण की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार खेतों में पराली नहीं जलाने वाले किसानों को इंसेंटिव देने की तैयारी कर रही...

Danik Bhaskar | Apr 09, 2018, 07:05 AM IST
प्रदूषण की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार खेतों में पराली नहीं जलाने वाले किसानों को इंसेंटिव देने की तैयारी कर रही है। जिस पंचायत के एक भी खेत में पराली नहीं जलेगी, उसे भी एक लाख रुपए इनाम दिया जाएगा। इसके लिए क्लीन एयर इम्पैक्ट फंड बनाया जा रहा है। पराली जलाने पर रोक के लिए बजट में आवंटित 1200 करोड़ रु. इसी फंड में इस्तेमाल किए जाएंगे। किसानों को दिए जाने वाले इंसेंटिव की रकम अभी सरकार के स्तर पर तय की जानी बाकी है। यह योजना जून-जुलाई में खरीफ के सीजन की शुरुआत तक अमल में आ सकती है। सूत्रों के अनुसार इसमें अकेले पंचायतों के लिए करीब 700 करोड़ रुपए रखे जाने का अनुमान है। मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान इस योजना में शामिल होंगे। यह योजना कृषि मंत्रालय, नीति आयोग, पर्यावरण मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, आईआईटी कानपुर एवं औद्योगिक संगठन सीआईआई ने मिलकर तैयार की है। इसकी नोडल एजेंसी पर्यावरण मंत्रालय होगा। योजना का मकसद पूरे उत्तर भारत में वायु प्रदूषण को नियंत्रित रखना है। पिछले साल नवंबर-दिसंबर में उत्तर भारत में भारी वायु प्रदूषण हुआ था।

जांच के बाद खाते में जाएगी इंसेंटिव की रकम : योजना तैयार करने से जुड़े सीआईआई के पदाधिकारी ने बताया कि पराली नहीं जलाने पर किसानों को खर्चीले विकल्प अपनाने पड़ेंगे। इंसेंटिव देने से पहले जांच की जाएगी कि उसने खेत में पराली जलाई है या नहीं। इसके बाद लाभ डीबीटी के जरिये सीधा खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। पराली से बॉयो एथेनॉल और बिजली बनाने के प्लांट लगाने के लिए भी इंसेंटिव देने की तैयारी है।

चार राज्यों में सबसे ज्यादा जलाते हैं पराली

पंजाब, उत्तरप्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के दो दर्जन से अधिक जिलों में पराली जलाई जाती है। पंजाब के पांच जिलों मोगा, पटियाला, लुधियाना, संगरूर व बरनाला में सबसे अधिक पराली जलती है। धान की खेती के बाद किसानों को रबी फसल की बुवाई करनी होती है। ऐसे में किसान खेतों में पराली जला देते हैं।

भास्कर न्यूज | नई दिल्ली

प्रदूषण की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार खेतों में पराली नहीं जलाने वाले किसानों को इंसेंटिव देने की तैयारी कर रही है। जिस पंचायत के एक भी खेत में पराली नहीं जलेगी, उसे भी एक लाख रुपए इनाम दिया जाएगा। इसके लिए क्लीन एयर इम्पैक्ट फंड बनाया जा रहा है। पराली जलाने पर रोक के लिए बजट में आवंटित 1200 करोड़ रु. इसी फंड में इस्तेमाल किए जाएंगे। किसानों को दिए जाने वाले इंसेंटिव की रकम अभी सरकार के स्तर पर तय की जानी बाकी है। यह योजना जून-जुलाई में खरीफ के सीजन की शुरुआत तक अमल में आ सकती है। सूत्रों के अनुसार इसमें अकेले पंचायतों के लिए करीब 700 करोड़ रुपए रखे जाने का अनुमान है। मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान इस योजना में शामिल होंगे। यह योजना कृषि मंत्रालय, नीति आयोग, पर्यावरण मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, आईआईटी कानपुर एवं औद्योगिक संगठन सीआईआई ने मिलकर तैयार की है। इसकी नोडल एजेंसी पर्यावरण मंत्रालय होगा। योजना का मकसद पूरे उत्तर भारत में वायु प्रदूषण को नियंत्रित रखना है। पिछले साल नवंबर-दिसंबर में उत्तर भारत में भारी वायु प्रदूषण हुआ था।

जांच के बाद खाते में जाएगी इंसेंटिव की रकम : योजना तैयार करने से जुड़े सीआईआई के पदाधिकारी ने बताया कि पराली नहीं जलाने पर किसानों को खर्चीले विकल्प अपनाने पड़ेंगे। इंसेंटिव देने से पहले जांच की जाएगी कि उसने खेत में पराली जलाई है या नहीं। इसके बाद लाभ डीबीटी के जरिये सीधा खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। पराली से बॉयो एथेनॉल और बिजली बनाने के प्लांट लगाने के लिए भी इंसेंटिव देने की तैयारी है।