• Hindi News
  • Rajasthan
  • Shahjanpur
  • दो दशकों में शहरों के तापमान में पांच डिग्री तक की बढ़ोतरी
--Advertisement--

दो दशकों में शहरों के तापमान में पांच डिग्री तक की बढ़ोतरी

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2018, 08:00 AM IST

Shahjanpur News - राहुल मानव/अजय कुलकर्णी | नई दिल्ली, औरंगाबाद देश में पिछले दो दशकों में अधिकतम तापमान लगातार बढ़ रहा है। मौसम...

दो दशकों में शहरों के तापमान में पांच डिग्री तक की बढ़ोतरी
राहुल मानव/अजय कुलकर्णी | नई दिल्ली, औरंगाबाद

देश में पिछले दो दशकों में अधिकतम तापमान लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग के डायरेक्टर जनरल केजे रमेश ने बताया कि शहरों में बीते 18 सालों में अधिकतम तापमान सामान्य से पांच से छह डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज होने का ट्रेंड रहा है। साल 2000 व 2001 में तापमान अप्रैल से जून के दौरान उत्तर भारत में 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज होता था। अब यह बढ़कर 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक हो गया है। अधिकतम तापमान में यह बदलाव अब स्थायी हो गया है। यानी यह सिर्फ किसी एक साल अधिक गर्मी पड़ने की बात नहीं है। साल 2000 में मार्च से मई के महीने का औसत तापमान 32.22 डिग्री सेल्सियस था। उत्तर भारत के कई इलाकों समेत मध्य भारत के इलाकों में अधिकतम तापमान मार्च से जून के दौरान दस साल पहले तक 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच जाता था। लेकिन अब मार्च महीने में भी दिल्ली समेत राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज हो रहा है।

स्काइमेट के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने बताया कि दिल्ली समेत लखनऊ, अमृतसर जैसे कई बड़े शहरों में अधिकतम तापमान अप्रैल से जून के महीनों में 35 डिग्री औसत दर्ज हो रहा है। वर्ष 2000 के आसपास यह 31 डिग्री रहता था। 0.2 से 0.5 डिग्री सेल्सियस साल दर साल शहरों में औसत तापमान बढ़ने का ट्रेंड भी देखा गया है। इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन, एयर पॉल्यूशन, एससी से निकलने वाली हीट और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली रेडिएशन जैसे तमाम फैक्टर देश के तापमान को 50 से 60 फीसदी तक बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। इससे दिल्ली समेत देशभर के शहरों का तापमान बढ़ रहा है। इंडियन एसोसिएशन फॉर पॉल्यूशन कंट्रोल के जनरल सेक्रेटरी श्याम गुप्ता ने बताया कि कम आबादी वाले क्षेत्रों में अधिकतम तापमान ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों की तुलना में अधिक बढ़ रहा है। 25 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहराें में कॉन्क्रीट के जंगलों के कारण रेडिएशन व गैसें निकलती हैं। वह अधिकतम तापमान को दो िडग्री सेल्सियस तक बढ़ा रही हैं। बड़े शहरों में छोटे शहरों के मुकाबले तापमान अधिक रहने का ट्रेंड हो गया है। दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु समेत देश के जितने भी शहरों में विकास हो रहा है वहां तापमान भी बढ़ रहा है। मौसम की परिभाषा में एेसी जगहों को अर्बन हीट आयलैंड कहते हैं। शेष | पेज 2

इसका कराण है कि बड़ी इमारतों में लगे एसी से जो हीट बाहर निकलती है वह ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन में भी दर्ज होती है। यही नहीं विभिन्न राज्यों की क्लाइमेट प्रोजेक्शन रिपोर्ट केे अनुसार आने वाले दो- तीन दशकों (2021 से 2050) में देश के शहरों में अधिकतम तापमान 1 से 3 डिग्री सेल्सियस बढ़ने के आसार हैं। साथ में औसत बारिश पर भी असर होगा। राज्यों की ओर से जारी अनुसार देश के प्रत्येक राज्य में आने वाले समय में तापमान में बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से दिखती है।



उत्तर के शहर दक्षिण से ज्यादा गर्म

2018 में अप्रैल से जून के दौरान उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत में तापमान 1.5 डिग्री ज्यादा रहेगा। दक्षिण में फरवरी-मार्च और अक्टूबर-नवंबर में अधिकतम तापमान ज्यादा दर्ज होता है। वहीं उत्तर में अधिकतम तापमान मार्च से अक्टूबर में ज्यादा दर्ज होता है। मौसम विभाग के क्लाइमेट प्रिडिक्शन हेड डॉ. डी.एस. पई बताते हैं कि दक्षिण की तुलना में उत्तर में औसत तापमान में बढ़त दर्ज हुई है। न्यूनतम तापमान में भी यही ट्रेंड दिख रहा है। देश में अधिकतम और न्यूनतम का अंतर कम हो रहा है।

उत्तर में एक डिग्री ज्यादा

इस साल अप्रैल से जून के तीन महीनों में पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी उत्तरप्रदेश और पूर्वी-पश्चिमी राजस्थान में तापमान सामान्य से 1 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहेगा। गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तरप्रदेश और पश्चिमी तथा पूर्वी मध्यप्रदेश में भी औसत तापमान सामान्य से 0.5 से 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है।

राहुल मानव/अजय कुलकर्णी | नई दिल्ली, औरंगाबाद

देश में पिछले दो दशकों में अधिकतम तापमान लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग के डायरेक्टर जनरल केजे रमेश ने बताया कि शहरों में बीते 18 सालों में अधिकतम तापमान सामान्य से पांच से छह डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज होने का ट्रेंड रहा है। साल 2000 व 2001 में तापमान अप्रैल से जून के दौरान उत्तर भारत में 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज होता था। अब यह बढ़कर 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक हो गया है। अधिकतम तापमान में यह बदलाव अब स्थायी हो गया है। यानी यह सिर्फ किसी एक साल अधिक गर्मी पड़ने की बात नहीं है। साल 2000 में मार्च से मई के महीने का औसत तापमान 32.22 डिग्री सेल्सियस था। उत्तर भारत के कई इलाकों समेत मध्य भारत के इलाकों में अधिकतम तापमान मार्च से जून के दौरान दस साल पहले तक 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच जाता था। लेकिन अब मार्च महीने में भी दिल्ली समेत राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज हो रहा है।

स्काइमेट के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने बताया कि दिल्ली समेत लखनऊ, अमृतसर जैसे कई बड़े शहरों में अधिकतम तापमान अप्रैल से जून के महीनों में 35 डिग्री औसत दर्ज हो रहा है। वर्ष 2000 के आसपास यह 31 डिग्री रहता था। 0.2 से 0.5 डिग्री सेल्सियस साल दर साल शहरों में औसत तापमान बढ़ने का ट्रेंड भी देखा गया है। इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन, एयर पॉल्यूशन, एससी से निकलने वाली हीट और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली रेडिएशन जैसे तमाम फैक्टर देश के तापमान को 50 से 60 फीसदी तक बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। इससे दिल्ली समेत देशभर के शहरों का तापमान बढ़ रहा है। इंडियन एसोसिएशन फॉर पॉल्यूशन कंट्रोल के जनरल सेक्रेटरी श्याम गुप्ता ने बताया कि कम आबादी वाले क्षेत्रों में अधिकतम तापमान ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों की तुलना में अधिक बढ़ रहा है। 25 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहराें में कॉन्क्रीट के जंगलों के कारण रेडिएशन व गैसें निकलती हैं। वह अधिकतम तापमान को दो िडग्री सेल्सियस तक बढ़ा रही हैं। बड़े शहरों में छोटे शहरों के मुकाबले तापमान अधिक रहने का ट्रेंड हो गया है। दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु समेत देश के जितने भी शहरों में विकास हो रहा है वहां तापमान भी बढ़ रहा है। मौसम की परिभाषा में एेसी जगहों को अर्बन हीट आयलैंड कहते हैं। शेष | पेज 2

इसका कराण है कि बड़ी इमारतों में लगे एसी से जो हीट बाहर निकलती है वह ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन में भी दर्ज होती है। यही नहीं विभिन्न राज्यों की क्लाइमेट प्रोजेक्शन रिपोर्ट केे अनुसार आने वाले दो- तीन दशकों (2021 से 2050) में देश के शहरों में अधिकतम तापमान 1 से 3 डिग्री सेल्सियस बढ़ने के आसार हैं। साथ में औसत बारिश पर भी असर होगा। राज्यों की ओर से जारी अनुसार देश के प्रत्येक राज्य में आने वाले समय में तापमान में बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से दिखती है।





30 साल में ऐसे बदलेगा मौसम

राज्य तापमान वृद्घि बारिश की स्थिति











(सोर्स : मिनिस्ट्री आफ इनवायरमेंट : राज्यों के क्लाइमेट प्रोजेक्शन रिपोर्टस)

आईआईएम-ए की 9 शहरों पर रिसर्च

सिर्फ अहमदाबाद अप्रभावित बाकी शहरों में बदला तापमान

आईआईएम अहमदाबाद की एक रिसर्च में ग्लोबल वार्मिंग के असर को 53 वर्षों के तापमान के अध्ययन से आंका गया। देश के नौ शहरों के आंकड़ों के अाधार पर अध्ययन किया गया। अर्णब कुमार लाहा और पूनम राठी की इस रिसर्च में ये जानकारी चौंकाने वाली है कि देश के पठारी इलाकों वाले शहरों की अपेक्षा कमोबेश ठंडे माने जाने वाले पहाड़ी इलाकों में तापमान बढ़ा है। शेष | पेज 2



रिसर्च में 9 शहरों का 1961 से लेकर 2013 तक के हर माह के अधिकतम और न्यूनतम तापमान का अध्ययन किया गया। अध्ययन में अहमदाबाद, बेंगलुरु, इम्फाल, जयपुर, कोलकाता, पोर्ट ब्लेयर, पुणे, श्रीनगर और त्रिवेंद्रम शामिल हैं। सभी में से सिर्फ अहमदाबाद को छोड़ दिया जाए तो शेष आठों शहरों में 1994 से 2001 अधिक बदलाव देखने को मिले। बेंगलुरु जैसे शहर में 1961 से लेकर 1989 और 1990 से लेकर 2013 तक यानी दो कालखंडों में तापमान बांटा। चौंकाने वाली बात ये है कि गार्डन सिटी कहे जाने वाले बेंगलुरु में जहां का मौसम भी अच्छा रहता है, वहां जनवरी माह में तापमान सर्वाधिक बढ़ा। 1961 से 1989 तक शहर का जनवरी में जो तापमान था, वह 1990 से 2013 के बीच में जनवरी माह में 0.776 डिग्री से. बढ़ चुका था। लेकिन बेंगलुरु की तुलना में कमोबेश गर्म माने जाने वाले अहमदाबाद में तापमान नहीं बदला। यानी इतने वर्षों में तापमान में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आया। इसके विपरीत जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर और सुदूर पूर्व हिमालय में बसे इम्फाल के तापमान में सबसे ज्यादा बदलाव दर्ज किए गए। बेंगलुरु में जहां जनवरी माह में सर्वाधिक बदलाव देखने को मिला तो श्रीनगर में मार्च माह में तापमान में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली। कोलकाता में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला।

राहुल मानव/अजय कुलकर्णी | नई दिल्ली, औरंगाबाद

देश में पिछले दो दशकों में अधिकतम तापमान लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग के डायरेक्टर जनरल केजे रमेश ने बताया कि शहरों में बीते 18 सालों में अधिकतम तापमान सामान्य से पांच से छह डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज होने का ट्रेंड रहा है। साल 2000 व 2001 में तापमान अप्रैल से जून के दौरान उत्तर भारत में 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज होता था। अब यह बढ़कर 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक हो गया है। अधिकतम तापमान में यह बदलाव अब स्थायी हो गया है। यानी यह सिर्फ किसी एक साल अधिक गर्मी पड़ने की बात नहीं है। साल 2000 में मार्च से मई के महीने का औसत तापमान 32.22 डिग्री सेल्सियस था। उत्तर भारत के कई इलाकों समेत मध्य भारत के इलाकों में अधिकतम तापमान मार्च से जून के दौरान दस साल पहले तक 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच जाता था। लेकिन अब मार्च महीने में भी दिल्ली समेत राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज हो रहा है।

स्काइमेट के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने बताया कि दिल्ली समेत लखनऊ, अमृतसर जैसे कई बड़े शहरों में अधिकतम तापमान अप्रैल से जून के महीनों में 35 डिग्री औसत दर्ज हो रहा है। वर्ष 2000 के आसपास यह 31 डिग्री रहता था। 0.2 से 0.5 डिग्री सेल्सियस साल दर साल शहरों में औसत तापमान बढ़ने का ट्रेंड भी देखा गया है। इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन, एयर पॉल्यूशन, एससी से निकलने वाली हीट और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली रेडिएशन जैसे तमाम फैक्टर देश के तापमान को 50 से 60 फीसदी तक बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। इससे दिल्ली समेत देशभर के शहरों का तापमान बढ़ रहा है। इंडियन एसोसिएशन फॉर पॉल्यूशन कंट्रोल के जनरल सेक्रेटरी श्याम गुप्ता ने बताया कि कम आबादी वाले क्षेत्रों में अधिकतम तापमान ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों की तुलना में अधिक बढ़ रहा है। 25 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहराें में कॉन्क्रीट के जंगलों के कारण रेडिएशन व गैसें निकलती हैं। वह अधिकतम तापमान को दो िडग्री सेल्सियस तक बढ़ा रही हैं। बड़े शहरों में छोटे शहरों के मुकाबले तापमान अधिक रहने का ट्रेंड हो गया है। दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु समेत देश के जितने भी शहरों में विकास हो रहा है वहां तापमान भी बढ़ रहा है। मौसम की परिभाषा में एेसी जगहों को अर्बन हीट आयलैंड कहते हैं। शेष | पेज 2

इसका कराण है कि बड़ी इमारतों में लगे एसी से जो हीट बाहर निकलती है वह ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन में भी दर्ज होती है। यही नहीं विभिन्न राज्यों की क्लाइमेट प्रोजेक्शन रिपोर्ट केे अनुसार आने वाले दो- तीन दशकों (2021 से 2050) में देश के शहरों में अधिकतम तापमान 1 से 3 डिग्री सेल्सियस बढ़ने के आसार हैं। साथ में औसत बारिश पर भी असर होगा। राज्यों की ओर से जारी अनुसार देश के प्रत्येक राज्य में आने वाले समय में तापमान में बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से दिखती है।



X
दो दशकों में शहरों के तापमान में पांच डिग्री तक की बढ़ोतरी
Astrology

Recommended

Click to listen..