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खेतों में जलाई जाने वाली पराली से प्रदूषण फैला तो 33 कलेक्टर होंगे जिम्मेदार

जयपुर | प्रदेश की 64 लाख जोतों में से आधे से अधिक खेतों में फसल कटने के बाद पराली और जड़े एक समस्या बन जाती है। जिसे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 08, 2018, 08:00 AM IST

जयपुर | प्रदेश की 64 लाख जोतों में से आधे से अधिक खेतों में फसल कटने के बाद पराली और जड़े एक समस्या बन जाती है। जिसे लाखों किसान हर साल जलाते हैं और उनके निकलने वाले धुएं से भारी प्रदूषण फैलता है। खेत-खेत में आग से भी वातावरण में गर्मी और दुर्घटनाएं होती हैं। अब पराली जलाने से फैसले वाले प्रदूषण की रोकथाम की जिम्मेदारी 33 जिलों के कलेक्टरों की होंगी, जिनको अपने एसडीएम, तहसीलदार से लेकर पटवारी आदि के माध्यम से लगाम लगानी होगी। खेत में पराली या घास-चारा आदि जलाने पर अब किसानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पराली और चारे से खाद बनाने के लिए कृषि विभाग ने अनुदान स्कीम निकाली है। खेत के अपशिष्ट से खाद बनाने वाले यंत्र खरीदने पर किसानों को अनुदान मिलेगा। सरकार ने खेतों के प्रदूषण को कम करने का यह एक्शन प्लान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद बनाया है, जिसे पेश किया जाएगा। खेत के कचरे को जलाने की सर्वाधिक समस्या जयपुर के तहसीलों, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अंता-बारां, कोटा-बूंदी, भीलवाड़ा, डूंगरपुर-बांसवाड़ा और पाली-सिरोही में हैं।

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