शाहजहांपुर

  • Hindi News
  • Rajasthan News
  • Shahjahanpur News
  • नंबर प्लेट्स का धंधा बंद, अब ग्लास पेंटिंग में विश्व के शीर्ष दो में शुमार हुए
--Advertisement--

नंबर प्लेट्स का धंधा बंद, अब ग्लास पेंटिंग में विश्व के शीर्ष दो में शुमार हुए

वाहनों की नंबर प्लेट्स बनाते हुए एक दिन पता चला कि यह धंधा बंद होने वाला है। सरकार ने हाथ से लिखे या कट पेस्ट किए...

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2018, 08:05 AM IST
वाहनों की नंबर प्लेट्स बनाते हुए एक दिन पता चला कि यह धंधा बंद होने वाला है। सरकार ने हाथ से लिखे या कट पेस्ट किए स्टीकर की नंबर प्लेट्स को ही बैन कर दिया है। राताें-रात रोजी का संकट खड़ा हो गया। क्योंकि उसे नंबर प्लेट बनाने के अलावा कोई काम नहीं आता था। इसके बाद मशीन से कांच की पेंटिंग बनाने की फैक्ट्री डाली। लेकिन यह बिजनेस भी नहीं चला और लाखों रुपए की जमा पूंजी भी बर्बाद हो गई। निराशा में बैठे-बैठे एक दिन सोशल मीडिया पर सर्च करते हुए हैंड मैड ग्लास पेंटिंग दिखी। और उसी में अपना हाथ आजमाने का निर्णय किया। थोड़ी बहुत जानकारी के बूते फैक्ट्री में वेस्ट पड़े कांच पर हाथ आजमाना शुरू किया। और फिर सड़क किनारे की दुकान पर वाहनों की नंबर प्लेट लिखते-लिखते आज हरीश देवानी दुनिया में हैंडमैड ग्लास पेंटिंग के दो सबसे उम्दा आर्टिस्ट में शुमार हो गए हैं।

विश्व की प्रतिष्ठित ग्लास बिजनेस मैग्ज़ीन ने माना कि मौजूदा समय में दुनिया में दो ही शख्स ऐसे है, जिनका काम उच्चतम क्वालिटी का है, उनमें हरीश एक हैं। हरीश ने बताया कि इस काम के लिए अहमदाबाद जाकर एक इंस्टीट्यूट से बेसिक ट्रेनिंग भी हासिल की। हैंडमेड ग्लास पेंटिंग्स का काम पोट्रेट पेंटिंग से बिल्कुल उलट है। शेष | पेज 2 पर

जिस तरह कैनवास पर पेंटर चित्रकारी करते है, इसमें बारीक रेत से कांच की सतह को कुरेद कर चित्र अंकित किया जाता है। इसमें पुनः सुधार की गुंजाइश नहीं होती। एक बार कांच पर निशान बन जाने पर उसे मिटाया या हल्का नहीं किया जा सकता है।

वे बताते हैं कि इसके लिए विदेश से स्पेशल औजार मंगवाए। ताकि कांच पर बिना किसी नुकसान से आकृति उकेर सकें। खास बात यह है कि इस कला में काम आने वाली रेत भी बहुत अलग होती है। यह बाजार में नहीं मिलती है, इसे भी ऑर्डर देकर अहमदाबाद से मंगवाते है। 2015 में अमेरिकी मैग्जीन ग्लास आर्ट ने हरीश की कला को सराहते हुए उनके काम पर स्टोरी कवर की थी। उसके पश्चात कुछ भारतीय ग्लास मैग्जीन जैसे ग्लास बुलेटिन, ग्लास न्यूज़, हाई बोर्न और इंग्लैंड की कस्टम्स मैग्जीन ने भी इस काम को अपने प्रकाशन में सम्मान दिया। अमेरिका के ग्लास वर्क सिखाने वाले कई इंस्टीट्यूट के लिए हरीश ऑन लाइन कक्षाएं लेते हैं। हरीश कमेंटरी के साथ साथ ऑनलाइन बैठे स्टूडेंट्स को रियल टाइम सवालों के जवाब भी देते हैं। हरीश ने कांच पर रेत से चित्र उकेरने का अभ्यास 5 वर्ष पहले शुरू किया था। इस तकनीक को सेंड ब्लास्टिंग कहा जाता है।

X
Click to listen..