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अमेरिका ने चीन को दरकिनार करने के लिए 40 वर्ष पुरानी नीति उलट दी

अमेरिका में चुनाव होने में अभी काफी समय है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने समर्थकों को यह जता देना चाहते हैं...

Bhaskar News Network| Last Modified - Apr 08, 2018, 08:05 AM IST

अमेरिका ने चीन को दरकिनार करने के लिए 40 वर्ष पुरानी नीति उलट दी
अमेरिका ने चीन को दरकिनार करने के लिए 40 वर्ष पुरानी नीति उलट दी
अमेरिका में चुनाव होने में अभी काफी समय है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने समर्थकों को यह जता देना चाहते हैं कि वह चीन के प्रति कड़े रुख के अपने वादे से पीछे नहीं हटे हैं। चीन को दरकिनार करने के लिए उन्होंने शुल्क के अलावा एक कूटनीतिक पहल भी की है और 40 वर्ष पुरानी अमेरिकी नीति को उलट दिया है। हाल में लगाए शुल्क में कई देशों को राहत दी है, लेकिन चीन को नहीं।

शुल्क की घोषणा का अमेरिकी प्रशासन में ही खासा विरोध था, ट्रम्प के कई करीबी इस फैसले के कारण उनका साथ छोड़ गए। ये भी अनुमान था कि इस तरह के कदम से कई लोगों की नौकरियां जा सकती हैं। लिहाजा ट्रम्प प्रशासन ने आयात शुल्क संबंधी फैसले में यूरोप, कनाडा, मैक्सिको, ब्राजील और दक्षिण कोरिया को छूट दे दी है। लेकिन चीन के लिए ये शुल्क वैसे ही रहेंगे, जैसे मूल घोषणा में थे।

इस तरह का फैसला व्यापार से ज्यादा कूटनीति है। ट्रम्प और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग की सीधी भेंट चीन को वैसे भी नापसंद है, इस पर ट्रम्प ने जब 22 मार्च को 50 अरब डॉलर के शुल्क की घोषणा कर चीन को सीधे निशाना बनाया तो चीन ने अमेरिका की 128 वस्तुओं पर शुल्क थोप दिया। कुछ समय पहले ही ट्रम्प ने एक कानून पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत ताईवान में अमेरिकी अधिकारियों को दौरा करने और वहां के अधिकारियों से मिलने की अनुमति दी गई, साथ ही ताईवानी अधिकारियों को अमेरिका आने की अनुमति दी गई। 40 वर्ष पुरानी नीति में बदलाव लाया गया। अमेरिकी और चीनी मीडिया में ये खबर कम प्रचारित हुई। ये माना जा रहा है कि चीन के दूसरे दौर के आयात शुल्क में अमेरिका से आने वाली कार, ऑरेंज जूस, सोयाबीन सभी को निशाना बनाया जाएगा। 14 अरब डॉलर का ये सामान हर साल चीन आता है। ट्रम्प के इस कदम से चीन जिनसेंग और पोर्क को भी निशाना बना सकता है। यदि एेसा होता है तो इन उत्पादों को बेचने वाले विस्कॉन्सिन और आयोवा राज्यों पर असर पड़ेगा और यहां से जीतना ट्रम्प के लिए बेहद जरूरी है। ट्रम्प की इच्छा है कि अमेरिकी कंपनियों की दुनियाभर में पकड़ हो सकंे। वे चाहते हैं कि किसी भी तरह से व्यापार घाटा कम हो और राजनीतिक रूप से वे जीता हुआ बता सके। चीन चाहता है कि उसे ऐसी तकनीकी मिले, जो उसकी इकोनॉमी को तेजी से चला सके। चीन मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस से इंडस्ट्री क्रिएटर होना चाहता है, ताकि लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा सके।

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