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बेटियां तो 6.44% बढ़ीं, लेकिन 91% गर्ल्स कॉलेजों में उन्हंे पढ़ाने को पूरे शिक्षक ही नहीं

सरकार के बेटी पढ़ाओ के नारे के बाद उच्च शिक्षा में भी छात्राओं के नामांकन में 6.44 प्रतिशत की बढ़ोतरी तो हो गई और उनकी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 19, 2018, 06:20 AM IST

बेटियां तो 6.44% बढ़ीं, लेकिन 91% गर्ल्स कॉलेजों में उन्हंे पढ़ाने को पूरे शिक्षक ही नहीं
सरकार के बेटी पढ़ाओ के नारे के बाद उच्च शिक्षा में भी छात्राओं के नामांकन में 6.44 प्रतिशत की बढ़ोतरी तो हो गई और उनकी संख्या बढ़कर 1,86,509 तक पहुंच गई, लेकिन प्रदेश सरकारी गर्ल्स कॉलेजों की हालत नहीं सुधरी। हालात यह हैं कि प्रदेश के 46 में से 42 सरकारी गर्ल्स कॉलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। केवल चौमूं, शाहपुरा, करौली और लालसोट के गर्ल्स कॉलेज ऐसे हैं, जहां पूरा शैक्षणिक स्टाफ है। बाकी हर कॉलेज में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। इनमें बारह गर्ल्स कॉलेज में आधे से ज्यादा पद खाली हैं तो दो कॉलेज तो ऐसे हैं, जिनमें स्वीकृत पदों पर एक भी शिक्षक नियुक्त नहीं है। जिन कॉलेजों में आधे से अधिक पद भरे हैं, वहां भी खाली पदों की संख्या बहुत अधिक है। ऐसे सवाल यही है कि जब 91 प्रतिशत गर्ल्स कॉलेजों में शिक्षकों के पद खाली हैं तो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली बेटियों को पढ़ाएगा कौन? गौरतलब है कि उच्च शिक्षा में 219 सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों के 6219 पद स्वीकृत हैं, इनमें से 2284 पद खाली हैं।

राजस्थान में उच्च शिक्षा में गर्ल्स कॉलेजों की स्थिति भी बेहद हैरान कर देने वाली है....

महिला शिक्षा को बढ़ावा देने की तस्वीर यूं हो रही है धुंधली

अन्य 21 जिला मुख्यालयों पर भी ऐसा ही है हाल

सात संभाग मुख्यालयों और चूरू-राजसमंद जिलों के अलावा बाकी 24 जिलों पर नजर डालंे तो भी छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा की स्थिति खराब ही है। इनमें से 21 जिला मुख्यालयों पर चल रहे गर्ल्स कॉलेजों में टीचर्स की कमी लगातार बनी हुई है। इनमें गंगानगर में 65 में से 26, अलवर में 70 में से 11, भीलवाड़ा में 67 में से 29, बूंदी में 13 में से 2, दौसा में 22 में से 1, धौलपुर में 7 में से 3, डूंगरपुर में 22 में से 10, जालौर में 12 में से 5, झालावाड़ में 17 में से 6, झुंझुनूं में 26 में से 11, सवाई माधोपुर में 16 में से 7, सीकर में 68 में से 22, सिरोही में 9 में से 3, टोंक में 13 में से 1, बांसवाड़ा में 27 में से 15, बारां में 24 में से 15, बाड़मेर में 15 में से 8, चित्तौड़गढ़ में 18 में से 10, जैसलमेर में 14 में से 11, नागौर में 9 में से 5 और पाली में 15 में से 8 पद खाली हैं।

चूरू और राजसमंद गर्ल्स कॉलेज में तो सभी पद पड़े हैं खाली

राज्य के दो जिला मुख्यालय चूरू और राजसमंद तो ऐसे हैं, जिनमें चल रहे गर्ल्स कॉलेज में शिक्षकों के सभी पद खाली हैं। दोनों गर्ल्स कॉलेजों में शिक्षकों के 7-7 पद स्वीकृत हैं।

प्रदेश के सात में से पांच संभाग मुख्यालयों तक में शिक्षकों की कमी

राज्य में सात संभाग मुख्यालयों में से केवल जयपुर और जोधपुर को छोड़कर बाकी पांच संभाग मुख्यालयों तक में गर्ल्स कॉलेजों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। इनमें अजमेर में 44 में से 7, भरतपुर 59 में से 24 , बीकानेर मे 75 में से 16 और उदयपुर में 139 में से 21 पद खाली हैं, जबकि कोटा संभाग मुख्यालय के तीन गर्ल्स कॉलेजों में से कोटा कन्या वाणिज्य में 22 में से 15, कोटा कन्या में 45 में से 15 और कोटा कन्या कला में 63 में से 23 पद खाली चल रहे हैं।

और यह इनकी स्थति

कॉलेज स्वीकृत खाली कार्यरत

बयाना कन्या 7 2 5

हौद कन्या 8 1 7

कोटपुतली कन्या 15 3 12

नाथद्वारा कन्या 18 8 10

नीमकाथाना कन्या 16 6 10

पीपाड़ सिटी कन्या 5 1 4

सादुलशहर कन्या 10 4 6

सरवाड़ कन्या 7 2 5

बालोतरा कन्या 16 9 7

खेरवाड़ा कन्या 15 9 6

रतनगढ़ कन्या 10 6 4

तारानगर कन्या 12 10 5

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