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दड़ा खेल से जाना जमाना, सुकाल का संकेत मिला

सांगरिया | यह साल कैसा रहेगा। अकाल रहेगा या सुकाल। यह जानने के लिए हर साल मकर संक्रांति पर धनोप गांव में दड़ा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 15, 2018, 06:25 AM IST

सांगरिया | यह साल कैसा रहेगा। अकाल रहेगा या सुकाल। यह जानने के लिए हर साल मकर संक्रांति पर धनोप गांव में दड़ा महोत्सव होता है। इसमें दड़ा खेलकर जमाने का अनुमान लगाया जाता है। दड़ा खेल ने इस बार शुभ संकेत दिया है। इस बार भी सुकाल रहेगा। यह घोषणा होते ही लोगों ने मिठाई बांटकर खुशी जताई। शाहपुरा रियासत के पूर्व शासक सरदार सिंह के समय से यह परंपरा चल रही है। दड़ा महोत्सव धनोप में आयोजित होता है। रविवार दोपहर 1:15 बजे पहला नगाड़ा बजते ही लोग मैदान में इकट्ठा होना शुरू हो गए। दूसरा नगाड़ा बजने पर गांव के पटेल उदयलाल और गढ़ के ठाकुर सत्येंद्र सिंह राणावत ने दड़े की पूजा की। तीसरा और अंतिम नगाड़ा बजने के साथ पटेल दड़े को लेकर मैदान में आ गया। पटेल ने तीन बार दड़े को खिलाड़ियों के बीच उछाला। तीसरी बार उछालने पर खिलाड़ियों ने दड़े को पकड़ लिया। दोनों टीमों के खिलाड़ी खेल में जुट गए। करीब 2 घंटे दड़ा मैदान में डोलता रहा। अंत में रिजल्ट आया कि यह वर्ष अच्छा रहेगा। सुकाल की घोषणा पर मिठाइयां बांटी।

धनोप में हर साल होता है यह आयोजन, गांव पटेल ने इस बार जमाना अच्छा रहने की बात कहते ही बंटी मिठाई

दड़ा ने पिछले वर्ष भी सुकाल के दिए थे संकेत

धनोप सरपंच मिश्रीलाल माली ने बताया कि गत वर्ष दड़ा खेल ने सुकाल के संकेत दिए थे। उस समय भी दडा गढ़ में गया था। इस बार भी दड़ा उसी स्थिति में रहा। यहां के लोग इस खेल को धनोप माता का वरदान मानते हैं। 7 किलो वजनी सूतली से निर्मित दड़ा होता है। इस खेल को स्थानीय भाषा में “हडूड्या” भी कहा जाता है।

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